राष्ट्रमंडल खेलों में भारत

हैमिल्टन 1930 -पर्थ 1962

ब्रिटिश एम्पायर गेम्स
Image caption ब्रिटिश एम्पायर गेम्स का आयोजन सबसे पहले वर्ष 1930 हुआ था.

वर्ष 1930 में पहले राष्ट्रमंडल खेलों का आयोजन किया गया था. उस समय इस खेल का नाम 'ब्रिटिश एम्पायर गेम्स' हुआ करता था. वर्ष 1950 से इस खेल को ''ब्रिटिश एम्पायर एण्ड कॉमनवेल्थ गेम्स" के नाम से जाना जाने लगा.

वर्ष 1970 और 1974 में इस खेल का नाम ब्रिटिश कॉमनवेल्थ गेम्स रहा लेकिन वर्ष 1978 से अब तक खेलों के इस आयोजन को कॉमनवेल्थ गेम्स यानि राष्ट्रमंडल खेल के नाम से जाना जा रहा है.

वर्ष 1930, 1950, 1962 और 1986 में भारत ने इन खेलों में हिस्सा नहीं लिया. यहाँ ये बताते चलें कि वर्ष 1927 में नेशनल ओलंपिक कमिटी ऑफ इंडिया का गठन हो गया था.

भारत ने पहली बार वर्ष 1934 में लंदन में आयोजित ब्रिटिश एम्पायर गेम्स में भाग लिया. भारत को पहला पदक राशिद अनवान ने पुरुष कुश्ती के 74 किलोग्राम वर्ग में काँस्य पदक जीतकर दिलाया.

वर्ष 1938 में ऑस्ट्रेलिया के सिडनी शहर में आयोजित इस खेल में भारत ने भाग तो लिया लेकिन कोई पदक हासिल नहीं कर पाया.

Image caption भारत पहली बार पदक जीतने में सफल रहा.

वर्ष 1942 और 1946 में द्वितीय विश्व युद्ध के कारण इसका आयोजन नहीं हो पाया. वर्ष 1950 में न्यूज़ीलैंड के ऑकलैंड शहर में इस खेल का आयोजन हुआ लेकिन इस बार भारत ने इसमें हिस्सा नहीं लिया.

वर्ष 1954 में कनाडा के वैंकूवर शहर में आयोजित इन खेलों में भारत की पाँच स्पर्धाओं में भागीदारी तो थी लेकिन कोई पदक जीत पाने में विफल रहा.

भारत को 1934 के बाद यानी 24 वर्षों के लम्बे अंतराल के बाद वर्ष 1958 में वेल्स के कार्डिफ़ शहर में तीन पदक हासिल हुए, जिनमें दो स्वर्ण और एक रजत था.

पुरुषों की 440 गज दौड़ मिल्खा सिंह ने मात्र 46.6 सेकेंड में पूरी कर स्वर्ण पदक पर कब्ज़ा कर लिया. उन्होंने दक्षिण अफ्रीका के मैलकम क्लाइव स्पेंस और कनाडा के चार्ल्स टेरेंस टोबाको को पीछे छोड़ते हुए स्वर्ण पदक हासिल किया.

वहीं कुश्ती के 100 किलोग्राम वर्ग में लीला राम ने भी चार अंक हासिल कर स्वर्ण पदक हासिल किया जबकि कुश्ती में ही 74 किलोग्राम वर्ग में लक्ष्मीकांत पाण्डेय को रजत पदक लेकर ही संतोष करना पड़ा.

इसी वर्ष पुरुषों के 4 गुणा 440 गज रिले दौड़ में भारत पाँचवें स्थान पर रहा.

वर्ष 1962 में ऑस्ट्रेलिया के पर्थ शहर में इस खेल का आयोजन हुआ जिसमें भारत ने भाग नहीं लिया.

किंग्स्टन 1966

Image caption भारत को 10 पदक हासिला हुआ.

वर्ष 1966 में जमैका के किंग्स्टन शहर में जब भारत की वापसी हुई तो वहाँ भारत ने बेहतरीन प्रदर्शन किया और 10 पदक जीतते हुए पदक तालिका में दसवें से छठे स्थान पर आ गया (वर्ष 1958 में भारत दसवें स्थान पर था), जिनमें तीन स्वर्ण, चार रजत और तीन काँस्य शामिल हैं.

एथलीट प्रवीण कुमार ने पुरुष हैमर थ्रो में 60.13 मीटर हैमर फेंक कर रजत पदक हासिल किया. वहीं बैडमिंटन के पुरुष एकल में दिनेश खन्ना को काँस्य पदक मिला जबकि भारोत्तोलन के 60 किलोग्राम संयुक्त वर्ग में मोहन घोष ने 738 पाउण्ड वज़न उठाकर रजत पदक पर कब्ज़ा जमाया.

इस वर्ष भारत की कुश्ती ने जलवा दिखाया और सबसे ज़्यादा पदक इसी खेल ने दिलाए. पुरुष कुश्ती के अलग-अलग वर्गों में खिलाड़ियों ने तीन स्वर्ण, दो रजत और दो काँस्य पदक हासिल किए.

पहलवान विशम्भर सिंह ने 57 किलोग्राम वर्ग में ऑस्ट्रेलिया के केविन रोबर्ट मैक्ग्रा को चित कर स्वर्ण पदक पर कब्ज़ा जमाया तो 68 किलोग्राम वर्ग में मुख्तियार सिंह और 100 किलोग्राम वर्ग में भीम सिंह ने भी अपने-अपने प्रतिद्वंदियों को मात देकर स्वर्ण पदक हासिल कर लिए.

