सिब्बल ने मांगी विश्वनाथन आनंद से माफ़ी

विश्वनाथन आनंद
Image caption विश्वनाथन आनंद ने चालीस गणितज्ञों के साथ शतरंज खेली-चित्र स्नैप इंडिया

विश्वनाथन आनंद की राष्ट्रीयता और उन्हें प्रस्तावित डॉक्ट्रेट की मानद उपाधि को लेकर उठे विवाद के बाद मानव संसाधन विकास मंत्री कपिल सिब्बल ने ख़ुद इस पूरे विवाद पर आनंद से माफ़ी माँगी है.

इस मसले की जानकारी देते हुए सिब्बल ने नई दिल्ली में कहा, "मैंने आनंद को फ़ोन करके कहा कि जो भी हुआ है हम उसके लिए माफ़ी माँगते हैं और जहाँ तक हमारा सवाल है हम उन्हें मानद उपाधि आज ही शाम को देना चाहते हैं."

उन्होंने बताया, "आनंद ने आज शाम को कुछ और कार्यक्रम होने के कारण इसमें असमर्थता जताई और तब मैंने कहा कि जो भी तारीख़ आपके लिए ठीक हो हम उस पर ये कार्यक्रम रखना चाहेंगे. इस पर वो रज़ामंद हुए हैं."

विश्वनाथन आनंद मंगलवार को हैदराबाद में एक अधिवेशन में सब के ध्यान का केंद्र बने हुए थे. उन्हों ने कांग्रेस में उपस्थित 40 गणितज्ञों के साथ एक ही समय पर शतरंज खेल कर सब को चकित कर दिया.

शांत और संयम

इस अवसर पर विश्वनाथन हमेशा ही की तरह शांत थे और मुस्कुरा रहे थे लेकिन यह बात किसी से छुपी नहीं थी की वह उन के साथ हुए सरकारी दुर्व्यवहार से खुश नहीं थे.

कपिल सिब्बल के मुताबिक़ उन्होंने आनंद को ये उपाधि देने के बारे में 22 मई को ही एक फ़ाइल पर हस्ताक्षर करके उसे स्वीकृति दे दी थी और इस पूरी प्रक्रिया में आनंद की राष्ट्रीयता के बारे में कभी कोई सवाल नहीं उठा.

मगर इस विवाद के बारे में आनंद की पत्नी अरुणा आनंद ने बीबीसी हिंदी से बातचीत में बताया कि उनसे जुलाई में आनंद के पासपोर्ट की प्रति माँगी गई थी जो उन्होंने उपलब्ध करा दी थी.

सिब्बल का कहना था कि हैदराबाद विश्वविद्यालय जिन लोगों को डॉक्ट्रेट की उपाधि देना चाहता था उन सभी के बारे में एक साथ जानकारी राष्ट्रपति को भेजी गई थी जिस पर राष्ट्रपति भवन से उस सूची में शामिल एक व्यक्ति के बारे में कुछ और जानकारी माँगी गई.

इस बीच विश्वविद्यालय का प्रस्तावित दीक्षांत समारोह निकल गया और विश्वविद्यालय ने कुछ नए लोगों के साथ आनंद को गणितज्ञ कांग्रेस के दौरान डॉक्ट्रेट देने की योजना बनाई.

सिब्बल के अनुसार इस बार जो कुछ दूसरे नाम थे उनमें फिर कुछ के बारे में पूरी सूचना उपलब्ध नहीं थी. एक बार फिर वो सूची मंत्रालय के पास लौट आई और चूँकि दोनों बार वो पूरी सूचियाँ लौटाई गई थीं जिनमें आनंद का नाम था तो सिर्फ़ उनके नाम पर सहमति की मुहर नहीं लग सकी.

मगर आनंद के पासपोर्ट की प्रति माँगना क्या सिर्फ़ प्रक्रिया का हिस्सा था या उसके ज़रिए आनंद की राष्ट्रीयता जानने की कोशिश की गई थी- ये इस पूरे विवाद में स्पष्ट नहीं हुआ है.

अगर वो उपाधि देने की प्रक्रिया का हिस्सा है तब तो इसे अनदेखा किया जा सकता है अन्यथा भारत का प्रतिनिधित्व करने वाले आनंद जैसे खिलाड़ी से राष्ट्रीयता का सबूत देने के लिए कहना सिर्फ़ आनंद को ही नहीं बल्कि किसी भी आम भारतीय को अखरेगा.

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