वर्ल्ड कप ट्रॉफ़ी ठोस सोने की? कभी नहीं.

वर्ल्ड कप ट्रॉफ़ी
Image caption ठोस सोने का होता तो अंगुलियाँ टूट जाती?

ब्रिटेन के एक प्रोफ़ेसर ने दावा किया है कि फ़ुटबॉल वर्ल्ड कप की ट्रॉफी़ ठोस सोने की नहीं है.

उल्लेखनीय है कि फ़ीफ़ा मौजूदा वर्ल्ड कप ट्रॉफ़ी के धातु वाले हिस्से को ठोस सोने का बताता है.

नॉटिंघम विश्वविद्यालय के रसायन शास्त्र के प्रोफ़ेसर मार्टिन पोलिएकॉफ़ के अनुसार यदि 14 इंच की वर्ल्ड कप ट्रॉफ़ी ठोस सोने की होती तो उसका वज़न कम-से-कम 70 किलोग्राम होता.

ज़ाहिर है इतने वज़न वाली ट्रॉफ़ी को लेकर खिलाड़ी झूमते हुए तस्वीरें नहीं खिंचाया करते, इसलिए प्रोफ़ेरस पोलिएकॉफ़ का कहना है कि या तो पूरी ट्रॉफ़ी ही खोखली है या फिर उसका एक हिस्सा पोला है.

लेकिन फ़ीफ़ा ने बीबीसी को बताया कि 1974 में निर्मित उसकी वर्ल्ड कप ट्रॉफ़ी ठोस सोने की है.

फ़ीफ़ा का कहना है कि वर्ल्ड कप ट्रॉफ़ी 14 इंच ऊँची है. ट्रॉफ़ी का कुल वज़न 6.175 किलोग्राम है जिसमें 4.9 किलोग्राम तो ठोस 18 कैरेट सोना है, जबकि ट्रॉफ़ी के दो स्तर क़ीमती रत्न मैलकाइट के हैं.

उल्लेखनीय है कि विजेता टीम को मूल ट्रॉफ़ी नहीं बल्कि उसकी प्रतिकृति दी जाती है. दो वर्ल्ड कप प्रतियोगिताओं की बीच की अवधि में मूल ट्रॉफ़ी फ़ीफ़ा के क़ब्ज़े में रहती है.

खोखला ग्लोब?

लेकिन प्रोफ़ेसर पोलिएकॉफ़ फ़ीफ़ा के दावों से अविचलित हैं. उनका कहना है कि इस आकार के शुद्ध सोने की ट्रॉफ़ी एक वयस्क व्यक्ति के बराबर वज़न की होगी.

उन्होंने कहा, "सोना बहुत भारी होता है. ये दरअसल सबसे ज़्यादा घनत्व वाले धातुओं में गिना जाता है."

प्रोफ़ेसर पोलिएकॉफ़ ने कहा, "मेरी गणनाओं के अनुसार यदि ये पूरी तरह ठोस सोने की होती तो इसमें 70 से 80 किलोग्राम सोना लगा होता."

फ़ीफ़ा के दावे पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि 'सॉलिड गोल्ड' का मतलब धातु वाला संपूर्ण हिस्सा ठोस सोने का होना चाहिए. ऐसा नहीं कि ऊपरी सतह तो सोने का है लेकिन उसके नीचे का शेष हिस्सा स्टील का है.

प्रोफ़ेसर पोलिएकॉफ़ ने कहा कि असल में ट्रॉफ़ी का कौन सा हिस्सा ठोस सोने का है और कौन नहीं, ये तो उनके लिए कहना मुश्किल है, लेकिन उन्हें लगता है कि ट्रॉफ़ी के ऊपर वाले हिस्से में जो ग्लोब है वो शायद भीतर से खोखला है.