इतना ही नहीं 52 किलोग्राम वर्ग में श्यामराव साबले और 62 किलोग्राम वर्ग में रंधावा सिंह को रजत पदक मिला जबकि 74 किलोग्राम वर्ग में हुकुम सिंह और 90 किलोग्राम वर्ग में विश्वनाथ सिंह को काँस्य पदक से ही संतोष करना पड़ा.

एडिनबरा1970

Image caption भारत को 12 पदक मिला.

स्कॉटलैंड के एडिनबरा शहर में आयोजित इस खेल में भारत को वर्ष 1966 की तुलना में दो पदक का फ़ायदा हुआ लेकिन पदक तालिका में छठे स्थान से आगे न बढ़ सका. यहाँ भारत को कुल 12 पदक हासिल हुए जिनमें पाँच स्वर्ण, चार रजत और तीन काँस्य पदक शामिल थे.

इस बार भी पुरुष कुश्ती अपने लय में दिखी और पाँचों स्वर्ण पदक इसी खेल ने दिलाए. वेद प्रकाश को 48 किलोग्राम वर्ग में, सुदेश कुमार को 52 किलोग्राम वर्ग में, उदय चाँद को 68 किलोग्राम वर्ग में, मुख्तियार सिंह को 74 किलोग्राम वर्ग में और हरिश्चंद्र राजेंद्र को 82 किलोग्राम वर्ग में स्वर्ण पदक मिला.

इसके अलावा सज्जन सिंह को 90 किलोग्राम वर्ग में, विश्वनाथ सिंह को 100 किलोग्राम वर्ग में और मारुति माने को 100 किलोग्राम से ज़्यादा के वर्ग में रजत पदक मिला वहीं रंधावा सिंह को भी 62 किलोग्राम वर्ग में काँस्य पदक से संतोष करना पड़ा.

कुश्ती के अलावा भारोत्तोलन और मुक्केबाज़ी ने भी पदक दिलाए. पुरुष भारोत्तोलन के 60 किलोग्राम संयुक्त वर्ग में ए नवीस ने 335 किलोग्राम वजन उठाकर काँस्य पदक हासिल किया तो पुरुष मुक्केबाज़ी के 67 किलोग्राम वर्ग में एस भोंसले ने भी काँस्य पदक जीता.

वहीं मोहिंदर सिंह गिल ने भी पुरुष तिहरी कूद में 15.9 मीटर की छलांग लगाकर कांस्य पदक हासिल करने में सफल रहे.

क्राइस्टचर्च 1974

Image caption भारत को 15 पदक हासिल हुआ.

न्यूज़ीलैंड के क्राइस्टचर्च शहर में आयोजित इस खेल में भारत को वर्ष 1970 की तुलना में तीन पदक का फ़ायदा तो हुआ लेकिन फिर पदक तालिका में वह छठे स्थान पर ही रह गया. यहाँ भारत को कुल 15 पदक हासिल हुए जिनमें चार स्वर्ण, आठ रजत और तीन काँस्य पदक शामिल हैं.

इस बार पुरुषों की तिहरी कूद में मोहिंदर सिंह गिल ने पिछली बार के मुक़ाबले स्थिति बेहतर करते हुए 16.44 मीटर की छलांग लगाई और रजत पदक प्राप्त किया. वे मात्र 6 सेंटीमीटर से पीछे रह गए और स्वर्ण पदक उनके हाथ से निकल गया.

वहीं पुरुष मुक्केबाज़ी के 51 किलोग्राम वर्ग में चंद्र नारायणन उत्तरी ऑयरलैंड के डेविड बी लारमौर से हार गए और इन्हें रजत पदक मिला, जबकि 60 किलोग्राम वर्ग में मुनिस्वामी वेणू को काँस्य पदक से संतोष करना पड़ा. (हालाँकि न्यूजीलैंड के रॉबर्ट कुले को भी काँस्य पदक दिया गया था.)

भारोत्तोलन के 52 किलोग्राम संयुक्त वर्ग में अनिल मंडल ने 200 किलोग्राम वजन उठाया और उन्हें रजत पदक प्राप्त हुआ जबकि शन्नुग वेल्लीस्वामी ने 56 किलोग्राम संयुक्त वर्ग में 212.5 किलोग्राम वज़न उठाया और उन्हें काँस्य पदक मिला. यहाँ बताते चलें कि इतना ही वज़न कनाडा के इव कैरिगनन ने भी उठाया था लेकिन उन्हें रजत पदक मिला था.

क्राइस्टचर्च में भी कुश्ती ने अपना दबदबा बनाए रखा. यहाँ भारत को कुश्ती के सभी वर्गों में पदक मिला और कुश्ती में ही चारों स्वर्ण पदक भी मिले.

सुदेश कुमार को 52 किलोग्राम वर्ग में, प्रेमनाथ को 57 किलोग्राम वर्ग में, जगरूप सिंह को 68 किलोग्राम वर्ग में और रघुनाथ पवार को 74 किलोग्राम वर्ग में स्वर्ण पदक मिला.

वहीं शिवाजी चिंगले को 62 किलोग्राम वर्ग में, सतपाल को 82 किलोग्राम वर्ग में, नेत्रा पाल को 90 किलोग्राम वर्ग में, दादु चौगुले को 100 किलोग्राम वर्ग में और 100 किलोग्राम से अधिक वर्ग में विश्वनाथ सिंह को रजत पदक हासिल हुआ. जबकि राधेश्याम को 48 किलोग्राम वर्ग में काँस्य पदक मिला.

