इतिहास के गवाह होने की ख़ुशी

तारीख़ 21 मई 1997, चेन्नई में भारत और पाकिस्तान के बीच मैच. भारत की कमान थी सचिन तेंदुलकर के हाथों में और पाकिस्तान के कप्तान थे रमीज़ राजा.

पाकिस्तान ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाज़ी का फ़ैसला किया. सईद अनवर और शाहिद आफ़रीदी पारी की शुरुआत करने उतरे.

शाहिद आफ़रीदी फिर रमीज़ राजा और उसके बाद एजाज़ अहमद आउट हुए मगर दूसरे छोर पर टिके सईद अनवर ने भारतीय गेंदबाज़ों की धज्जियाँ उड़ा दीं.

भारत के अधिकांश क्रिकेट प्रेमियों ने सईद अनवर की उस पारी के बाद ही टेलिविज़न सेट छोड़ दिया था, जीत की उम्मीद छोड़ दी थी.

अनवर ने उसी मैच में 194 रनों की पारी खेली थी और ये संयोग ही है कि वो तेंदुलकर की गेंद पर गांगुली के हाथों कैच आउट हुए थे.

अनवर ने 22 चौकों और पाँच छक्कों की मदद से 146 गेंदों में वो रन बनाए थे.

भारत ने जीत की उम्मीद पाकिस्तान के 327 रनों के सामने छोड़ ही दी थी और भारत वो मैच राहुल द्रविड़ के शतक के बावजूद 35 रनों से हार गया.

आज लगभग 13 साल बाद और अप्रैल में 37 साल के होने जा रहे सचिन तेंदुलकर ने वो रिकॉर्ड बड़ी ही ख़ूबसूरती से तोड़ दिया.

तुलना

ज़्यादातर क्रिकेट विशेषज्ञ दोनों पारियों की तुलना करने से शायद कतरा जाएँ क्योंकि निस्संदेह दोनों ही वनडे क्रिकेट की बेहतरीन पारियाँ हैं मगर कुछ आँकड़ों की तुलना तो की ही जा सकती है.

सचिन और सईद अनवर दोनों ने ही 1989 में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में प्रवेश किया. अनवर ने कुछ महीनों पहले किया था.

अनवर ने 29 साल की उम्र में और क्रिकेट करियर के आठ वर्ष बाद ही वो रिकॉर्ड बना दिया था मगर मास्टर ब्लास्टर वो करिश्मा 20 साल के क्रिकेट करियर में कर सके.

पर साथ ही ये भी देखने वाली बात है कि इस उम्र में आकर इस तरह का प्रदर्शन करना आसान बात नहीं है.

इसके अलावा सचिन ने भी किसी कमज़ोर टीम के विरुद्ध नहीं बल्कि दक्षिण अफ़्रीका जैसी वनडे की बेहतरीन टीम के विरुद्ध ये रिकॉर्ड क़ायम किया है.

सचिन ने 147 गेंदों में 25 चौकों और तीन छक्कों के साथ ये दोहरा शतक पूरा किया.

इस तरह सचिन ने इस पारी के ज़रिए एक पारी में सर्वाधिक चौके जड़ने का रिकॉर्ड भी अपने नाम कर लिया. उन्होंने 200 रनों में से 100 रन तो चौकों की मदद से ही बनाए.

पहले 100 रन तो उन्होंने 90 गेंदों में बनाए थे यानी अगले 100 रन बनाने में उन्होंने सिर्फ़ 57 गेंदें लीं. यानी सचिन पारी आगे बढ़ाते हुए थके नहीं बल्कि और जोश से खेले.

वो तो अंतिम कुछ ओवरों में कप्तान महेंद्र सिंह धोनी भी आतिशबाज़ी दिखाने लगे वरना सचिन तेंदुलकर का स्कोर और बड़ा हो सकता था.

सईद अनवर को उस पारी में 19वें ओवर से आख़िर तक रनर की ज़रूरत पड़ी थी और शाहिद आफ़रीदी वो रनर थे मगर सचिन तेंदुलकर ने पूरे 50 ओवर खेले और आख़िर की तरफ़ थोड़े असहज दिख रहे तेंदुलकर बिना किसी रनर के दौड़े.

अनवर का वो रिकॉर्ड 13 साल रहा, तेंदुलकर का ये वनडे में दोहरे शतक का रिकॉर्ड कब तक रहेगा ये कहना मुश्किल है.

वैसे जिस तरह का क्रिकेट आजकल खेला जाता है ये रिकॉर्ड अगर 13 साल तक टिका नहीं रह पाए तो आश्चर्य नहीं होगा.

मगर एक बात तो है कि पहले का मान ज़्यादा ही होता है इसलिए अगर रिकॉर्ड टूट भी गया तो वनडे में पहले दोहरे शतक का रिकॉर्ड तो अब सचिन से कोई नहीं ले सकता.

और अभी से उस भावी पारी के बारे में क्या सोचना, हम सब इतिहास के गवाह बने हैं इसी ख़ुशी को फ़िलहाल जी लिया जाए.

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