ब्राज़ील का वर्चस्व टूटा

1974 में विश्व कप की मेजबानी मिली पश्चिम जर्मनी को. इस विश्व कप के दौरान फ़ुटबॉल की दुनिया में ब्राज़ील का वर्चस्व टूटा.

इस समय दुनिया में यूरोपीय फ़ुटबॉल का दबदबा चल रहा था. हॉलैंड और पश्चिम जर्मनी के सितारे बुलंद थे और दोनों ने इस विश्व कप में इसका प्रदर्शन भी किया.

हालाँकि हॉलैंड की टीम आक्रमक फ़ुटबॉल खेल रही थी और पश्चिम जर्मनी की रणनीति रक्षात्मक खेल की थी. ब्राज़ील ने यूरोपीय फ़ुटबॉल की भद्दी नकल की कोशिश तो की, लेकिन वे इसमें सफल नहीं हो पाए. पेले नहीं खेल रहे थे.

लेकिन ब्राज़ील की टीम दूसरे दौर में पहुँचने में सफल रही. हॉलैंड अपने ग्रुप से आसानी से क्वालीफ़ाई कर गया.

लेकिन पश्चिम जर्मनी के लिए यह आसान नहीं रहा. पूर्वी जर्मनी के हाथों उसे हार मिली, तो चिली और ऑस्ट्रेलिया को हराने में उसे काफ़ी मशक्कत करनी पड़ी. पहले दौर से बाहर होने वाली बड़ी टीम थी- इटली. जिसे हेटी को हराने में भी पसीना बहाना पड़ा और पोलैंड से हारकर तो टीम बाहर ही हो गई.

प्रदर्शन

दूसरे दौर में हंगरी का खेल देखते ही बनता था. हंगरी ने अर्जेंटीना को 4-0 से बड़े अंतर से मात दी. पूर्वी जर्मनी को भी हंगरी ने हराया और फिर ब्राज़ील को भी हराकर अपना बेहतरीन प्रदर्शन जारी रखा.

अन्य ग्रुप में पश्चिम जर्मनी और पोलैंड ने स्वीडन और यूगोस्लाविया की चुनौती समाप्त की. अब आख़िरी ग्रुप मैच में यह फ़ैसला होना था कि हॉलैंड का फ़ाइनल में किससे मुक़ाबला होगा.

फ़्रैंकफ़र्ट में हुए इस मैच में पोलैंड ने शानदार खेल का प्रदर्शन तो किया लेकिन घरेलू मैदान पर आख़िरकार पश्चिम जर्मनी की चली और पोलैंड को हार का सामना पड़ा.

हॉलैंड और पश्चिमी जर्मनी के बीच 'ऐतिहासिक दुश्मनी' को देखते हुए इस फ़ाइनल के प्रति लोगों का ज़बरदस्त आकर्षण था. फ़ाइनल में हॉलैंड ने शुरुआत अच्छी की, लेकिन बेकेनबॉवर वाली जर्मन टीम के आगे उसकी नहीं चली.

आख़िरकार पश्चिम जर्मनी की टीम 2-1 से जीत गई और दूसरी बार विश्व कप का ख़िताब जीतने में सफलता पाई.

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