ब्रिसबेन1982 - एडिनबरा1986

Image caption भारत 16 पदक जीतने में कामयाब रहा.

वर्ष 1982 में ऑस्ट्रेलिया के ब्रिसबेन शहर में आयोजित इस खेल में भारत की झोली में 16 पदक आए. इस आयोजन में मात्र एक पदक का इज़ाफ़ा हुआ, लेकिन एक बार फिर पदक तालिका में भारत छठे स्थान से ऊपर खिसकने में नाकाम रहा. यहाँ भारत को पाँच स्वर्ण, आठ रजत और तीन काँस्य पदक प्राप्त हुए.

बैडमिंटन के पुरुष एकल में सैयद मोदी ने इंग्लैंड के निक येट्स को हराकर स्वर्ण पदक जीता.

वहीं मुक्केबाज़ी में चेनेंद्रा मचिहा को 67 किलोग्राम वर्ग में काँस्य पदक प्राप्त हुआ. इस वर्ग में भारत के साथ-साथ नाइजीरिया को भी काँस्य पदक मिला था.

निशानेबाज़ी में पुरुष सेंटर फ़ायर पिस्टल (टीम) वर्ग में अशोक पंडित और मोहिंदर लाल की टीम 1138 अंक बटोर कर रजत पदक हासिल करने में सफल रही, जबकि पुरुष रैपिड फ़ायर पिस्टल (टीम) वर्ग में आरके बिज और शरद चौहान की संयुक्त जोड़ी ने 1151 अंक अर्जित कर काँस्य पदक जीता.

भारोत्तोलन में गुरुनादन कोमबैया ने 200 किलोग्राम वज़न उठाकर 52 किलोग्राम संयुक्त वर्ग में, विजय कुमार सत्पथी ने 227.5 पाउण्ड वज़न उठाकर 56 किलोग्राम संयुक्त वर्ग में और तमिल सेलवन ने 245 किलोग्राम वज़न उठाकर 60 किलोग्राम संयुक्त वर्ग में रजत पदक हासिल किया.

इस बार भारत को पाँच स्वर्ण पदक मिले जिनमें से चार स्वर्ण पदक कुश्ती ने ही दिलाए. पुरुष कुश्ती के 48 किलोग्राम वर्ग में राम चंदर सारंग को, 52 किलोग्राम वर्ग में महाबीर सिंह को, 68 किलोग्राम वर्ग में जगमिंदर सिंह को और 74 किलोग्राम वर्ग में राजिंदर सिंह को स्वर्ण पदक मिले. 74 किलोग्राम वर्ग में राजिंदर सिंह के लिए ये लगातार दूसरा स्वर्ण पदक था, उन्होंने वर्ष 1978 में भी स्वर्ण पदक हासिल किया था.

वहीं पुरुष कुश्ती के 57 किलोग्राम वर्ग में अशोक कुमार को, 90 किलोग्राम वर्ग में करतार सिंह को, 100 किलोग्राम वर्ग में सतपाल सिंह को और 100 किलोग्राम से अधिक वर्ग में (100+) राजिंदर सिंह को रजत पदक प्राप्त हुआ, जबकि जय प्रकाश कंगर को पुरुष कुश्ती के 82 किलोग्राम वर्ग में काँस्य पदक प्राप्त हुआ.

वर्ष 1986 में स्कॉटलैंड के एडिनबरा शहर में आयोजित इस खेल में भारत ने हिस्सा नहीं लिया.

ऑकलैंड 1990

Image caption भारत 32 पदक जिने में कामयाब रहा.

वर्ष 1990 में न्यूजीलैंड के ऑकलैंड शहर में आयोजित राष्ट्रमंडल खेलों में भारत ने वर्ष 1982 के मुक़ाबले दोगुना पदक हासिल किए यानि इस बार भारत की झोली में कुल 32 पदक आए. लगातार पाँच बार से पदक तालिका में छठे स्थान पर बने रहने के बाद इस बार एक सीढ़ी ऊपर चढ़ते हुए वह पाँचवाँ स्थान प्राप्त करने में सफल रहा.

इस बार भारत को 13 स्वर्ण, आठ रजत और 11 काँस्य पदक प्राप्त हुए.

मुक्केबाज़ी

पुरुष मुक्केबाज़ी के 48 किलोग्राम वर्ग में धर्मेंद्र यादव को काँस्य पदक मिला. इसी वर्ग में कनाडा को भी काँस्य पदक मिला था.

राष्ट्रमंडल खेल-1990 में पहली बार जूडो को शामिल किया गया. भारत को इस स्पर्द्धा में दो पदक हासिल हुए. पहला काँस्य पदक पुरुषों के 60 किलोग्राम वर्ग में नरेंद्र सिंह को और दूसरा काँस्य पदक 80 किलोग्राम वर्ग में राजिंदर धंगर को मिला.

निशानेबाज़ी

इस बार निशानेबाज़ी में एक स्वर्ण, एक रजत और तीन काँस्य पदक मिले. निशानेबाज़ अशोक पंडित पुरुष सेंटर फ़ायर पिस्टल वर्ग में 583 अंक बटोर कर स्वर्ण पदक हासिल करने में सफल रहे वहीं सुरिंदर मारवाह ने इसी वर्ग में 577 अंक हासिल किए और उन्हें रजत पदक मिला.

