स्कॉटलैंड का 'भारतीय' सितारा

विशाल मारवाह
Image caption विशाल मारवाह मिडफ़ील्ड से खेलते हैं

दिल्ली में होने वाले राष्ट्रमंडल खेलों के दौरान एक ऐसा खिलाड़ी भारत की धरती पर क़दम रखेगा, जिसकी जड़ें तो भारत से जुड़ी हुई हैं, लेकिन खेल के मैदान पर वो भारत को कड़ी टक्कर देने के उद्देश्य से उतरेगा.

स्कॉटलैंड की हॉकी टीम से जुड़े विशाल मारवाह की ख़्वाहिश दिल्ली राष्ट्रमंडल खेलों में कुछ ऐसा ही करने की है. विशाल स्कॉटिश टीम के एकमात्र भारतीय मूल के खिलाड़ी हैं.

और खिलाड़ी भी ऐरे-गैरे नहीं....ऐसा खिलाड़ी, जिसने स्कॉटलैंड की ओर से सबसे ज़्यादा अंतरराष्ट्रीय हॉकी मैच खेले हैं. चलिए स्कॉटलैंड टीम से उनसे जुड़ने की कहानी विशाल से ही सुनते हैं.

विशाल बताते हैं, "मैं 14 साल से स्कॉटलैंड से खेल रहा हूँ. पहला अंतरराष्ट्रीय मैच मैंने फ़्रांस के ख़िलाफ़ एडिनबरा में खेला था."

प्रेरणा

विशाल को हॉकी खेलने की प्रेरणा अपने पिता से मिली, जो कभी यूगांडा की टीम से हॉकी खेलते थे. हालात बदले और विशाल के पिता यूगांडा से भारत होते हुए स्कॉटलैंड आ गए.

Image caption विशाल की मम्मी अभी से ही दिल्ली में जमी हुई हैं

लेकिन हॉकी के प्रति उनका प्यार कम नहीं हुआ. कुछ समय के लिए उन्होंने स्कॉटलैंड में हॉकी तो खेली लेकिन फिर काम में फँसते चले गए. विशाल में उन्होंने वो जज़्बा देखा, जिसकी वजह से उन्होंने विशाल को हॉकी खेलने की प्रेरणा दी.

उनके पिता एसके मारवाह कहते हैं, "मैंने शुरू से ही उसका उत्साह बढ़ाया है. मैंने विशाल को सात साल से ही हॉकी खेलने के लिए क्लब में भेज दिया था. उसको मैंने शुरू से ही समर्थन दिया और हरसंभव मदद दी. क्योंकि इस देश में खेलना आसान नहीं."

विशाल मारवाह की माँ अनिता इन दिनों दिल्ली में जमी हुई हैं और राष्ट्रमंडल खेलों में अपने बेटे को खेलते देखना चाहती हैं. उनका पूरा परिवार यहाँ विशाल के समर्थन के लिए मौजूद रहेगा. अनिता मारवाह से हमने जब संपर्क किया तो एक माँ का प्यार दिल खोल कर बोला और ख़ूब बोला....

उन्होंने कहा, "एक माँ के रूप में मुझे विशाल पर काफ़ी गर्व है. विशाल ने स्कॉटलैंड की ओर से सबसे ज़्यादा मैच खेले हैं. उसे काफ़ी सराहना मिली है. विशाल स्कॉटलैंड का एकमात्र एशियाई खिलाड़ी है, जिसने इतने मैच खेले हैं. मुझे उस पर काफ़ी गर्व है"

लेकिन इस प्रेरणादायक कहानी के पीछे विशाल की अपनी मेहनत भी है, जिससे वे इस मुकाम तक पहुँचे हैं. लेकिन विशाल ही क्यों स्कॉटलैंड की हॉकी टीम का हर सदस्य जी-तोड़ मेहनत करते हैं.

दिन में काम और रात में ट्रेनिंग. वेतन नहीं, भत्ते नहीं....सिर्फ़ दौरे के समय आने-जाने और रहने-खाने का ख़र्च. विशाल की ज़ुबानी ही सुनिए कैसी उनकी टीम राष्ट्रमंडल खेलों की तैयारी कर रही है.

तैयारी

विशाल कहते हैं, "हम राष्ट्रमंडल खेलों की जम कर तैयारी कर रहे हैं. पिछले तीन महीनों से हम कड़ी मेहनत कर रहे हैं. हमने कई टूर्नामेंट खेले हैं. खिलाड़ियों में ज़्यादातर छात्र हैं या काम करने वाले हैं. इसलिए हम दिन में काम करते हैं और रात में ट्रेनिंग."

Image caption विशाल के पिता का उनके करियर में अहम योगदान है

लेकिन काम के साथ हॉकी का तालमेल बिठाना इतना आसान नहीं होता...लेकिन फिर भी विशाल अपना काम देखते हुए अपने प्यार हॉकी को भरपूर समय देते हैं...लेकिन क्यों....

विशाल कहते हैं, "बलिदान देना पड़ता है. हम बलिदान इसलिए दे रहे हैं क्योंकि हम हॉकी खेलना चाहते हैं. हमें टूर्नामेंट में जाना है और अच्छा खेलना है."

हॉकी से प्यार के कारण विशाल दिन में ऑप्टिशियन का काम करते हैं और रात में हॉकी की ट्रेनिंग. बातचीत में उत्साह इतना और सोच इतनी सकारात्मक की, तमाम विवादों के बावजूद वे दिल्ली राष्ट्रमंडल खेलों की सफलता की उम्मीद कर रहे हैं.

वे कहते हैं, "मेरा ध्यान अभी अपने खेल पर है. मैं नहीं जानता कि वे क्या कह रहे हैं. लेकिन मुझे उम्मीद है कि दिल्ली राष्ट्रमंडल खेल सफल होंगे."

राष्ट्रमंडल खेलों की तैयारी में विशाल ही नहीं विशाल का पूरा परिवार जुटा हुआ है. विशाल के पिता एसके मारवाह भी दिल्ली पहुँचकर अपने बेटे को मैदान पर जलवा दिखाते देखना चाहते हैं.

विशाल के पिता बताते हैं, "हमारे सभी परिवार के लोग वहाँ पहुँच रहे हैं. हम वहाँ आकर रहेंगे. हमने सोचा है कि स्टेडियम के पास कोई अपार्टमेंट में रहकर विशाल के सभी मैच देखेंगे."

तो माँ-पापा की आँखों का तारा भारतीय मूल के विशाल स्कॉटलैंड की टीम की ओर से राष्ट्रमंडल खेलों में धमाल मचाने की तैयारी में हैं और उनका उत्साह बढ़ाने के लिए उनका पूरा कुनबा मौजूद रहेगा.

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