नज़र मेडल पर: डोला बनर्जी

बीबीसी हिंदी आपके लिए आज से शुरू कर रही है एक विशेष शृंखला जिसमें आप जान सकेंगे भारत के उन दस एथलीट्स के बारे में जिनसे भारत को राष्ट्रमंडल खेलों में पदक की उम्मीदें हैं. इन सभी एथलीट्स की तैयारियाँ कैसी चल रही हैं इस पर बीबीसी हिंदी की नज़र रहेगी और खेलों से पहले तक उनकी सभी तैयारियाँ हम आप तक पहुँचाते रहेंगे. सोमवार से शुक्रवार तक आपके लिए बीबीसी हिंदी की विशेष शृंखला.

परिचय

प्रस्तुति: सायमा इक़बाल

डोला बनर्जी

कोलकाता के क़रीब बड़ानगर में दो जून 1980 को पैदा हुई डोला बनर्जी ने तीरंदाज़ी में नौ साल की उम्र में क़दम रखा.

उनके घर के सामने बड़ानगर आर्चरी क्लब था जहाँ उनके माता-पिता उन्हें रोज़ खेलने के लिए लेकर जाते थे.

वहाँ के कोच ने डोला के माता-पिता को सलाह दी कि वे अपनी बेटी को तीरंदाज़ी सिखाएं.

शुरुआत में तो डोला को रूटीन और प्रशिक्षण की नियमितता उबाऊ लगी लेकिन 1990 से पहले राज्य और फिर राष्ट्रीय स्तर पर पदक मिलने के साथ ही उनमें खेल के प्रति लगाव बढ़ने लगा.

उपलब्धियाँ

  • 2004, 2008 - ओलंपिक खेलों में हिस्सेदारी
  • 2007, डोवर, इंग्लैंड - स्वर्ण पदक, व्यक्तिगत रिकर्व वर्ग, विश्व कप
  • 2007, दुबई - विश्व चैंपियन, व्यक्तिगत रिकर्व वर्ग में
  • 2009 - विश्व कप में तीसरा स्थान
  • 2010, तुर्की - विश्व कप में चौथा स्थान
  • 2010 - सैफ़ गेम्स में स्वर्ण पदक

क्लिक करें डोला बनर्जी का परिचय

अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर 1996 में डोला ने जूनियर विश्व कप में हिस्सा लिया.

उसके बाद उन्होंने विभिन्न एशियाई चैंपियनशिप, एशियन गेम्स, विश्व कप और ओलंपिक खेलों में भाग लिया और पदक भी जीते.

डोला बनर्जी ने 2007 में डोवर में विश्व कप में रिकर्व व्यक्तिगत वर्ग में पहला स्थान हासिल किया.

उसी साल दुबई में वो विश्व कप के फ़ाइनल में स्वर्ण पदक जीतकर विश्व चैंपियन बनीं.

डोला बनर्जी अर्जुन पुरस्कार पाने वाली पहली महिला तीरंदाज़ हैं.



खेलों की तैयारी

डोला बैनर्जी

कोलकाता के स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ़ इंडिया सेंटर में तीरंदाज़ी का कैंप चल रहा है.

डोला कहती हैं, "एक साल से कैंप में तैयारी चल रही है. इसके अलावा हर साल में होने वाले चारों विश्व कप में भी भाग लिया है."

हाल ही में तुर्की में हुई विश्व चैंपियनशिप में रिकर्व वर्ग में डोला चौथे स्थान पर रहीं. वह कहती हैं, "इस साल भी खेलों के पहले हम कुछ टूर्नामेंट्स में खेलेंगे. हर टूर्नामेंट से हमें सीखने को मिल रहा है."

डोला कहती हैं कि पहले खेल के उपकरणों की गुणवत्ता को लेकर दिक्कतें थीं लेकिन अब उन्हें भी विश्व स्तरीय उपकरण मिलते हैं. लेकिन वो कहती हैं कि तीर और धनुष अब भी ज़रुरत के हिसाब से कम हैं. जहाँ साल में तीन से चार दर्जन तीरों की ज़रुरत होती है, वहाँ सिर्फ़ एक दर्जन ही मिलते हैं.

उम्मीदें

राष्ट्रमंडल खेलों में तीरंदाज़ी को पहली बार शामिल किया गया है.

ऐसी अनुभवी खिलाड़ी से स्वर्ण पदक की उम्मीद कोई आश्चर्य की बात नहीं. डोला भी मानती हैं कि सीनियर होने का कुछ दबाव उन पर है. लेकिन वो ये भी कहती हैं कि भारतीय टीम के बाकी सदस्य भी अच्छा प्रर्दशन कर रहे हैं. कोशिश सभी करेंगे क्योंकि भारत में खेल हो रहे हैं इसलिए सभी पर ज़िम्मेदारी ज़्यादा है.

डोला को उम्मीद है कि कुल आठ में से भारत कम से कम चार स्वर्ण पदक जीतेगा.

भारतीय टीम के कोच लिम्बा राम को भी डोला बनर्जी से बहुत उम्मीदें हैं. वो कहते हैं कि उनमें आत्मविश्वास कूट-कूट कर भरा है. लिम्बा राम को विश्वास है कि 2010 राष्ट्रमंडल खेलों में डोला बनर्जी ज़रुर स्वर्ण पदक जीतेंगी.

तस्वीरें

डोला बनर्जी

  • डोला बनर्जी
    पूर्व विश्व चैंपियन तीरंदाज़ डोला बनर्जी
  • डोला बनर्जी
    डोला बनर्जी और बाक़ी भारतीय तीरंदाज़ पिछले एक साल से दिल्ली राष्ट्रमंडल खेलों की तैयारी कर रहे हैं
  • तीरंदाज़ी
    तीरंदाज़ी 1982 के ब्रिस्बेन राष्ट्रमंडल खेलों के बाद 2010 खेलों में वापसी कर रहा है
  • एल बॉम्बेला देवी
    एक अन्य तीरंदाज़ एल बॉम्बेला देवी कहती हैं कि खेलों की तैयारी में उन्हें कोच के साथ डोला बनर्जी जैसी सीनियर खिलाड़ी भी मदद कर रही हैं.

कुछ खट्टा मीठा

तीरंदाज़ी

क्रिकेट के दीवाने भारत में अब भी बाक़ी खेल अपनी पहचान बनाने के लिए जूझ रहे हैं. तीरंदाज़ी भी उन्हीं में से एक है.

डोला कहती हैं, “पहले जब हम टूर्नामेंट में भाग लेने जाते थे तो ट्रेन में हमारा सामान देखकर अक्सर लोग पूछते थे कि क्या हम ऑर्केस्ट्रा लेकर जा रहे हैं. तब हम तीर धनुष दिखा कर लोगों को तीरंदाज़ी के बारे में बताते थे. इस पर भी लोगों को आश्चर्य होता था कि ऐसा भी कोई खेल होता है. तब बहुत ही ग़ुस्सा आता था.”

लेकिन डोला कहती हैं कि पिछले दो-तीन साल में स्थिति बदली है. वो कहती हैं, “मुझे लगता है 2007 में मेरे विश्व कप जीतने और फिर भारत के अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर बढ़िया प्रदर्शन के बाद स्थिति बदली है और लोग अब तीरंदाज़ी के बारे में जानने लगे हैं.”

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