हावर्ड का नामांकन ख़ारिज

जॉन हावर्ड
Image caption अधिकतर सदस्य देश जॉन हावर्ड के नामांकन के विरुद्ध थे

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) ने ऑस्ट्रेलिया के पूर्व प्रधानमंत्री जॉन हावर्ड का उपाध्यक्ष पद के लिए नामांकन ख़ारिज कर दिया है.

इसका मतलब ये भी है कि शरद पवार के बाद हावर्ड की आईसीसी का अध्यक्ष बनने की कोशिशों पर भी पानी फिर गया है.

ऑस्ट्रेलियाई और न्यूज़ीलैंड क्रिकेट बोर्ड ने इस फ़ैसले पर गहरी निराशा व्यक्त की है.

ऑस्ट्रेलिया और न्यूज़ीलैंड के क्रिकेट बोर्डों ने संयुक्त रूप से जॉन हावर्ड का नाम उपाध्यक्ष पद के लिए प्रस्तावित किया था.

मगर आईसीसी के कार्यकारी बोर्ड की बैठक में जॉन हावर्ड के नाम पर काफ़ी चर्चा के बाद ये फ़ैसला हुआ कि हावर्ड के पास पर्याप्त समर्थन नहीं है.

दरअसल आईसीसी के 10 देश पूर्ण सदस्य हैं और उनमें से सात का समर्थन हावर्ड को चाहिए था मगर उनके पास इतने देशों का समर्थन नहीं था.

भारत के शरद पवार इस समय आईसीसी के उपाध्यक्ष हैं और वह एक जुलाई को अध्यक्ष पद का कार्यभार सँभालेंगे.

आईसीसी ने अक्तूबर 2007 में तय किया था कि विभिन्न क्षेत्रों की ओर से एक-एक करके उपाध्यक्ष पद के लिए नामांकन होगा और इस बार ऑस्ट्रेलिया और न्यूज़ीलैंड की बारी थी.

विरोध

Image caption शरद पवार एक जुलाई को आईसीसी के अध्यक्ष पद का कार्यभार सँभालेंगे

अब इन दोनों बोर्डों से 31 अगस्त तक अगला नामांकन तय करने के लिए कहा गया है. इसके लिए कोई मतदान नहीं किया गया.

फ़ैसले पर निराशा व्यक्त करते हुए दोनों बोर्डों के प्रमुखों ने एक साझा बयान में कहा, "जॉन हावर्ड एक जाने माने अंतरराष्ट्रीय राजनेता हैं और व्यापक चयन प्रक्रिया के बाद ही ऑस्ट्रेलिया और न्यूज़ीलैंड ने उन्हें नामित किया था."

इन दोनों बोर्डों के मुताबिक़ अब वे मिलकर साझा रणनीति पर विचार करेंगे.

जॉन हावर्ड का श्रीलंका, ज़िम्बाब्वे और दक्षिण अफ़्रीका ने खुलकर विरोध किया था.

दरअसल विरोध की एक वजह हावर्ड का क्रिकेट के प्रशासन में अनुभव नहीं होना भी थी. इसके अलावा बतौर प्रधानमंत्री उन्होंने श्रीलंकाई गेंदबाज़ मुथैया मुरलीधरन के गेंदबाज़ी ऐक्शन पर भी सवालिया निशान लगाए थे.

साथ ही उस समय वह ज़िम्बाब्वे के राष्ट्रपति रॉबर्ट मुग़ाबे के प्रशासन की भी आलोचना कर चुके थे जिसकी वजह से ज़िम्बाब्वे से उन्हें समर्थन नहीं मिला और दक्षिण अफ़्रीका ने पड़ोसी देश ज़िम्बाब्वे का साथ देने का फ़ैसला किया.

आईसीसी के प्रावधानों के तहत दो साल तक उपाध्यक्ष रहने के बाद ऑस्ट्रेलिया और न्यूज़ीलैंड की ओर से नामांकित होने वाला व्यक्ति ही 2012 में आईसीसी का अध्यक्ष भी बनेगा.

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