घाना, जापान और कैमरून के मैच

Image caption जापान ने पहले मैच में कैमरून को हराया था

शनिवार को फ़ुटबॉल विश्व कप का पहला मैच डरबन में नीदरलैंड्स और जापान के बीच खेला जाएगा. जापान की टीम अपने देश से बाहर किसी भी विश्व कप में दूसरे दौर में नहीं पहुँची है.

लेकिन पहले मैच में कैमरून को हराने से टीम के हौसले बुलंद हैं. नीदरलैंड्स के ख़िलाफ़ मैच में जापान की टीम विश्वास से भरी होगी.

जापान की उम्मीदें एक बार फिर 24 वर्षीय केसुकी होंडा पर टिकी होंगी, जिन्होंने कैमरून के ख़िलाफ़ गोल भी किया था. लेकिन सच यही है कि जापान ने जिस कैमरून टीम को मात दी थी, वो कोई बहुत अच्छी नहीं थी.

नीदरलैंड्स के ख़िलाफ़ मामला बिल्कुल अलग होगा. नीदरलैंड्स ने भी अपने विश्व कप अभियान की शुरुआत जीत के साथ की थी.

नीदरलैंड्स ने अपने पहले मैच में डेनमार्क को दो गोल से हराया था. नीदरलैंड्स के आयन रॉबिन इस मैच में भी नहीं खेल पाएँगे.

लेकिन उनकी जगह टीम में शामिल किए गए एल्जेरो एलिया ने शानदार प्रदर्शन किया था. दोनों टीमों के बीच सिर्फ़ एक बार मुक़ाबला हुआ है, जिसमें नीदरलैंड्स की टीम 3-0 से जीत गई थी.

घाना के पास है बेहतरीन मौका

दूसरा मैच रस्टेनबर्ग में घाना और ऑस्ट्रेलिया के बीच खेला जाएगा. घाना ने अपने पहले मैच में सर्बिया को एक गोल से हराया था, तो ऑस्ट्रेलिया की टीम जर्मनी के हाथों बुरी तरह हारी थी.

इस स्थिति में घाना के लिए यह सुनहरा मौक़ा है कि वह दूसरे दौर में जाने का अपना सपना पूरा करे. ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ मिली जीत उसके सपने को पूरा कर सकता है.

सर्बिया के हाथों जर्मनी की हार से इस ग्रुप में स्थिति और रोचक हो गई है. ऑस्ट्रेलिया के टिम काहिल निलंबित हैं इसलिए मैच की शुरुआत करेंगे हैरी किवेल. उनका साथ देने जोश केनेडी को उतारा जा सकता है.

घाना की टीम में कोई बदलाव न होने की उम्मीद है इसलिए केविन प्रिंस बोटेंग को उनकी जगह मिलनी तय है.

कैमरून-डेनमार्क का मैच

दिन का आख़िरी मैच प्रीटोरिया में डेनमार्क और कैमरून के बीच खेला जाएगा. दोनों ही टीमें अपना-अपना पहला मैच हार गई हैं. इसलिए दूसरे दौर में अपना जगह बनाने की कोशिश में दोनों टीमें ये मैच जीतना चाहेंगी.

जापान के ख़िलाफ़ मिली हार के बाद कैमरून टीम के अंदर मतभेद की ख़बर है और माना जा रहा है कि खिलाड़ी कोच के फ़ैसले से ख़ुश नहीं. जापान के ख़िलाफ़ मैच में टीम के कप्तान और स्टार खिलाड़ी सैमुएल एटो राइट विंग से खेले, जिसकी कड़ी आलोचना हुई.

राइट विंग से खेलते हुए एटो एकदम विफल साबित हुए और उनको गेंद भी कम मिल रही थी. सौंग और जेरेमी जैसी वरिष्ठ खिलाड़ियों को मौक़ा न देने की भी आलोचना हो रही है. कई खिलाड़ियों का कहना है कि विश्व कप जैसे मुक़ाबले में युवा खिलाड़ियों के कंधे पर इतना भार देना उचित नहीं.

दूसरी ओर डेनमार्क की टीम विश्व कप में किसी अफ़्रीकी टीम से अभी तक नहीं हारी है. लेकिन टीम में वो पैनापन नज़र नहीं आता. टॉमसन और बेकमैन के फ़िटनेस पर सवाल बरकरार है लेकिन उम्मीद है कि बेन्टेंडर इस मैच में खेलेंगे.

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