मेज़बानी को लेकर विरोध

1938 का विश्व कप

1938 की विश्व कप की मेजबानी मिली फ़्रांस को. यह लगातार दूसरी बार था, जब विश्व कप की मेजबानी किसी यूरोपीय देश को मिली.

लेकिन फ़ीफ़ा के इस फ़ैसले से दक्षिणी अमरीकी देश काफ़ी नाराज़ हुए. उनकी मांग थी कि विश्व कप बारी-बारी से यूरोप और दक्षिणी अमरीकी देशों को मिले. इस फ़ैसले के विरोध में अर्जेंटीना और उरुग्वे ने प्रतियोगिता में हिस्सा नहीं लिया.

दूसरे विश्व युद्ध की छाया में इस बार का विश्व कप हो रहा था. स्पेन में गृह युद्ध चल रहा था, इटली ने इथियोपिया पर आक्रमण कर दिया था और जर्मनी ने ऑस्ट्रिया को अपने में मिला लिया था.

माना जाता है कि जिस तरह 1936 के विश्व कप का इस्तेमाल मुसोलिनी ने अपने प्रचार-प्रसार के लिए किया, उसी तरह हिटलर ने 1938 के विश्व कप का इस्तेमाल किया.

यह पहला मौक़ा था, जब मेजबान देश और पिछली विजेता टीम को विश्व कप में सीधे प्रवेश मिला. इस बार विश्व कप में 15 टीमों ने हिस्सा लिया.

पहले दौर के पाँच मैचों का फ़ैसला अतिरिक्त समय में हुआ जबकि दो मैच दोबारा खेले गए. इस प्रतियोगिता में ब्राज़ील के लियोनिडस का खेल देखने लायक़ था. 'द ब्लैक डायमंड' के रूप में मशहूर लियोनिडस ने कई बेहतरीन गोल दाग़े.

वापसी

लेकिन सेमी फ़ाइनल में उन्हें आराम देने का टीम प्रबंधन का फ़ैसला आत्मघाती साबित हुआ. लियोनिडस की अनुपस्थिति में ब्राज़ील की टीम सेमी फ़ाइनल में इटली से हार गई. जबकि दूसरे सेमी फ़ाइनल में हंगरी ने स्वीडन को 5-1 से पीटा.

तीसरे स्थान के लिए हुए मैच में लियोनिडस की ब्राज़ील की ओर से वापसी हुई और ब्राज़ील की शानदार जीत भी हुई. ब्राज़ील को तीसरे स्थान से ही संतोष करना पड़ा.

फ़ाइनल में इटली का सामना था हंगरी से. जिसके खिलाड़ी कमोबेश उनकी तरह की फ़ुटबॉल खेलते थे.पेरिस में हुए इस मैच में इटली ने पहले बढ़त हासिल की लेकिन जल्द ही हंगरी से स्कोर बराबर कर दिया.

इटली ने जल्द ही एक बार फिर बढ़त हासिल कर ली. पहले हाफ़ की समाप्ति पर इटली की टीम 3-1 से आगे थी. आख़िरकार इटली ने 4-2 से जीत हासिल कर लगातार दूसरी बार विश्व कप जीतने वाली पहली टीम बनने का गौरव हासिल किया.

इस विश्व कप के 15 महीने के अंदर दूसरा विश्व युद्ध शुरू हो गया और 12 साल तक यह प्रतियोगिता आयोजित नहीं हो पाई.

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