युद्ध नहीं खेल है ये...

जर्मनी के आंतरिक मामलों और खेल मंत्री ने ब्रितानी प्रेस की इस बात के लिए आलोचना की है कि वो जर्मनी-इंग्लैंड विश्व कप मैच की रिपोर्टिंग में मैचों को युद्ध के तौर पर पेश कर रहा है.

जर्मनी और इंग्लैंड के बीच रविवार को फ़ुटबॉल विश्व कप के तहत मुक़ाबला है.

बीबीसी के बर्लिन संवाददाता का कहना है कि जर्मनी-इंग्लैंड मैचों से पहले टैबलॉएड अख़बारों के लेख पढ़कर ऐसा लगता है मानो किसी फ़ुटबॉल प्रतियोगिता के बारे में नहीं बल्कि युद्ध के मैदान से रिपोर्ट पढ़ रहे हों.

जर्मन मंत्री थॉमस डे माइज़ायरी ने बीबीसी से बातचीत में कहा है कि पत्रकारिता का ये तरीका पुराना हो चुका है. उन्होंने जर्मन लोगों से कहा कि वे ऐसी उकसाने वाली भाषा को नज़रअंदाज़ करें.

शनिवार को डेली स्टार की सुर्ख़ी में इंग्लैंड के वेन रूनी को धातु की हैट पहने हुए दिखाया गया था.

लेकिन जर्मनी के खेल मंत्री ( और आंतरिक मामलों के मंत्री) ने कहा, “ब्रितानी लोगों को ऐसी भाषा नहीं पढ़नी चाहिए. हो सकता है कि ऐसा लिखने से अख़बार ज़्यादा बिकते हों. ये अतीत की बातें हैं.वर्तमान और भविष्य में इसकी कोई जगह नहीं है. इसे नज़रअंदाज़ करना चाहिए.”

लेकिन बीबीसी संवाददाता का कहना है कि जर्मन प्रेस ने ब्रितानी अख़बारों में इस्तेमाल की गई भाषा को नज़रअंदाज़ नहीं किया है.

एक जर्मन टैबलॉएड ने इंग्लैंड के खिलाड़ियों को ‘यॉब्स’ कहा और उनके बर्ताव पर सवाल उठाए.

जबकि एक अन्य जर्मन टैबलॉएड में लेख छपा है कि क्यों जर्मनी इंग्लैंड को मैच में हरा देगी. इसमें जो कारण बताए गए हैं उसमें शामिल है कि जर्मन बेहतर प्रेमी हैं और जर्मनी की बीयर इंग्लैंड की बीयर से बेहतर है.

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