सचिन मेरे आदर्श हैं: सौरभ तिवारी

सौरभ तिवारी
Image caption सौरभ तिवारी पिछले तीन साल से मुंबई इंडियंस के लिए खेलते हैं

इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल-3) में जो नई प्रतिभाएँ उभर कर आई हैं, उनमें से एक हैं बाएँ हाथ के बल्लेबाज़ और झारखंड टीम के कप्तान सौरभ तिवारी. मुंबई इंडियंस की ओर से खेलते हुए विस्फोटक बल्लेबाजी कर चुके सौरभ बचपन से ही सचिन को अपना आदर्श मानते हैं.

दिलचस्प बात है कि जब सचिन बल्ला लेकर अपना पहला टैस्ट खेलने मैदान में उतरे थे तब सौरभ (जो आज 20 वर्ष के हैं) का जन्म नहीं हुआ था.

अब उनकी अगुवाई में खेलते हुए सौरभ ने अपने इस आदर्श से बहुत कुछ सीखा है. सौरभ कहते हैं कि टी-20 में ऊँचे-ऊँचे शाट्स खेलना ज़रूरी है. सौरभ ने ईडन गार्डेन्स में कुछ सवालों के जवाब दिए. पेश हैं बातचीत के मुख्य अंश:

आपने क्रिकेट को क्यों चुना? क्या महेंद्र सिंह धोनी का कुछ असर था?

मुझे बचपन से ही क्रिकेट खेलने का शौक था. मेरे माता-पिता ने भी हमेशा उत्साह बढ़ाया. मैं धोनी के खेलने की शैली तो पसंद करता था पर उनसे कभी ख़ास मुलाकात नहीं हुई. वे अंतरराष्ट्रीय मैचों में व्यस्त रहते हैं.

लेकिन आपके बालों का स्टाइल तो वैसा ही है जैसा पहले धोनी का था?

यह उनकी नकल नहीं है. मैं किशोरावस्था से ही लंबे बाल रखता हूँ.

आप पर सबसे ज्यादा किसका असर रहा है?

सचिन तेंदुलकर का. वे मेरे सबसे पसंदीदा खिलाड़ी, बल्कि आदर्श हैं. मैं उनको खेलते देखते हुए ही बड़ा हुआ हूँ.

अब सचिन के साथ एक टीम में खेलना कैसा लगता है ?

इस अनुभव को शब्दों में बयान नहीं किया जा सकता. मैं तीन साल से मुंबई इंडियंस में हूँ. लेकिन उनके जैसा विनम्र व्यक्ति और जूनियर खिलाड़ियों का उत्साह बढ़ाने वाला दूसरा कोई खिलाड़ी मैंने नहीं देखा. सचिन नए खिलाड़ियों से इतनी जल्दी घुल-मिल जाते हैं कि पता ही नहीं चलता कि वे इतने महान खिलाड़ी हैं. मैंने तो कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि एक दिन सचिन के साथ खेलूंगा.

आपकी छवि एक बिग हिटर की है. आपको कैसा लगता है?

टी-20 में तो वही कामयाब कहलाता है जो कम समय में अधिक से अधिक रन बटोर सके. इस तरह से मैं कुछ हद तक सफल रहा हूँ. यह खेल के इस स्वरूप की मांग है. अपनी पहचान बनाने के लिए इसमें लंबे-लंबे शाट्स खेलने पड़ते हैं. टी-20 ने मेरी बल्लेबाज़ी को और निखारा है.

आपके करियर की सबसे बड़ी उपलब्धि क्या है?

वर्ष 2009-10 के रणजी ट्रॉफी सीज़न में 593 रन बटोरना मेरी अब तक की सबसे अहम उपलब्धि है.

भारतीय टीम में शामिल होने के बारे में क्या सोचते हैं?

देखिए, मैं सिर्फ़ प्रदर्शन कर सकता हूँ. बाक़ी कुछ भी मेरे हाथ में नहीं है. हाँ, पहले के मुकाबले मेरा आत्मविश्वास बढ़ा है और मानसिक तौर पर भी मैं मज़बूत हुआ हूँ पर मेरा भरोसा प्रदर्शन में है. लगातार बेहतर प्रदर्शन करता रहा तो कामयाबी ज़रूर मिलेगी.

क्रिकेट के अलावा कोई और शौक?

खेलों में मेरी दिलचस्पी सिर्फ़ क्रिकेट में है. हाँ, हिंदी फ़िल्मों का शौकीन हूँ. शाहरुख़ ख़ान और कैटरीना की फिल्में मुझे बेहद पसंद हैं.

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