इसके अलावा सोमा दत्ता ने 50 मीटर पुरुष राइफ़ल वर्ग में 1143 अंक अर्जित कर काँस्य पदक हासिल किया. इसके बाद पुरुष एयर राइफ़ल (टीम) वर्ग में भागीरथ समई और सोमा दत्ता की टीम को काँस्य पदक मिला. इन दोनों ने मिलकर 1148 अंक बनाए.

एक बार फिर निशानेबाज़ अशोक पंडित और सुरिंदर मारवाह पदक पाने सफल रहे. इस बार दोनों की संयुक्त जोड़ी को पुरुष सेंटर फ़ायर पिस्टल (टीम) वर्ग में काँस्य पदक मिला. दोनों ने मिलकर 1142 अंक बनाए.

इस तरह सोमा दत्ता और अशोक पंडित दोनों खिलाड़ियों को दो-दो पदक मिले. भारत की झोली में इस बार कुल 13 स्वर्ण पदक आए जिनमें से 12 स्वर्ण पदक भारोत्तोलन के खिलाड़ियों ने झटके.

भारोत्तोलन

भारोत्तोलक चंदरसेकरन राझावान ने पुरुष के 52 किलोग्राम वर्ग के तीनों श्रेणियों यानि क्लीन ऐंड जर्क, संयुक्त और स्नैच में क्रमशः 127.5 किलोग्राम, 232.5 किलोग्राम और 105 किलोग्राम वज़न उठाकर स्वर्ण पदक पर कब्ज़ा कर लिया.

चंदरसेकरन राझावान ने इस वर्ग के दो श्रेणियों क्लीन ऐंड जर्क और स्नैच में क्रमशः 127.5 किलोग्राम और 105 किलोग्राम वजन उठाकर रिकॉर्ड बनाया था.

वहीं वेलू गोविंद राज को भी पुरुषों के 52 किलोग्राम के तीनों वर्गों में पदक हासिल हुआ. वे 52 किलोग्राम के संयुक्त और स्नैच वर्गों में क्रमशः 212.5 किलोग्राम और 95 किलोग्राम वज़न उठा कर रजत पदक प्राप्त किए जबकि इसी वर्ग के क्लीन ऐंड जर्क श्रेणी में उन्होंने 117.5 किलोग्राम वज़न उठाकर काँस्य पदक जीते. यहाँ ये बताते चलें कि इसी वर्ग में इतना ही वज़न कनाडा के खिलाड़ी ने भी उठाया लेकिन उन्हें रजत पदक मिला था.

भारोत्तोलक रंगास्वामी पुन्नूस्वामी ने भी पुरुषों के 56 किलोग्राम के तीनों वर्गों यानि क्लीन ऐंड जर्क, कोंबाइंड और स्नेच में क्रमशः 137.5 किलोग्राम, 247.5 किलोग्राम और 110 किलोग्राम वज़न उठाकर स्वर्ण पदक हासिल किया. जबकि गोपाल मुरुथाचेलम ने पुरुष के 56 किलोग्राम के क्लीन ऐंड जर्क श्रेणी में 125 किलोग्राम भार उठाकर रजत पदक हासिल किया और संयुक्त श्रेणी में 227.5 किलोग्राम भार उठाकर काँस्य पदक पर कब्ज़ा कर लिया.

60 किलोग्राम के क्लीन ऐंड जर्क और कोंबाइंड दोनों श्रेणियों में प्रवेशचंद्र शर्मा को स्वर्ण और स्नैच श्रेणी में रजत पदक प्राप्त हुआ वहीं इसी वर्ग के तीनों श्रेणियों में कुमारसेन सुदालयमनी को काँस्य पदक मिले.

प्रवेशचंद्र शर्मा ने इसी वर्ग के क्लीन ऐंड जर्क श्रेणी में 145 किलोग्राम वज़न उठाने का रिकॉर्ड भी बनाया.

चंदरसेकरन राझावान और रंगास्वामी पुन्नूस्वामी के बाद परमजीत शर्मा भी तीनों श्रेणियों में स्वर्ण पदक हासिल किया. इन खिलाड़ियों ने पुरुष के 67.5 किलोग्राम वर्ग के क्लीन ऐंड जर्क, कोंबाइंड और स्नेच में क्रमशः 165 किलोग्राम, 295 किलोग्राम और 130 किलोग्राम वज़न उठाकर ये मुकाम हासिल किया.

वे इसी वर्ग के क्लीन ऐंड जर्क और स्नेच श्रेणी में क्रमशः 165 किलोग्राम और 130 किलोग्राम वज़न उठाने का रिकॉर्ड भी बनाया.

कर्णधार मंडल को 75 किलोग्राम वर्ग के क्लीन ऐंड जर्क और स्नेच श्रेणी में रजत पदक मिले जबकि स्नेच श्रेणी में स्वर्ण पदक प्राप्त हुआ. उन्होंने स्नेच श्रेणी में 135 किलोग्राम वज़न उठाने का रिकॉर्ड भी बनाया.

सोरोनामुथु करुपास्वामी ने 182.5 किलोग्राम भार उठाकर 82 किलोग्राम वर्ग के क्लीन ऐंड जर्क श्रेणी में रजत पदक प्राप्त किया.

विक्टोरिया 1994

Image caption राष्ट्रमंडल खेल में जसपाल राणा को पहला स्वर्ण पदक मिला.

