प्रमुख खिलाड़ियों पर नज़र

दक्षिण अफ़्रीका में हो रहे विश्व कप फ़ुटबॉल पर दुनियाभर की नज़र है. फ़ुटबॉल प्रेमी एक महीने तक इस महामुक़ाबला का आनंद ले पाएँगे. मैचों के अलावा कुछ प्रमुख खिलाड़ियों के प्रदर्शन पर भी लोगों की नज़र होगी. आइए इन्हीं में से कुछ खिलाड़ियों के बारे में जानें.

लियोनेल मेसी (अर्जेंटीना)

दुनिया में आज अगर किसी युवा खिलाड़ी में वर्षों तक स्टार बने रहने की क्षमता देखी जा रही है, तो वो हैं अर्जेंटीना के लियोनेल मेसी. मेसी स्पेन के बार्सिलोना से क्लब फ़ुटबॉल खेलते हैं और पिछले कुछ वर्षों में उनका खेल और निखर कर सामने आया है.

24 जून 1987 को जन्मे मेसी अब तक दो बार फ़ीफ़ा की ओर से दुनिया के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी का पुरस्कार जीत चुके हैं. उनके खेलने की शैली अर्जेंटीना के ही पूर्व स्टार डिएगो माराडोना से मिलती है. और तो और माराडोना उन्हें अपना उत्तराधिकारी भी घोषित कर चुके हैं.

इस विश्व कप में अर्जेंटीना के प्रदर्शन का दारोमदार बहुत कुछ मेसी पर निर्भर करता है. मेसी ने बार्सिलोना की ओर से कई यादगार प्रदर्शन किए और चैम्पियंस लीग से लेकर ला लीगा में बार्सिलोना को जीत दिलाई है. तो अर्जेंटीना के फ़ुटबॉल प्रेमी उनसे यही उम्मीद कर रहे हैं कि वे विश्व कप में भी इसी तरह का कारनाम कर दिखाएँ.

क्रिस्टियानो रोनाल्डो (पुर्तगाल)

पुर्तगाल के क्रिस्टियानो रोनाल्डो खेले तो पिछले विश्व कप में भी थे लेकिन वे कुछ ख़ास नहीं कर पाए थे. हालाँकि पुर्तगाल की टीम चौथे स्थान पर रही थी. पहले मैनचेस्टर यूनाइटेड और फिर रियाल मैड्रिड से क्लब फ़ुटबॉल खेलने वाले रोनाल्डो जब मैदान पर होते हैं तो उनकी ड्रिबलिंग देखते ही बनती है. मैनचेस्टर यूनाइटेड से रिकॉर्ड फ़ीस पर वे रियाल मैड्रिड गए थे. क़रीब 132 मिलियन अमरीकी डॉलर पर उनका करार हुआ था. इस तरह वे इस समय दुनिया के सबसे महंगे खिलाड़ी हैं.

राष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा दिखा चुके रोनाल्डो को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उस समय पहचान मिली, जब मैनचेस्टर यूनाइटेड के मैनेजर सर एलेक्स फ़र्ग्यूसन ने उन्हें अपनी टीम में शामिल किया. इसके बाद तो रोनाल्डो ने शानदार प्रदर्शन से सबको मन मोह लिया.

पाँच फरवरी 1985 को जन्मे रोनाल्डो ने मैनचेस्टर यूनाइटेड के लिए वर्ष 2008 में चैम्पियंस लीग का ख़िताब भी जीता. साथ ही फ़ीफ़ा ने भी उन्हें सम्मानित किया. वर्ष 2009 के जुलाई महीने से रोनाल्डो रियाल मैड्रिड की ओर से खेल रहे हैं. इस विश्व कप में पुर्तगाल को उम्मीद है कि उनके स्टार खिलाड़ी अपना दम दिखाएँगे.

काका (ब्राज़ील)

एक और स्टार खिलाड़ी, जिन पर इस विश्व कप के दौरान नज़र होगी. काका ब्राज़ील की राष्ट्रीय टीम और स्पेन के रियाल मैड्रिड से क्लब फ़ुटबॉल खेलते हैं. काका ने आठ साल से ही फ़ुटबॉल खेलना शुरू किया था. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उन्हें भी उस समय पहचान मिली, जब उन्होंने वर्ष 2003 से इटली के क्लब एसी मिलान की ओर से खेलना शुरू किया. मिलान की ओर से खेलते हुए उन्हें वर्ष 2007 में फ़ीफ़ा की ओर से दुनिया के सर्वश्रेष्ठ फ़ुटबॉल खिलाड़ी का पुरस्कार मिला.

वर्ष 2009 में काका ने एसी मिलान से रियाल मैड्रिड का रुख़ किया और फ़िलहाल रियाल मैड्रिड के एक अहम खिलाड़ी हैं. अंतरराष्ट्रीय मैचों में ब्राज़ील की ओर से कई मैच खेलने के बाद उन्हें 2006 के विश्व कप में ब्राज़ील की ओर से खेलने का मौक़ा मिला.

