सपने जैसा है स्वर्ण पदक

सुशील कुमार
Image caption सुशील ने मॉस्को में ही रूसी पहलवान को हराकर विश्व चैंपियनशिप जीती

पहलवान सुशील कुमार ने जब बीजिंग ओलंपिक में काँस्य पदक जीता था उसी समय से ये कहा जाने लगा था कि सुशील कुमार के रूप में भारत को एक बेहतरीन पहलवान मिल गया है.

ऐसा कहा जाना सच साबित हुआ जब सुशील ने रूस की राजधानी मॉस्को में आयोजित विश्व कुश्ती चैंपियनशिप में रूस के पहलवान गोगाएव एलेन को 3-1 से मात देकर विश्व कुश्ती चैंपियनशिप का ख़िताब अपने नाम कर लिया.

सुशील कुमार की स्वेदश वापसी पर लोगों ने एयरपोर्ट से बाहर निकलते ही उनके स्वागत में आतिशबाज़ी की और ढोल-नगाड़े बजाकर 'भारत माता की जय' जैसे नारे लगाए. रात को क़रीब दो बज रहे थे लेकिन उनके प्रशंसक उनके स्वागत में कोई कमी नहीं छोड़ना चाहते थे.

इसी मौक़े पर सुशील कुमार ने मीडिया से बात करते हुए कहा, "सभी पहलवानों का सपना होता है कि वह विश्व चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतें, मुझे इस बात की बहुत ज़्यादा खुशी है कि इस चैंपियनशिप में मैंने देश के लिए और अपने लिए स्वर्ण पदक जीता है."

कड़ा मुक़ाबला

विश्व चैंपियशिप का ये मुक़ाबला कितना कठिन था इस सवाल के जवाब में उन्होंने कहा, "इस मुक़ाबले में वर्ष 2009 के विश्व चैपियन और ओलंपिक में रजत और काँस्य पदक विजेता सभी हारे हैं तो इस लिहाज़ से ये मुक़ाबला काफ़ी कठिन था."

अपनी इस उपलब्धि के आधार पर सुशील कुमार ने कहा कि राष्ट्रमंडल खेलों में भी वह पदक ज़रूर हासिल करेंगे.

इस भीड़-भाड़ और मीडिया की चका-चौंध कर देने वाली रोशनी में भी सुशील कुमार अपने गुरू को नहीं भूले. उन्होंने अपनी इस उपलब्धि का श्रेय अपने गुरू को देते हुए कहा, "जब मैं बिल्कुल छोटा सा था तब मैं अपने गुरु के पास आया था, आज मैं जो कुछ हूँ उन्हीं के आशीर्वाद से हूँ."

प्रतिक्रिया

उनके कोच सतपाल ने कहा, "मैं बहुत ख़ुश हूँ कि मेरी 15 साल की मेहनत सफल हो गई. सुशील ने आज भारतीय कुश्ती जगत में इतिहास रच दिया. मैं सुशील के माँ-बाप को बधाई देता हूँ कि उन्होंने ऐसा बच्चा मुझे दिया जो विश्व चैंपियन बना."

सतपाल का कहना था कि सुशील के ज़रिए पहले बीजिंग में आँधी आई थी और अब वो तूफ़ान बन गया है. रूसी पहलवान को उसके घर में ही जाकर हराकर स्वर्ण पदक छीन लाना बहुत बड़ी बात है.

सुशील की इस उपलब्धि पर एक महिला ने कहा, "ये जान कर हमें बहुत ख़ुशी हो रही है, उसने देश का नाम रोशन कर दिया. हर माँ ऐसा ही बेटा पैदा करे."

जिस होटल में सुशील कुमार के ठहरने का इंतजाम था उस होटल में काम करने वाले एक कर्मचारी का कहना था, "ऐसे इंसान को सलाम करता हूँ, जिन्होंने इतिहास रच दिया."

सुशील कुमार की इस उपलब्धि पर लोग उन्हें बधाई देते थक नहीं रहे हैं और अगर कहीं पर भी उनका ज़िक्र हो जाए तो लोग जोश से भर जाते हैं.

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