वर्ष 1994 में कनाडा के विक्टोरिया शहर में राष्ट्रमंडल खेलों का आयोजन हुआ. इस बार भारत ने वर्ष 1990 की तुलना में आठ पदक कम हासिल किए यानि इस बार भारत की झोली में कुल 24 पदक ही आए. लगातार पाँच बार से पदक तालिका में छठे स्थान पर बने रहने के बाद वर्ष 1990 में एक सीढ़ी ऊपर चढ़ते हुए पाँचवाँ स्थान प्राप्त करने में सफल रहा था लेकिन इस बार दो सीढ़ी लुढ़कते हुए सातवें स्थान पर जा पहुंचा.

इस बार भारत को छह स्वर्ण, 11 रजत और सात काँस्य पदक प्राप्त हुए.

पुरुष मुक्केबाज़ी के 48 किलोग्राम वर्ग में बिरजू साह को काँस्य पदक हासिल हुआ. इसी वर्ग में कनाडा के डोमिनिक फिलाने को भी काँस्य पदक मिला था.

निशानेबाज़ी में पुरुष और महिलाओं ने मिलकर सात पदक झटके. महिलाओं की 50 मीटर राइफ़ल थ्री पोजिशन में रूपा उन्नीकृष्णन 662.5 अंक अर्जित कर रजत पदक प्राप्त करने में कामयाब रहीं. वहीं कुहेली गांगुली और रूपा उन्नीकृष्णन की जोड़ी ने महिला स्मॉलबोर राइफ़ल थ्री पोजिशन (टीम) वर्ग में 1110 अंक अर्जित कर काँस्य पदक हासिल किया.

वर्ष 1974 में जब खेलों के इस आयोजन का नाम ब्रिटिश राष्ट्रमंडल खेल हुआ करता था तब निशानेबाज़ी को इसमें शामिल किया गया. उस वर्ष सिर्फ़ पुरुष निशानेबाज़ ही हिस्सा लेने गए थे. वर्ष 1978 में इस खेल में महिलाओं को भी शामिल कर लिया गया लेकिन उसके बाद लागातार तीन आयोजन तक महिलाओं ने हिस्सा नहीं लिया. वर्ष 1994 में महिलाओं की फिर से भागीदारी हुई और वे पदक जीतने में भी सफल रहीं.

Image caption भारत को 24 पदक हासिल हुआ.

वर्ष 1994 में जसपाल राणा जैसा होनहार निशानेबाज़ उभरकर सामने आया. जसपाल राणा ने पुरुष सेंटर फ़ायर पिस्टल में 581 अंक अर्जित कर स्वर्ण पदक हासिल किया. राष्ट्रमंडल खेल में ये उनका पहला व्यक्तिगत स्वर्ण पदक था. उन्होंने पुरुष एयर पिस्टल स्पर्धा में भी 670.7 अंक अर्जित कर रजत पदक प्राप्त किया.

इसके बाद जसपाल राणा और विवेक सिंह की जोड़ी ने पुरुष एयर पिस्टल (टीम) वर्ग में 1133 अंक अर्जित कर काँस्य पदक हासिल किया.

इतना ही नहीं जसपाल राणा ने टीम में अपना अहम योगदान दिया और उन्होंने अशोक पंडित के साथ पुरुष सेंटर फ़ायर पिस्टल (टीम) वर्ग में 1168 अंक अर्जित कर रिकॉर्ड भी बनाया और स्वर्ण पदक पर कब्ज़ा जमा लिया. भारत के नाम पुरुष सेंटर फ़ायर पिस्टल (टीम) वर्ग में 1168 अंक बनाने का रिकॉड भी दर्ज है.

निशानेबाज़ी में भारत को एक और स्वर्ण पदक मिला जिसे पुरुष क्ले पिज़न ट्रैप में मनशेर सिंह ने 141 अंक बना कर हासिल किया.

भारोत्तोलन

भारोत्तोलक बड़ाथाला आदिशेखर ने पुरुषों के 52 किलोग्राम वर्ग की दो श्रेणियों क्लीन ऐंड जर्क और कंबाइंड में क्रमशः 132.5 किलोग्राम, 237.5 किलोग्राम वज़न उठाकर रिकॉर्ड बनाया और स्वर्ण पदक पर कब्ज़ा कर लिया वहीं 54 किलोग्राम की स्नैच श्रेणी में 105 किलोग्राम उठाकर रजत पदक हासिल किया.

पुरुष के 54 किलोग्राम वर्ग में ही मुर्गेसन वीरास्वामी को क्लीन ऐंड जर्क श्रेणी में काँस्य, कंबाइंड श्रेणी में रजत और स्नैच श्रेणी में स्वर्ण पदक मिला. उन्होंने क्लीन ऐंड जर्क श्रेणी में 127.5 किलोग्राम, कंबाइंड श्रेणी में 232.5 किलोग्राम और स्नैच श्रेणी में 105 किलोग्राम वज़न उठाया.

पुरूष के 54 किलोग्राम वर्ग की स्नैच श्रेणी में मुर्गेसन वीरास्वामी ने 105 किलोग्राम वज़न उठाने का रिकॉर्ड भी बनाया.

वहीं राघवन चंद्रशेखरन ने पुरुष के 59 किलोग्राम वर्ग की तीनों श्रेणियों यानि क्लीन ऐंड जर्क, कंबाइंड और स्नैच में क्रमशः 145 किलोग्राम, 255 किलोग्राम और 110 किलोग्राम वज़न उठाकर रजत पदक पर कब्ज़ा कर लिया.