ब्राज़ील का प्रदर्शन बहुत कुछ काका के प्रदर्शन पर भी निर्भर करता था. लेकिन ब्राज़ील की टीम क्वार्टर फ़ाइनल में फ़्रांस के हाथों हार कर विश्व कप से बाहर हो गई. लाखों लोगों के दिल टूटे. इस बार भी ब्राज़ील की टीम का प्रदर्शन बहुत कुछ काका पर निर्भर करता है.

ज़ावी (स्पेन)

स्पेन के मिडफ़ील्डर ज़ावी बार्सिलोना क्लब की ओर से खेलते हैं और उन्हें बेहतरीन खिलाड़ी माना जाता है. अंतरराष्ट्रीय फ़ुटबॉल जगत में ज़ावी को बेहतरीन 'प्लेमेकर' माना जाता है. वर्ष 2009 के चैम्पियंस लीग फ़ाइनल में ज़ावी ने अपने क्लब बार्सिलोना की ओर से खेलते हुए शानदार प्रदर्शन किया था और बार्सिलोना की टीम ख़िताब भी जीती. उन्हें उस समय मैन ऑफ़ द मैच चुना गया.

स्पेन की राष्ट्रीय टीम के नियमित सदस्य ज़ावी को बेहतरीन मिडफ़ील्डर माना जाता है. एक बेहतरीन मिडफ़ील्डर के रूप में ज़ावी का उदय बहुत कुछ बार्सिलोना की ही देन है. जहाँ वे 11 वर्ष की उम्र से ही जमे हुए हैं.

स्पेन की युवा टीम से खेलने वाले ज़ावी को राष्ट्रीय टीम में भी जगह मिली और वहाँ भी उन्होंने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया. वर्ष 2008 के यूरो कप में स्पेन के सफल अभियान में ज़ावी की अहम भूमिका थी.

फ़ाइनल में उनके ही शानदार पास पर फ़र्नांडो टोरेस ने विजयी गोल दागा था. इस प्रतियोगिता में उन्हें प्लेयर ऑफ़ टूर्नामेंट चुना गया. इस विश्व कप में भी स्पेन का यह मिडफ़ील्डर बाक़ी टीमों के लिए ख़तरे की घंटी है.

स्टीवेन जिरार्ड (इंग्लैंड)

इंग्लैंड का ऐसा खिलाड़ी, जो उतनी चर्चा में तो नहीं रहता लेकिन अपने शानदार खेल से सभी आलोचकों को करारा जवाब देता है. एक ऐसा खिलाड़ी, जिसके सधे हुए शॉट्स फ़ुटबॉल की ख़ूबसूरती को बढ़ा देते हैं.

30 मई 1980 को जन्मे जिरार्ड ने अपना क्लब करियर लिवरपुल में ही लगा दिया. वर्ष 1998 से लिवरपुल से जुड़े जिरार्ड अब भी इस टीम का हिस्सा हैं. अपने क्लब के लिए दो एफ़ए कप, दो लीग कप, एक यूएफ़ा कप और एक चैम्पियंस लीग जीता है.

जिरार्ड ने अपना अंतरराष्ट्रीय करियर वर्ष 2000 में शुरू किया था. उन्होंने वर्ष 2000 और 2004 में यूएफ़ा यूरोपियन चैम्पियनशिप में इंग्लैंड का प्रतिनिधित्व किया. वर्ष 2002 के विश्व कप के क्वालीफ़ाइंग राउंड में जिरार्ड ने शानदार खेल दिखाया था. लेकिन विश्व कप में वे नहीं खेल पाए क्योंकि उन्हें चोट के कारण प्रतियोगिता से हटना पड़ा. 2006 के फ़ीफ़ी वर्ल्ड कप में इंग्लैंड की ओर से सर्वाधिक दो गोल भी उन्होंने ही मारे थे.

वेन रूनी (इंग्लैंड)

