नज़र मेडल पर : मोनिका देवी

परिचय

प्रस्तुति : सायमा इक़बाल

मोनिका देवी

2006 मेलबर्न राष्ट्रमंडल खेलों में 69 किलोग्राम वर्ग में रजत पदक जीतने वाली भारतीय महिला भारोत्तोलक एल मोनिका देवी ने 1997 में इस खेल में कदम रखा.

मणिपुर के विष्णुपुर ज़िले में रहने वाली मोनिका कहती हैं कि उन्हें शुरु से भारोत्तलन पसंद था और उनके घरवालों ने, ख़ासकर पिता, ने भी उन्हें इसके लिए प्रोत्साहित किया.

सुनिए मोनिका देवी का परिचय

राष्ट्रमंडल खेल भारत में हो रहे हैं और इसलिए मोनिका का सपना है कि वो अच्छा प्रदर्शन करके देश के लिए पदक जीतें.

एन कुंजारानी देवी और ओल्मपिक पदक विजेता करणम मल्लेश्वरी जैसी महिला खिलाड़ियों का अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर बेहतरीन प्रर्दशन के बावजूद अब भी भारोत्तोलन को लड़कों का खेल ही माना जाता है. लेकिन मोनिका मानती हैं कि भारतीय लड़कियों में लड़कों से ज़्यादा हिम्मत होती है.

खेलों की तैयारी

भारोत्तोलन

इन दिनों मोनिका पटियाला के मेजर ध्यानचंद नेशनल स्टेडियम में ट्रेनिंग कर रही हैं. वो अपनी तैयारी से ख़ुश हैं लेकिन कहती हैं कि अब भी उनके प्रर्दशन में सुधार की गुंजाइश है.

मोनिका कहती हैं कि ट्रेनिंग के दौरान उन्हें व बाकी खिलाड़ियों को कोच का पूरा सहयोग मिल रहा है.

कोच हरनाम सिंह को भी अपने शिष्यों पर पूरा भरोसा है और वो उनसे बढ़िया प्रर्दशन की उम्मीद कर रहे हैं.

भारोत्तोलन जैसे खेल में खान-पान का ख़ास ध्यान रखना होता है. इन खिलाड़ियों के खाने में फल, प्रोटीन सप्लीमेंट्स इत्यादि चीज़े शामिल हैं. मोनिका, भारतीय खेल प्राधिकरण, साई, द्वारा मुहैया कराई जा रही सुविधाओं से संतुष्ट हैं.

तस्वीरें

  • मोनिका देवी
    भारोत्तोलक एल मोनिका देवी ने 2006 राष्ट्रमंडल खेलों में 69 किलोग्राम वर्ग में रजत पदक जीता था.
  • मोनिका देवी
    मोनिका देवी पिछले एक महीने से पटियाला में 2010 राष्ट्रमंडल खेलों के लिए तैयारी कर रही हैं.
  • भारोत्तोलन
    2006 राष्ट्रमंडल खेलों में भारोत्तोलन में भारत को तीन स्वर्ण समेत कुल ग्यारह पदक मिले थे.
  • भारोत्तोलन
    भारतीय भारोत्तोलक रेणु बाला ट्रेनिंग के दौरान
  • भारोत्तोलन
    भारतीय भारोत्तोलक रेणु बाला ट्रेनिंग के दौरान

कुछ खट्टा-मीठा

मोनिका देवी

2008 ओल्मपिक्स के लिए मोनिका देवी का चुनाव हुआ था. लेकिन बीजिंग के लिए रवाना होने से कुछ घंटे पहले ही डोप टेस्ट फ़ेल होने की वजह से उनका नाम भारतीय टीम से वापिस ले लिया गया.

हालांकि बाद में भारतीय वेटलिफ़्टिंग फ़ेडेरेशन ने उन्हें इन आरोपों से बरी कर दिया लेकिन इसके बावजूद तकनीकी कारणों से वो इन खेलों में हिस्सा नहीं ले पाईं.

इस विवाद के बारे में मोनिका कहती हैं, “मैं पुरानी बात नहीं करना चाहती. अब मैं अच्छा प्रर्दशन कर देश का नाम रोशन करना चाहती हूं. अगर पुरानी बातें सोचूंगी तो आगे कैसे खेलूंगी.”

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