सतीशा "सतीश" राय ने पुरुषों के 70 किलोग्राम वर्ग की दो श्रेणियों, क्लीन ऐंड जर्क और कंबाइंड में क्रमशः 165 किलोग्राम और 252.5 किलोग्राम वज़न उठाकर रजत पदक प्राप्त किया.

कुश्ती में पुरुष के 57 किलोग्राम वर्ग में अशोक कुमार को और 82 किलोग्राम वर्ग में रणधीर सिंह को रजत पदक मिला तो 52 किलोग्राम वर्ग में कृपा शंकर, 100 किलोग्राम वर्ग में सुभाष वर्मा और 48 किलोग्राम वर्ग में रमेश कुमार को काँस्य पदक मिला.

कुआलालम्पुर 1998

Image caption बैडमिंटन में पुलेला गोपीचंद को काँस्य पदक मिला.

वर्ष 1998 में मलेशिया की राजधानी कुआलालम्पुर में राष्ट्रमंडल खेलों का आयोजन हुआ. इस बार भारत ने वर्ष 1994 की तुलना में एक पदक ज़्यादा हासिल किया यानि इस बार भारत की झोली में कुल 25 पदक आए. इस बार भारत को सात स्वर्ण, 10 रजत और आठ काँस्य पदक प्राप्त हुए.

लगातार पाँच बार से पदक तालिका में छठे स्थान पर बने रहने के बाद वर्ष 1990 में एक सीढ़ी ऊपर चढ़ते हुए पाँचवाँ स्थान प्राप्त करने में सफल रहा था लेकिन वर्ष 1994 में दो सीढ़ी लुढ़कते हुए सातवें स्थान पर जा पहुँचा और इस बार भी सातवें स्थान पर ही बना रहा.

वर्ष 1998 में क्रिकेट को भी शामिल किया गया था.

बैडमिंटन

इस वर्ष बैडमिंटन के पुरुष एकल में पुलेला गोपीचंद ने काँस्य पदक जीता. इसी वर्ग में इंग्लैंड के डैरेन हॉल को भी काँस्य पदक मिला था.

वहीं बैडमिंटन के महिला एकल के फ़ाइनल में अपर्णा लालजी पोपट, वेल्स की कैली मोर्गन से हार गईं और तरह उन्हें रजत पदक से संतोष करना पड़ा.

बैडमिंटन के पुरुषों की टीम इवेंट में भारत को रजत और महिलाओं की टीम इवेंट में काँस्य पदक मिला. इसी वर्ग में ऑस्ट्रेलिया को भी काँस्य पदक प्राप्त हुआ था.

Image caption एशिया में राष्ट्रमंडल खेलों का आयोजन पहली बार हुआ.

महिलाओं की टीम में अपर्णा लालजी पोपट, अर्चना देवधर, दीप्ती चपला, मधुमिता बिष्ट, मंजूषा कंवर, नीलिमा चौधरी और पीवीवी लक्ष्मी शामिल थीं.

वहीं पुरुषों की टीम में अभिन्न श्यामगुप्ता, जार्ज टॉमस, पुलेला गोपीचंद, जसील इस्माइल, मार्कोस पी ब्रिस्टोव, निखिल कानेटकर और विनसेंट लोबो शामिल थे.

मुक्केबाज़ी में पुरुष के 75 किलोग्राम वर्ग में जितेंद्र कुमार को रजत पदक मिला.

निशानेबाज़ी

निशानेबाज़ी में पुरुष एयर पिस्टल वर्ग में जसपाल राणा ने 677.4 अंक अर्जित कर रजत पदक और पुरुष सेंटर फ़ायर पिस्टल वर्ग में 581 अंक अर्जित कर स्वर्ण पदक प्राप्त किया.

वहीं जसपाल राणा और सतेन्द्र कुमार की जोड़ी ने पुरुष एयर पिस्टल (टीम) वर्ग में 1143 अंक अर्जित कर रजत पदक हासिल किया, जबकि जसपाल राणा और अशोक पंडित की संयुक्त जोड़ी ने पुरुष सेंटर फ़ायर पिस्टल (टीम) वर्ग में 1154 अंक अर्जित कर स्वर्ण पदक हासिल करने में कामयाब रहे.

पुरुष ओलंपिक ट्रैप (टीम) वर्ग में मानवजीत सिंह संधू और मनशेर सिंह की जोड़ी ने 192 अंक अर्जित कर रिकॉर्ड बनाए और स्वर्ण पदक प्राप्त किया.

निशानेबाज़ भंवरलाल ढाका ने 669.7 अंक अर्जित कर पुरुष रैपिड फ़ायर पिस्टल वर्ग में काँस्य पदक हासिल किया.

पदक लेने में महिला निशानेबाज़ भी पीछे नहीं रहीं. महिला स्मॉलबोर स्पोर्ट राइफ़ल प्रोन वर्ग में रूपा उन्नीकृष्णन ने भी 590 अंक अर्जित करने का रिकॉर्ड बनाया और स्वर्ण पदक प्राप्त किया.

भारोत्तोलन

भारोत्तोलन में पुरुष के 56 किलोग्राम वर्ग के क्लीन ऐंड जर्क श्रेणी में धर्मराज विल्सन ने 140 किलोग्राम वज़न उठाकर स्वर्ण पदक जीता जबकि अरुमुगम के पांडियन ने 137.5 किलोग्राम वज़न उठाकर रजत पदक हासिल करने में सफल रहा. इस तरह इस वर्ग में दोनों पदक भारत की झोली में आया.

