गंभीर परिणामों की चेतावनी

मनोहर सिंह गिल
Image caption एमएस गिल के बयान के बाद भारत के खेल संघों के प्रमुख गोलबंद हो गए हैं

खेल संघों के अध्यक्षों के कार्यकाल की समय सीमा तय करने का मामला उलझता जा रहा है. अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति के सदस्य रणधीर सिंह ने कहा है कि खेल मंत्रालय के इस निर्णय के गंभीर परिणाम हो सकते हैं.

रणधीर सिंह भारतीय ओलंपिक संघ के महासचिव भी हैं.

सिंह ने ओलंपिक चार्टर से संबंधित नियमों को पढ़कर सुनाया और कहा कि ओलंपिक चार्टर की किसी भी अवहेलना की स्थिति में अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक संघ की कार्यकारिणी अपना निर्णय ले सकती है, जिसमें संबंधित संघ को मिली मान्यता रद्द करने और उसे ओलंपिक संघ से निलंबित करना शामिल है.

रणधीर सिंह ने दिल्ली में कहा, “ओलंपिक चार्टर के मुताबिक खेल संघों के पदाधिकारियों की संख्या और उनका कार्यकाल कोई बाहरी संस्था तय नहीं कर सकती. ये अधिकार सिर्फ़ संबंधित खेल संघों को है.”

दिशानिर्देश

खेल मंत्रालय ने हाल ही में एक दिशा निर्देश जारी किया था कि 1975 के नियमन में संशोधन कर दिया गया है जिसके अनुसार भारतीय ओलंपिक संघ और फ़ेडरेशनों के प्रमुख 12 साल से ज़्यादा अपने पदों पर नहीं रह सकते. साथ ही 70 वर्ष की आयु में उन्हें रिटायर होना पड़ेगा.

खेल मंत्रालय का दिशा निर्देश खेल संघों के प्रमुखों के बिलकुल रास नहीं आ रहा है.

14 वर्षों से भारतीय ओलंपिक संघ के अध्यक्ष सुरेश कलमाडी ने सोमवार को कहा था कि ये ऐसा आदेश जारी करने का समय नहीं है और न ही खेल मंत्रालय को इस तरह का आदेश जारी करने कोई अधिकार है.

कालमाड़ी समेत भारत में खेल संघों के कई शीर्ष पदाधिकारियों ने खेल मंत्रालय के इस फ़ैसले की आलोचना की है.

भारत में कई खेल संघों पर राजनीतिज्ञों का कब्ज़ा है और इनमें से कई की कुर्सी ताज़ा दिशा निर्देश के बाद ख़तरे में पड़ गई है.

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