'दिल्ली आई' तैयार है जनाब

लंदन की टेम्स नदी पर बने विशाल झूले 'लंदन आई' को कौन नहीं जानता. अब दिल्ली में भी यमुना किनारे एक ऐसा ही विशाल झूला बनाया है जिसका नाम रखा गया है 'दिल्ली राइडस'.

दिल्ली के कांलिदी कुंज पार्क में बने मनोरंजन पार्क में इस विशाल झूले को स्थापित किया गया है.

एक सौ अड़तालीस फीट ऊँचे इस झूले से आप एक नज़र घुमाने भर से दिल्ली और नोएडा की गगनचुंबी इमारतों को देख सकते हैं.

इस विशाल झूले को जर्मनी की एक कंपनी के सहयोग से बनाया गया है और दिल्ली में लाकर इसे जोड़ कर खड़ा कर दिया गया है.

इस झूले में इस्तेमाल किए गए केबिन स्विज़रलैंड में बने हैं.

इस विशाल झूले में 36 वातानुकूलित केबिन हैं और हरेक में आठ लोग बैठ सकते हैं.

इसके अलावा एक वीआईपी केबिन भी है जिसमें बेहतरीन सीटों के साथ-साथ टीवी और टेलिफ़ोन की सुविधा भी उपलब्ध करवाई गई है.

इस केबिन का तल भी शीशे का बना है ताकि आप ठीक से नीचे देख सकें. ये झूला कंप्यूटर से संचालित किया जाता है.

इस झूले को चलाने के लिए विशेष प्रशिक्षण की ज़रुरत होती है. झूला बनाने वाली कंपनी के दो लोग आजकल दिल्ली में इसे संचालित करने वाले लोगों को प्रशिक्षण दे रहे है.

इसे बनाने वाली कंपनी जर्मन कंपनी बॉसिंक इंडस्ट्रियल सर्विसिज़ के पैट्रिक बैक कहते है, " हमने इस तरह के झूलों को नायग्रा फॉल्स, ऑस्ट्रेलिया के ब्रिस्बेन और दक्षिण अफ्रीका के केपटाउन में लगाया हैं. भारत में ये हमारा पहला झूला है."

इस झूले को लगाने वाली कंपनी दिल्ली राइडस के मालिक ताहिर राणा के बेटे इक़बाल लंदन में पढे़ हैं. उनके बेटे ने ही उन्हे इस तरह के झूले को भारत लाने का सुझाव दिया था.

ताहिर राणा कहते हैं, " हमने इस झूले पर सैर करने की फीस 250 रुपए रखी है, ताकि हर तबके के लोग इस झूले का मज़ा ले सकें. जो लंदन नहीं जा सकते वो दिल्ली में इस राइड का आंनद ज़रुर ले सकते हैं."

माना जा रहा है कि राष्ट्रमंडल खेलों से पहले दिल्ली के मानचित्र पर एक और पर्यटक स्थल जुड़ गया है. आप 27 सितंबर से इसका आनंद ले सकते हैं.

दिलचस्प बात ये है कि जिस टेम्स नदी के किनारे 'लदंन आई' है वो साफ़ सुथरी है पर जिस यमुना नदी के किनारे ये दिल्ली राइडस या कहें 'दिल्ली आई' लगाई गई है वो अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रही है.

ऐसे में दिल्ली राइडस का नज़ारा खूबसूरत होगा कहना मुश्किल है.

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