किस-किस को धोएगी ये लहर

धोनी
Image caption कप्तान महेन्द्र सिंह धोनी की रणनीतिक ग़लतियों की आलोचना हो रही है

भारत में अचानक एक ऐसी लहर उठी है जो कि डर है कहीं देश के सबसे चहेते क्रिकेट सितारों में से एक महेंद्र सिंह धोनी को न लील जाए.

माना तो ये जा रहा था कि आईपीएल जैसा चमत्कारिक ब्रांड बनाने वाला भारत टी20 वर्ल्ड कप में विरोधी टीमों को धूल चटा देगा. लेकिन अब जबकि भारत प्रतियोगिता से बाहर हो चुका है, खिलाड़ियों की फ़िटनेस, उनकी क्षमता और खेल के प्रति उनके समर्पण को लेकर सवाल उठने लगे हैं.

भारतीय टीम के कप्तान ने बहुत रणनीतिक ग़लतियाँ की हैं इसलिए उनकी ये बहानेबाज़ी नहीं चलने वाली है कि उनके और टीम के ख़राब प्रदर्शन का कारण आईपीएल से जुड़ा हुआ है.

भारतीय टीम के क्रियाकलापों के बारे में सामने आई बातों से प्रशंसकों और मीडिया को इतना बड़ा झटका लगा है कि उनके निशाने पर ललित मोदी की जगह धोनी और उनके खिलंदड़ आ गए हैं.

ये बड़ी ही रोचक बात है कि आईपीएल को नए टैलेंट के बेहतरीन प्लेटफ़ॉर्म बताने वाले कथित विशेषज्ञ ही अब आईपीएल के स्टैंडर्ड को नई प्रतिभा तराशने के लिए अनुपयुक्त बता रहे हैं.

हालाँकि आईपीएल के अंधसमर्थक अब भी आईपीएल के तौर-तरीक़े और और कार्यक्रम को खिलाड़ियों के निचुड़ने का दोषी क़रार देने को तैयार नहीं हैं.

क्रिकेट के लघुतम संस्करण में भी उछाल लेती गेंदों को झेलने में अक्षम बल्लेबाज़ों या टक्कर देने वाले गेंदबाज़ों के अभाव की स्थिति का बचाव करना मेरा काम नहीं है. न ही मैं रणनीतिक ग़लतियों, ख़ास कर गेंदबाज़ों को चुनने में संभव ग़लतियों के लिए धोनी का बचाव करना चाहूँगा.

लेकिन ये ज़रूर कहूँगा कि खिलाड़ियों की थके होने और चुस्त-दुरुस्त नहीं होने के पीछे आईपीएल की भूमिका को नज़रअंदाज़ करना या इस ओर इशारा करने के लिए धोनी की निंदा करना, मेरे ख्याल से, भारतीय क्रिकेट के लिए ठीक नहीं है.

हद से गुजरे

इस संदर्भ में विलियम ब्लैक का कथन याद आता है- "अति की राह बुद्धिमानी की तरफ़ जाती है...क्योंकि जब तक बात हद से न गुजर जाए, आप ये नहीं जान पाते हैं कि हद क्या है."

हमें हद पार करने की बात कोच गैरी कर्स्टन की उस चेतावनी से पता चल जानी चाहिए थी जो उन्होंने पिछले साल के टी20 वर्ल्ड कप में भारत की इस बार जैसी ही गत होने के बाद दी थी.

उन्होंने खिलाड़ियों के आईपीएल में खो जाने, उनके फ़िट नहीं होने और टीम के इंग्लैंड के माहौल से अच्छी तरह रूबरू नहीं होने की बातें गंभीरता से उठाई थीं.

कर्स्टन ने ये भी कहा था कि भविष्य में आईपीएल को भारतीय टीम के अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रमों को ध्यान में रखने हुए आयोजित किया जाना चाहिए. उनके अनुसार यदि ये संभव नहीं हो तो मुख्य खिलाड़ियों को आईपीएल से अलग रखा जाए.

गैरी कर्स्टन की सलाह को मानना तो दूर हमने हद से और आगे जाते हुए आईपीएल की रात्रिकालीन पार्टियों के प्रसारण अधिकार भी मोटी रकम लेकर एक एक टीवी चैनल को बेच दिया. एक तरह से ये खिलाड़ियों को मौज़मस्ती में डूबे रहने का लाइसेंस देने जैसा था जो कि खेल से उनका फ़ोकस हटा सकता था.

इसलिए खिलाड़ियों को पूरी ज़िम्मेदारी नहीं दिखाने का दोषी ज़रूर ठहराएँ जैसा कि धोनी ने भी कहा है कि उन्हें अपने शरीर का सम्मान करना चाहिए था, लेकिन जिन्होंने ये सब होने दिया वे भी निर्दोष नहीं कहे जा सकते.

ये सोच कर ही शरीर में सिहरन होने लगती है कि अगले साल भारतीय टीम का क्या हाल होगा, जब हमारे खिलाड़ी आईपीएल में 60 की जगह 94 मैचों में हिस्सा लेंगे!

मुझे नहीं लगता हमने और भारतीय क्रिकेट बोर्ड ने ये कहावत सुनी है- "जो बीती ग़लतियों को याद नहीं रख सकते, वे उसे दोहराने के लिए शापित होते हैं."

(लेखक हिंदुस्तान टाइम्स के खेल सलाहकार हैं)

संबंधित समाचार