ब्राज़ील की राह आसान नहीं

विश्व कप में शुक्रवार से क्वार्टर फ़ाइनल मुक़ाबले शुरू हो रहे हैं और पहला मैच पाँच बार की चैंपियन ब्राज़ील की टीम और नीदरलैंड्स के बीच पोर्ट एलिज़ाबेथ में खेला जाएगा. दोनों टीमों के बीच काँटे की टक्कर होने की उम्मीद है.

फ़ीफ़ा रैंकिंग की बात करें तो नीदरलैंड्स की टीम ब्राज़ील से ज़्यादा पीछे नहीं है. रैंकिंग में ब्राज़ील शीर्ष पर है तो नीदरलैंड्स की टीम चौथे नंबर पर. इस विश्व कप की बात करें तो दोनों टीमों का प्रदर्शन बेहतरीन रहा है. थोड़े सवाल नीदरलैंड्स पर भी उठे हैं तो थोड़े ब्राज़ील पर भी. पुर्तगाल के ख़िलाफ़ मैच में जहाँ ब्राज़ील की रणनीति की आलोचना हुई थी, तो नीदरलैंड्स के खिलाड़ियों पर ये आरोप है कि वे पूरे फ़ॉर्म में नज़र नहीं आ रहे हैं.

नीदरलैंड्स ने नॉक आउट स्टेज में स्लोवाकिया को 2-1 से मात दी थी, तो ब्राज़ील ने चिली को 3-0 से हराया था. ग्रुप स्टेज के मैचों में नीदरलैंड्स पर ये आरोप लगा कि कुछ खिलाड़ियों के व्यक्तिगत खेल को छोड़कर उन्होंने बढ़िया टीम वर्क नहीं दिखाया. उनकी डिफ़ेंस लाइन की भी आलोचना हुई है. लेकिन सच यही है कि नीदरलैंड्स के ख़िलाफ़ जो दो गोल हुए हैं, वे दोनों फ़ील्ड गोल नहीं बल्कि पेनल्टी पर किए गए गोल हैं.

ब्राज़ील की बात करें, तो पुर्तगाल के अलावा अभी किसी और टीम से उसकी कड़ी टक्कर नहीं हुई है. कई मौक़े पर कोच डूंगा की रणनीति भी आलोचना के घेरे में आई है. टीम की बात करें, तो पिछले मैच में नीदरलैंड्स की ओर से आयन रॉबिन शुरू से खेले और गोल भी किया, तो एक मैच के निलंबन के बाद ब्राज़ील के काका भी चिली के ख़िलाफ़ मैच में उतरे. लेकिन ब्राज़ील के एलानो का इस मैच में भी खेलना मुश्किल है.

ब्राज़ील और नीदरलैंड्स के बीच 10 मुक़ाबले हो चुके हैं, जिनमें से तीन ब्राज़ील ने और दो नीदरलैंड्स ने जीते हैं. विश्व कप में दोनों टीमें तीन बार आमने-सामने हो चुकी हैं. वर्ष 1974 में नीदरलैंड्स ने ब्राज़ील को हराया था तो 1994 के विश्व कप में ब्राज़ील की जीत हुई थी. 1998 के सेमी फ़ाइनल में दोनों टीमें आमने-सामने थी, जो 1-1 से ड्रॉ हुऔ और पेनल्टी शूट आउट में ब्राज़ील जीत गया था.

इस मैच में जिन खिलाड़ियों पर नज़र होगी, वे हैं नीदरलैंड्स के आयन रॉबेन, वैन पर्सी और स्नाइडर जबकि ब्राज़ील के काका, रॉबिनियो और फ़ेबियानो.

घाना-उरुग्वे मैच

शुक्रवार को दूसरा क्वार्टर फ़ाइनल उरुग्वे और घाना के बीच जोहानेसबर्ग के सॉकर सिटी स्टेडियम में खेला जाएगा. उरुग्वे की टीम दो बार 1930 और 1950 में विश्व चैंपियन रह चुकी है, लेकिन 1970 के बाद टीम सेमी फ़ाइनल में जगह नहीं बना पाई है. तो इस बार उरुग्वे के पास सुनहरा मौक़ा है अपने सुनहरे अतीत में कुछ अच्छे पन्ने जोड़ने का.

दूसरी ओर घाना की टीम अगर सेमी फ़ाइनल में पहुँची, तो अंतिम चार में पहुँचने वाली वो पहली अफ़्रीकी टीम होगी. विश्व कप में घाना के रूप में एकमात्र चुनौती बची हुई है. इसलिए पूरा अफ़्रीकी महादेश घाना का समर्थन कर रहा है. घाना समर्थक तो फ़ाइनल में जाने की बात कर रहे हैं.

लेकिन घाना को इस अहम मैच में कई खिलाड़ियों के घायल होने और निलंबित होने का नुक़सान भी हो सकता है. घाना के मिडफ़ील्डर केविन प्रिंस बोटेंग घायल हैं लेकिन उनके समय रहते फ़िट होने की उम्मीद है.

अमरीका के ख़िलाफ़ मैच में स्ट्राइकर असामाओ जियान भी घायल हो गए थे लेकिन उम्मीद है कि इस अहम मैच में घाना का टीम प्रबंधन उन्हें मैदान पर ज़रूर उतारेगा. लेकिन जोनाथन मेनसा निलंबित हैं.

दूसरी ओर उरुग्वे की ओर से सेंटर बैक डिएगो गॉडिन नहीं खेलेंगे. टीम में अल्वारो परेरा की जगह अल्वारो फ़र्नांडीज शामिल किए गए हैं.

अब तक के प्रदर्शन की बात करें तो उरुग्वे ने फ़्रांस के साथ अपना मैच ड्रॉ किया था लेकिन उसने मैक्सिको और मेज़बान दक्षिण अफ़्रीका को मात दी. उरुग्वे ने नॉक आउट स्टेज में दक्षिण कोरिया को हराया था.

टीम के स्ट्राइकर लुईस स्वारेज़ और डिएगो फ़ोरलैन भी अच्छे फ़ॉर्म में हैं. घाना की बात करें तो टीम काफ़ी भाग्यशाली रही कि चार अंक होते हुए भी गोल अंतर के आधार पर टीम अगले दौर में पहुँची.

घाना ने पहले मैच में सर्बिया को 1-0 से मात दी और वही उसके लिए काफ़ी भाग्यशाली साबित हुआ. टीम का ऑस्ट्रेलिया से मैच ड्रॉ हुआ और जर्मनी से वे हार गए. लेकिन अमरीका के ख़िलाफ़ मिली शानदार जीत से टीम के हौसले बुलंद हैं.

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