विश्व कप पर विश्व युद्ध की छाया

दूसरे विश्व युद्ध के कारण 12 साल बाद फ़ीफ़ा ने विश्व कप आयोजित कराने का फ़ैसला किया. हालाँकि यूरोपीय देश अभी भी विश्व युद्ध के प्रभाव से जूझ रहे थे.

फ़ीफ़ा ने इस बार दक्षिणी अमरीकी देश को मेजबानी देने का फ़ैसला किया और वह सौभाग्यशाली देश था ब्राज़ील.

इस बार प्रतियोगिता के स्वरूप में थोड़ा बदलाव किया गया. पहले राउंड में टीमों को चार ग्रुप में रखा गया और ग्रुप की विजेताओं को फ़ाइनल ग्रुप में खेलने का मौक़ा मिला.

फ़ाइनल ग्रुप में खेलने वाली टीमों में शीर्ष टीम को ख़िताब दिया गया. इस आधार पर यह पहला और एकमात्र विश्व कप था, जिसमें फ़ाइनल मैच नहीं खेला गया. बल्कि अंक के आधार पर टीम को विजेता घोषित किया गया.

इस विश्व कप में ट्रॉफ़ी को नाम दिया गया ज़ूल्स रिमे कप. ज़ूल्स रिमे विश्व कप के संस्थापक थे और उस समय फ़ीफ़ा के अध्यक्ष थे.

इस वर्ष पहली बार विश्व कप में शामिल हुई इंग्लैंड की टीम. लेकिन अर्जेंटीना ने ब्राज़ील से मतभेद के कारण विश्व कप से नाम वापस ले लिया.

विश्व युद्ध का प्रभाव ये था कि फ़ीफ़ा ने जर्मनी को निकाल दिया जबकि ऑस्ट्रिया, इक्वेडोर और बेल्जियम की टीम भी विश्व कप में खेलने नहीं आईं.

कई टीमों की अनुपस्थिति में भारत की टीम भी पहली बार विश्व कप के लिए क्वालीफ़ाई कर गई. लेकिन नंगे पाँव होने के कारण फ़ीफ़ा ने भारतीय टीम को खेलने नहीं दिया.

पहली बार विश्व कप में खेल रही इंग्लैंड की टीम को ख़िताब का प्रबल दावेदार माना जा रहा था.

लेकिन ऐसा हुआ नहीं. पहले तो टीम को उस समय क़रारा झटका लगा, जब अमरीका ने इंग्लैंड को 1-0 से हरा दिया.

निर्णायक मुक़ाबला

इसे विश्व कप के सबसे उलटफेर में से एक माना जाता है. इंग्लैंड की टीम स्पेन से भी 1-0 से हारकर पहले दौर से ही बाहर हो गई. फ़ाइनल राउंड में उसे जाने का मौक़ा तक नहीं मिला.

Image caption उरुग्वे की टीम बनी फिर चैम्पियन

ग्रुप स्टेज से फ़ाइनल राउंड में पहुँचने वाली चार टीमें थीं- ब्राज़ील, स्पेन, स्वीडन और उरुग्वे. इस प्रतियोगिता में सबसे शानदार प्रदर्शन कर रही थी मेजबान ब्राज़ील की टीम.

फ़ाइनल राउंड की भी ब्राज़ील ने इसी अंदाज़ में शुरुआत की. उसने स्वीडन को 7-1 और स्पेन को 6-1 से मात दी.

निर्णायक मैच के पहले ब्राज़ील की टीम फ़ाइनल ग्रुप में शीर्ष पर थी. ब्राज़ील और उरुग्वे के बीच निर्णायक मैच देखने के लिए लाखों की संख्या में दर्शक जुटें.

ख़िताब की दावेदार मानी जा रही थी ब्राज़ील की टीम, लेकिन हुआ उल्टा. उरुग्वे ने ब्राज़ील को 2-1 से हराकर दूसरी बार विश्व कप के ख़िताब़ पर क़ब्ज़ा कर लिया.

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