भले ही रूनी मैदान पर अपने ग़लत व्यवहार के कारण जाने जाते हों और ग़ुस्सा उनकी नाक पर रहता हो, लेकिन उनका खेल ही उन्हें काफ़ी लोकप्रिय बनाता है. वेन रूनी ने एवर्टन के साथ अपना क्लब फ़ुटबॉल करियर शुरू किया था. वर्ष 2002 में उन्होंने प्रोफ़ेशनल फ़ुटबॉल करियर शुरू किया और उस समय सबसे कम उम्र में स्कोर करने वाले क्लब खिलाड़ी बने थे. वर्ष 2004 में मैनचेस्टर यूनाइटेड की ओर से उन्होंने खेलना शुरू किया और इसके साथ ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली. मैनचेस्टर यूनाइटेड के लिए वेन रूनी ने तीन प्रीमियर लीग ख़िताब, दो लीग कप और एक चैम्पियंस लीग ख़िताब जीता. रूनी ने वर्ष 2003 में इंग्लैंड के लिए अंतरराष्ट्रीय मैच खेलना शुरू किया. वर्ष 2004 के यूरो कप में रूनी को खेलने का मौक़ा मिला. और कुछ समय के लिए प्रतियोगिता के सबसे कम उम्र के गोल स्कोरर भी बने. इसके बाद रूनी नियमित रूप से इंग्लैंड की टीम का हिस्सा बने रहे. उन्होंने वर्ष 2006 के फ़ीफ़ा विश्व कप में भी इंग्लैंड की टीम का प्रतिनिधित्व किया. इसी विश्व कप में पुर्तगाल के ख़िलाफ़ मैच में रूनी को रेड कार्ड दिखाया गया और अपने क्लब के तत्कालीन साथी खिलाड़ी रोनाल्डो से उनकी झड़प ने ख़ूब सुर्ख़ियाँ बटोरी.

पार्क जी सुंग (दक्षिण कोरिया)

दक्षिण कोरिया के कप्तान पार्क जी सुंग पहले ऐसे एशियाई खिलाड़ी हैं, जो चैम्पियंस लीग के फ़ाइनल में खेले हैं. इंग्लिश क्लब मैनचेस्टर यूनाइटेड की ओर से खेलते हुए वे कोरिया के पहले खिलाड़ी बने थे, जिसकी क्लब टीम ने चैम्पियंस लीग में जीत हासिल की.

25 फरवरी 1981 में जन्मे पार्क जी सुंग ने अपना करियर पहले कोरियाई और फिर जापानी क्लब के लिए खेलते हुए शुरू किया. जल्द ही उन्हें नीदरलैंड्स में क्लब फ़ुटबॉल खेलने का मौक़ा मिला. वहाँ उन्होंने पीएसवी आइंडहोवेन की ओर से कई मैच खेले और टीम 2004-05 में चैम्पियंस लीग के सेमी फ़ाइनल तक पहुँची.

मैनचेस्टर यूनाइटेड के मैनेजर सर एलेक्स फ़र्ग्यूसन ने उनकी प्रतिभा को पहचाना और उन्हें टीम में शामिल किया. उस समय से ही सुंग मैनचेस्टर यूनाइटेड टीम का हिस्सा हैं. उनके टीम का हिस्सा रहते मैनचेस्टर यूनाइटेड ने तीन प्रीमियर लीग ख़िताब, एक चैम्पियंस लीग और एक फ़ीफ़ा क्लब वर्ल्ड कप भी जीता.

सुंग दक्षिण कोरियाई टीम का नियमित हिस्सा हैं और उन्होंने अब तक 85 अंतरराष्ट्रीय मैच भी खेले हैं. वर्ष 2002 के विश्व कप में दक्षिण कोरिया की टीम चौथे स्थान पर पहुँची थी. उस समय सुंग दक्षिण कोरियाई टीम का हिस्सा थे.

रॉबिन्हो

यूरोपीय क्लब फ़ुटबॉल में अपने उतार-चढ़ाव से भरपूर करियर के बाद ब्राज़ील के स्ट्राइकर रॉबिन्हो इस समय अपने देश के क्लब सैन्टोस की ओर से खेलते हैं. ब्राज़ील के महान फ़ुटबॉल खिलाड़ी पेले ने निजी रूप से रॉबिन्हो की प्रतिभा को पहचानकर उन्हें आगे किया था.

यूरोपीय क्लब फ़ुटबॉल में रॉबिन्हो स्पेन के प्रतिष्ठित क्लब रियाल मैड्रिड की ओर से खेल चुके हैं. मैनचेस्टर सिटी की ओर से वे इंग्लिश फ़ुटबॉल का भी हिस्सा बने. इस समय वे लोन पर सैन्टोस की ओर से खेल रहे हैं.

ब्राज़ील की ओर से खेलते हुए रॉबिन्हो ने एक कोपा अमरीका टाइटिल औऱ दो कंफ़ेडरेशंस कप जीता है. वे वर्ष 2005 में कंफ़ेडरेशंस कप में ब्राज़ील की टीम का हिस्सा थे. ब्राज़ील ने ये प्रतियोगिता जीती थी. हालाँकि इसमें उन्होंने कोई ख़ास प्रदर्शन नहीं किया और न ही उन्हें नियमित खेलने का ही मौक़ा मिला.

लेकिन वर्ष 2007 के कोपा अमरीका कप में उन्होंने बेहतरीन प्रदर्शन किया. वर्ष 2009 के कंफ़ेडरेशंस कप में उन्होंने ब्राज़ील की ओर से हर मैच खेला. ब्राज़ील ने यह प्रतियोगिता भी जीती थी.

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