भारी पड़ेगा अरबों का दांव

Image caption आईपीएल में दो नई टीमों की नीलामी की रकम पिछली आठ टीमों की कुल रक़म से ज़्यादा है.

चीयरलीडर्स अब भी इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) की दो नई टीमों को ख़रीदने के लिए दी गई रकम की गिनती करने में मशगूल हैं.

क्रिकेट के कट्टर समर्थक और इस खेल से सबसे अधिक फ़ायदा उठाने वालों में शायद ही किसी ने ये सोचा हो कि आईपीएल में इतनी कमाई होगी और ये कुबेर का खज़ाना बन जाएगा.

यहाँ तक कि आईपीएल के पहले दो संस्करणों में घाटा उठाने वाले मौजूदा टीमों के मालिक भी आईपीएल की इन दो टीमों के लिए लगाई गई भारी भरकम बोली से अचंभे में हैं. वे तो उम्मीद कर रहे हैं कि अगर इस बार भी वे मुनाफ़े की स्थिति में नहीं आ सके तो कम से कम उन्हें नुक़सान न उठाना पड़े.

मौजूदा स्थिति को देखते हुए मोटा-मोटा अनुमान है कि इन दो नई टीमों के मालिकान को अगले सात वर्षों तक हर साल कम से कम 100 करोड़ रुपये का घाटा उठाना पड़ेगा.

मौजूदा टीमों के मालिकों से जुड़े सूत्र कहते हैं, "हमने इन दो टीमों के मालिकों के मुक़ाबले काफ़ी सस्ते में टीमों को ख़रीदा था और अब भी मुनाफ़े की स्थिति में नहीं हैं, ऐसे में ये अंदाज़ा लगाना मुश्किल नहीं है कि इन दो टीमों को हर साल 100 से 150 करोड़ रुपये का घाटा उठाना पड़ेगा."

नफ़ा-नुक़सान

लेकिन मेरी चिंता यहाँ आईपीएल से जुड़े व्यवसाय को नफ़े-नुक़सान के चश्मे से देखना नहीं है. अगर ब्रैंड को बढ़ावा देने के लिए अपनी तिज़ोरी खोलने वालों की कमी नहीं है तो फिर हमें परेशान होने की क्या ज़रूरत है. जब आखिर में फ़ायदा क्रिकेट का ही होना है तो फिर इस कारोबार के नफ़े-नुक़सान के चक्कर में क्या पड़ना.

इस खेल की चिंता करने वालों को सवाल ये उठाना चाहिए और बहस करनी चाहिए कि कहीं क्रिकेट तबाही की राह पर तो नहीं चल रहा है.

जब दांव पर आईपीएल टीमों के मालिकों और टेलीविज़न चैनलों की इतनी बड़ी रकम लगी हो तो क्या नहीं लगता कि भविष्य में आईपीएल प्रमोटर्स और टेस्ट क्रिकेट के समर्थकों के बीच लड़ाई और तेज़ होगी?

क्रिकेट के तीन संस्करणों टेस्ट, वनडे और ट्वेन्टी-20 को कुल मिलाकर 365 दिनों में ही समेटा जाना है और ये बताने के लिए भविष्यवक्ता होने की ज़रूरत नहीं है कि आईपीएल को दुनिया के दूसरे हिस्सों में ले जाने की मांग दिन पर दिन ज़ोर पकड़ने लगी है.

फ्रेंचाइज़ी के लिए अपनी रकम वसूलने के लिए लगभग डेढ़ महीने का समय बहुत कम है और अब जबकि खिलाड़ियों की तनख्वाह की ऊपरी सीमा और बढ़ा दी गई है तो इसमें शक नहीं कि कुछ और बड़े खिलाड़ी आईपीएल के लिए अपना करियर दांव पर लगाने के लिए तैयार हो जाएंगे.

इससे न केवल आईपीएल और आईसीसी के बीच लड़ाई तेज़ होगी, बल्कि क्रिकेट की दुनिया भी विभाजित हो सकती है. क्रिकेट के परंपरागत समर्थक कैरी पैकर के ख़िलाफ़ जंग इसलिए जीत सके थे क्योंकि क्रिकेट के अस्तित्व पर ही ख़तरा मंडराने लगा था.

दुनिया के सबसे मालामाल क्रिकेट बोर्ड बीसीसीआई ने आज अपनी हिस्सेदारी उद्योग घरानों को बेच दी है. इससे ज़्यादा और क्या कहा जा सकता है कि बोर्ड के सचिव भी आईपीएल की एक टीम के मालिक हैं और दिग्गज कमेंटेटर लीग के लिए तनख्वाह पर काम करते हैं.

आईपीएल एक दैत्य बन गया है जो अगर अपनी महत्वाकांक्षा के बोझ तले खुद नहीं दबा तो ये मौजूदा क्रिकेट के अस्तित्व को ही खत्म कर देगा.

(लेखक हिंदुस्तान टाइम्स के खेल सलाहकार हैं)

संबंधित समाचार