वहीं पुरुषों के 56 किलोग्राम वर्ग के संयुक्त वर्ग में इसका उल्टा हुआ. इस वर्ग में अरुमुगम के पांडियन ने 245 किलोग्राम वज़न उठाकर स्वर्ण पदक पाया तो धर्मराज विल्सन ने 242.5 किलोग्राम वज़न उठाकर रजत पदक हासिल करने में सफलता प्राप्त की.

पुरुषों के 56 किलोग्राम वर्ग की स्नैच श्रेणी में अरुमुगम के पांडियन ने 107.5 किलोग्राम वज़न उठाकर रजत पदक प्राप्त किया.

अरुण मुरुगेसन ने पुरुष के 62 किलोग्राम वर्ग के क्लीन ऐंड जर्क श्रेणी में 155 किलोग्राम और कंबाइंड श्रेणी में 272.5 किलोग्राम वज़न उठाकर काँस्य पदक पर कब्ज़ा जमाया, जबकि इसी वर्ग की स्नैच श्रेणी में जी ज्ञानशेखर ने भी 117.5 किलोग्राम वज़न उठाकर काँस्य पदक हासिल किया.

पुरुष के 69 किलोग्राम वर्ग की क्लीन ऐंड जर्क श्रेणी में गोविंदा वदीवेलू ने 135.5 किलोग्राम वज़न उठाकर और कंबाइंड श्रेणी में सतीशा "सतीश" राय 147.5 किलोग्राम वज़न उठाकर काँस्य पदक हासिल करने में सफल रहे.

भारोत्तोलक सतीशा "सतीश" राय ने पुरुष के 77 किलोग्राम वर्ग के तीनों श्रेणियों में भी पदक हासिल किए. उन्होंने क्लीन ऐंड जर्क श्रेणी में 175 किलोग्राम वज़न और संयुक्त श्रेणी में 322.5 किलोग्राम उठाकर रजत पदक और स्नेच श्रेणी में 147.5 किलोग्राम वज़न उठाकर स्वर्ण पदक पाया.

सतीशा "सतीश" राय ने पुरुष के 77 किलोग्राम वर्ग की स्नैच श्रेणी में 147.5 किलोग्राम वज़न उठाने का रिकॉर्ड भी बनाया.

मैनचैस्टर 2002

Image caption अभिनव बिंद्रा ने स्वर्ण पदक जीताने अहम भूमिका निभाई.

वर्ष 2002 में इंग्लैंड के मैनचेस्टर शहर में राष्ट्रमंडल खेलों का आयोजन हुआ. इस बार भारत ने वर्ष 1998 की तुलना में 44 पदक ज़्यादा हासिल किए यानि भारत की झोली में कुल 69 पदक आए. भारत को 30 स्वर्ण, 22 रजत और 17 काँस्य पदक प्राप्त हुए.

लगातार पाँच बार से पदक तालिका में छठे स्थान पर बने रहने के बाद भारत वर्ष 1990 में एक सीढ़ी ऊपर चढ़ते हुए पाँचवाँ स्थान प्राप्त करने में सफल रहा था लेकिन वर्ष 1994 में दो सीढ़ी लुढ़कते हुए सातवें स्थान पर जा पहुँचा और वर्ष 1998 में भी सातवें स्थान पर ही बना रहा, लेकिन इस बार चौथा स्थान पर प्राप्त करने में सफल रहा.

वर्ष 2002 के राष्ट्रमंडल खेल में महिला डिस्कस थ्रो को पहली बार शामिल किया गया.

स्वर्ण पदक विजेता

मुक्केबाज़ी में मोहम्मद अली क़मर को पुरुष के 48 किलोग्राम वर्ग में स्वर्ण पदक मिला. वहीं महिला हॉकी टीम को भी स्वर्ण पदक मिला.

निशानेबाज़ी में स्वर्ण

पुरुष के 25 मीटर स्टैंडर्ड पिस्टल वर्ग में और पुरुष के सेंटर फ़ायर पिस्टल वर्ग में जसपाल राणा को पुरुष के 50 मीटर राइफ़ल थ्री पोज़िशन वर्ग में चरण सिंह को और पुरुष के डबल ट्रैप वर्ग में राज्यवर्द्धन सिंह राठौर को स्वर्ण पदक मिला.

वहीं पुरुष के ही 25 मीटर स्टैंडर्ड पिस्टल (टीम) वर्ग में जसपाल राणा और समरेश जंग को, पुरुष के 50 मीटर/फ्री पिस्टल(टीम) वर्ग में समरेश जंग और विवेक सिंह को, पुरुष एयर राइफ़ल (टीम) वर्ग में अभिनव बिंद्रा और समीर अंबेकर को, पुरुष के सेंटर फ़ायर पिस्टल वर्ग (टीम) में जसपाल राणा और महावीर सिंह को, पुरुष के डबल ट्रैप (टीम) वर्ग में राज्यवर्द्धन सिंह और अली ख़ान मुराद को और पुरुष के रैपिड फ़ायर पिस्टल वर्ग में भँवर लाल ढाका और मुकेश कुमार की जोड़ी को स्वर्ण पदक मिला.

अंजलि मंदर भागवत ने महिलाओं के 50 मीटर राइफ़ल थ्री पोजिशन वर्ग में और महिला एयर राइफ़ल वर्ग में स्वर्ण पदक हासिल की.

