स्टेडियम में चमगादड़ों का आतंक

राष्ट्रमंडल खेलों के दौरान साइकलिंग प्रतियोगिता भी होनी है. इंदिरा गांधी स्पोर्ट्स कॉम्पलेक्स में इसके लिए विशेष लकड़ी का ट्रैक बिछाया गया है. भारतीय खेल प्राधिकरण का दावा है कि राष्ट्रमंडल खेलों के दौरान साइकलिंग प्रतियोगिताओं को देखने वाले दर्शक रोलिंग सीटों का आनंद उठा पाएँगे.

अधिकारियों का दावा है कि तकनीक कुछ ऐसी है कि जैसे-जैसे साइकलिंग ट्रेक ऊपर नीचे होगा वैसे-वैसे सीटें भी ऊपर नीचे जाती हैं. आशंका थी कि ऐसे में दर्शक बैठेंगे कैसे. लेकिन अधिकारियों का कहना है कि ऐसी विशेष तकनीक इस्तेमाल की गई है कि दर्शकों को कोई तकलीफ़ नहीं होगी और आभास ऐसा होता है कि सीटें रोल कर रही हैं.

दावा तो ये भी किया जा रहा है कि पहली बार ऐसा प्रयोग किया गया है और लंदन ओलंपिक्स की टीम भी अब इसे देखकर अपने यहाँ ऐसा प्रावधान करने जा रही है.

दावों की आज़माइश तो खेलों को दौरान ही होगी.

चमगादड़ों ने बढ़ाई मुसीबत

खेलों की तैयारी में अधिकारियों और प्रशासन को कई तरह की आलोचनाओं और चुनौतियों का सामना करना पड़ा है. लेकिन इंदिरा गांधी स्टेडियम में काम के दौरान अधिकारियों को अजब समस्या से दो चार होना पड़ा.

दरअसल स्टेडियम में करीब हज़ारों चमगादड़ थे. न उन्हें पकड़ना संभव था न उन्हें मारा जा सकता था. खेल शुरु होने से पहले उन्हें वहाँ से निकालना एक बड़ा सरदर्द बन गया था.

चमगादड़ रात में ही सक्रिय होते हैं.

दिल्ली वाइल्ड लाइफ़ की मदद से ये तरीका निकाला गया कि रात को बाक़ायदा दरवाज़े बंद कर दिए जाते थे ताकि चमगादड़ अंदर न आएँ और सुबह दरवाज़े खोल दिए जाते थे.

इसे देखने के बाद इन दस लाख चमगादड़ों ने धीरे-धीरे अपने-आप ही कहीं और बसेरा बना लिया.इस तरह अधिकारियों की समस्या भी ख़त्म हो गई और चमगादड़ भी बच गए.

ये विशेष हिमालयन चमगादड़ थे.

मीडिया को नसीहत

राष्ट्रमंडल खेलों को लेकर इनदिनों हर कोई मीडिया को नसीहत देने में लगा है कि वो नकारात्मक ख़बरें न दें.

कुछ दिन पहले थीम सॉन्ग से जुड़े कार्यक्रम में संगीतकार एआर रहमान ने मीडिया से गुज़ारिश की थी.

अब राष्ट्रमंडल खेलों के अध्यक्ष माइक फ़ेनेल ने ख़ुद मीडिया से आग्रह किया है कि वो सच्ची और सही रिपोर्टिंग करें.

तैयारियों का जायज़ा लेने आए फ़ेनेल ने पत्रकारवार्ता में कहा कि भारतीय मीडिया में राष्ट्रमंडल खेलों को लेकर गहरी दिलचस्पी है जो अच्छी बात है पर साथ ही दबे स्वर में पत्रकारिता का पाठ पत्रकारों को याद दिला दिया.

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