मोहिंदर अमरनाथ और साइना की यादें

विश्व कप 2010 दक्षिण अफ़्रीका में हो रहा है. विश्व कप फ़ुटबॉल का इतिहास बहुत पुराना है. हमने इस साल के विश्व कप के मद्देनज़र कुछ चर्चित चेहरों से विश्व कप से जुड़ी उनकी यादों को टटोलने की कोशिश है.

इसी कड़ी में पूर्व क्रिकेटर मोहिंदर अमरनाथ और बैडमिंटन खिलाड़ी साइना नेहवाल अपनी यादें हमसे बाँट रहे हैं.

मोहिंदर अमरनाथ (क्रिकेटर)

Image caption मोहिंदर अमरनाथ 1983 में भारत की विश्व क्रिकेट चैपियन टीम के सदस्य थे.

फ़ुटबॉल एक ऐसा खेल है जो पूरी दुनिया में खेला जाता है और एक खिलाड़ी होने के नाते इस खेल से दिलचस्पी होना स्भाविक है. जब भी विश्वकप आता है फ़ुटबॉल के मैच देखता हूं और क्रिकेट दौरे के दौरान भी देखता था.

फ़ुटबॉल के अनेक मुक़ाबलों ने मुझे काफ़ी रोमांचित किया है. लेकिन एक यादगार पल वर्ष 1978 के विश्वकप से जुड़ा हुआ है जब अर्जेंटीना ने जीत का झंडा फहराया था. फ़ाइनल मुक़ाबले के अतिरिक्त समय में अर्जेंटीना ने शानदार प्रदर्शन किया और नीदरलैंड पर 3-1 से जीत दर्ज की. ऐसे रोमांचक लम्हे फ़ुटबॉल के इतिहास में भी बहुत कम देखने को मिलते हैं.

मैंने फ़ुटबॉल के अधिकतर मुक़ाबले प्रवास के दौरान विदेशों में ही देखे हैं. उस दौरान मैं जिस देश में भी रहा हूं, वहां के लोगों में फ़ुटबॉल के प्रति काफ़ी जोश दिखा. यूरोप में तो इसके जुनून के क्या कहने. भारत में जिस तरह क्रिकेट के प्रति लोगों में उत्साह होता है यूरोप में फ़ुटबॉल के प्रति वही जुनून होता है.

मैं ब्राज़ील टीम का समर्थक हूं क्योंकि इस टीम के खेलने का तरीका़ और तैयारी सबसे अलग और अच्छी होती है.

मैं माराडोना का प्रशसंक हूं. उनकी सबसे बड़ी ख़ूबी उनकी आक्रामकता और प्रतिबद्धा थी.

भारतीयों में भी फ़ुटबॉल के हीरो के प्रति काफ़ी स्नेह और लगाव है. यही वजह है कि उनके नाम से बनने वाली फ़िल्में भारत में भी हिट हो जाती हैं. ‘बेंड इट लाइक बेकम’ इसकी मिसाल है. वैसे भारत में पश्चिम बंगाल और केरल जैसे राज्यों में फ़ुटबॉल काफ़ी लोकप्रिय है, लेकिन जब विश्वकप चल रहा होता है तो भारत के दूसरे हिस्सों में भी इसकी लोकप्रियता काफ़ी बढ़ जाती है.

साइना नेहवाल (बैडमिंटन खिलाड़ी)

Image caption हाल ही में विश्व बैंडमिंटन फ़ेडरेशन ने साइन को विश्व स्तर पर पांचवा स्थान दिया था.

मैं फ़ुटबॉल के बारे में बहुत ही कम जानती हूं और मेरी दिलचस्पी भी कम है. मैं न के बराबर फ़ुटबॉल मैच देखती हूं, लेकिन इतना ज़रूर जानती हूं कि विश्वकप फ़ुटबॉल जून में शुरू हो रहा है.

खेल के मामले में भारत बदल रहा है और भारतीयों की पसंद भी बदल रही है. अब वो स्थिति नहीं रही है कि किसी ख़ास खेल के खिलाड़ियों को ही सम्मान दिया जाए, बल्कि अच्छी बात यह है कि लोग सभी खेल को पसंद करने लगे हैं और उनके खिलाड़ियों को भी सम्मान दिया जा रहा है.

मैं समझती हूं कि लोग फ़ुटबॉल के मैच भी काफ़ी शौक़ के साथ देखेंगे.

संबंधित समाचार