वहीं महिला एयर राइफ़ल (टीम) वर्ग में अंजलि मंदर भागवत और सुमा शिरूर की जोड़ी को और महिला 50 मीटर राइफ़ल थ्री पोजिशन (टीम) वर्ग में अंजलि मंदर भागवत और राजकुमारी की जोड़ी को स्वर्ण पदक प्राप्त हुआ.

भारोत्तोलन में स्वर्ण

भारोत्तोलन में स्वर्ण पदक हासिल करने में महिलाओं का दबदबा रहा. महिला भारोत्तोलकों ने कुल 11 स्वर्ण पदक हासिल किए.

महिला भारोत्तोलन में 48 किलोग्राम वर्ग में कुंजारानी देवी और 53 किलोग्राम वर्ग में सनामाचा चानु ने स्वर्ण पदक हासिल किया. दोनों खिलाड़ियों ने क्लीन ऐंड जर्क, कंबाइंड और स्नैच तीनों श्रेणियों में ये पदक हासिल किए.

प्रतिमा कुमारी ने महिलाओं के 63 किलोग्राम वर्ग के क्लीन ऐंड जर्क और कंबाइंड श्रेणी में स्वर्ण पदक हासिल करने सफल रहीं.

वहीं शैलजा पुजारी ने महिलाओं के 75 किलोग्राम वर्ग की तीनों श्रेणियों में स्वर्ण पदक हासिल किया और उनके नाम रिकॉर्ड भी रहा.

कुश्ती

पुरुष कुश्ती में पलविंदर सिंह चीमा 120 किलोग्राम वर्ग में, कृष्णन कुमार 55 किलोग्राम वर्ग में और रमेश कुमार 66 किलोग्राम वर्ग में स्वर्ण पदक हासिल करने सफल रहे.

मेलबर्न 2006

Image caption समरेश जंग के नाम कई रिकॉर्ड दर्ज

वर्ष 2006 में ऑस्ट्रलिया के मेलबर्न शहर में राष्ट्रमंडल खेलों का आयोजन हुआ. इस बार भारत को वर्ष 2002 की तुलना में 20 पदक कम मिले. भारत को कुल 49 पदक मिले जिनमें 22 स्वर्ण, 17 रजत और 10 काँस्य पदक शामिल है.

लगातार पाँच बार से पदक तालिका में छठे स्थान पर बने रहने के बाद वर्ष 1990 में एक सीढ़ी ऊपर चढ़ते हुए पाँचवां स्थान प्राप्त करने में सफल रहा था लेकिन वर्ष 1994 में दो सीढ़ी लुढ़कते हुए सातवें स्थान पर जा पहुँचा और वर्ष 1998 में भी सातवें स्थान पर ही बना रहा, लेकिन वर्ष 2002 में चौथा स्थान पर प्राप्त करने में सफल रहा था और इस बार भी चौथे स्थान पर बना रहा.

निशानेबाज़ी में स्वर्ण पदक पाने वाले खिलाड़ियों के नाम और वर्ग

पुरुषों की 50 मीटर/फ़ायर पिस्टल – समरेश जंग

पुरुषों की एयर पिस्टल – समरेश जंग

पुरुषों की एयर राइफ़ल – गगन नारंग

पुरुषों की 50 मीटर राइफ़ल थ्री पोज़ीशन – गगन नारंग

पुरुषों की रैपिड फ़ायर पिस्टल – विजय कुमार

पुरुषों का डबल ट्रैप – राज्यवर्द्धन सिंह राठौर

महिलाओं की 50 मीटर राइफ़ल थ्री पोजिशन – अनुजा जंग

महिलाओं की एयर राइफ़ल – तेजस्विनी सावंत

महिलाओं की एयर राइफ़ल (टीम) – तेजस्विनी सावंत और अवनीत कौर सिद्धू

महिलाओं की (स्पोर्ट) 25 मीटर पिस्टल (टीम) – सरोजा कुमारी झुटु और सुषमा राणा

पुरुषों की एयर पिस्टल (टीम) – समरेश जंग और विवेक सिंह

पुरुषों की 25 मीटर एयर पिस्टल (टीम) – रौनक पंडित और समरेश जंग

पुरुषों की 50 मीटर राइफ़ल थ्री पोजिशन (टीम) – अभिनव बिंद्रा और गगन नारंग

पुरुषों की एयर राइफ़ल (टीम) – अभिनव बिंद्रा और गगन नारंग

पुरुषों की सेंटर फ़ायर पिस्टल (टीम) – जसपाल राणा और समरेश जंग

मुक्केबाज़ी में अखिल कुमार को पुरुषों के 54 किलोग्राम वर्ग में स्वर्ण पदक मिला. टेबल टेनिस में पुरुषों के टीम इवेंट में भारत ने सिंगापुर को हरा कर स्वर्ण पदक जीता. वहीं अचंता शरद कमल पुरुषों के एकल में स्वर्ण पदक पाने में कामयाब रहे.

भारोत्तोलन

भारोत्तोलन में तीन पदक मिले जिसमें कुंजारानी देवी ने महिलाओं के 48 किलोग्राम संयुक्त वर्ग में, युम्नाम चानू ने महिलाओं के 58 किलोग्राम संयुक्त वर्ग में और गीता रानी ने महिलाओं के 75 किलोग्राम संयुक्त वर्ग में स्वर्ण पदक हासिल किए.