इटली ने किया बड़ा उलटफेर

विश्व कप 2006

वर्ष 2006 का फ़ीफ़ा वर्ल्ड कप जर्मनी में आयोजित हुआ. कई धुरंधर टीमों की दावेदारी के बीच आख़िरकार इटली की टीम ने बाज़ी मारी. ये इटली का चौथा खिताब था.

फ़ाइनल में इटली ने फ़्रांस की टीम को मात दी. फ़्रांस के मशहूर खिलाड़ी ज़िनेदिन ज़िदान को रेड कार्ड मिलना फ़ाइनल का निर्णायक पल साबित हुआ.

हताश-परेशान फ़्रांस की टीम अपने स्टार खिलाड़ी की कमी को झेल नहीं पाई और पेनल्टी शूटआउट में इटली ने फ़्रांस को 5-3 से हरा दिया.

फ़ाइनल के दौरान ज़िनेदिन ज़िदान का इटली के खिलाड़ी मैतरात्ज़ी को सर से टक्कर मारने की तस्वीर कई दिनों तक सुर्ख़ियों में रही.

जर्मनी की टीम तीसरे और पुर्तगाल की टीम चौथे स्थान पर रही. ब्राज़ील की टीम को इस प्रतियोगिता में बड़ा दावेदार माना जा रहा था, लेकिन क्वार्टर फ़ाइनल में फ़्रांस के हाथों उसे हार मिली और टीम प्रतियोगिता से बाहर हो गई.

इंग्लैंड की टीम भी क्वार्टर फ़ाइनल में हार कर प्रतियोगिता से बाहर हुई. वर्ष 2006 का विश्व कप कई मायनों में अनोखा था. टेलीविज़न दर्शकों के मामले में इस विश्व कप ने इतिहास बनाया.

इस विश्व कप में पहली बार तीन ऐसी टीमों ने हिस्सा लिया, जिनकी राष्ट्रभाषा पुर्तगीज़ है. ये टीमें थी- पूर्तगाल, ब्राज़ील और अंगोला.

वर्ष 1982 के बाद पहली बार ऐसा हुआ कि किसी विश्व कप के सेमी फ़ाइनल में सिर्फ़ यूरोपीय टीमें आमने-सामने थी. भले ही मेज़बान जर्मनी की टीम विश्व कप का ख़िताब जीत नहीं पाई, लेकिन प्रतियोगिता काफ़ी सफल रही.

प्रदर्शन

जर्मनी के मिरोस्लाव क्लोज़ा को गोल्डन बूट मिला, उन्होंने इस विश्व कप में सर्वाधिक पाँच गोल मारे. जबकि विवादों के बावजूद फ़्रांस के ज़िनेदिन ज़िदान विश्व कप के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी चुने गए.

Image caption ज़िदान को रेड कार्ड दिखाया गया था

ऑस्ट्रेलिया, इक्वेडोर और घाना जैसे देशों के शुरुआती दौर में अच्छा प्रदर्शन करने के बावजूद वर्ष 2006 का विश्व कप पारंपरिक फुटबॉल के लिए ज़्यादा जाना गया.

पारंपरिक फ़ुटबॉल खेलने वाली टीमों का वर्चस्व इस विश्व कप में बना रहा. इस विश्व कप में सभी आठ वरीयता प्राप्त टीमों ने नॉक आउट स्टेज तक अपनी जगह बनाई.

साथ ही क्वार्टर फ़ाइनल में यूरोप और दक्षिण अमरीका के बाहर की कोई टीम नहीं थी. अर्जेंटीना और ब्राज़ील की टीमें क्वार्टर फ़ाइनल में ही बाहर हो गई और सेमी फ़ाइनल में सिर्फ़ यूरोप की टीमें बच गईं.

वर्ष 1934, 1966 और 1982 के बाद ये पहला मौक़ा था, जब सेमी फ़ाइनल की सभी टीमें यूरोप से थी.

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