राष्ट्रमंडल के बहाने कायाकल्प

हुमायूँ का मक़बरा
Image caption राष्ट्रमंडल के बहाने ही सही ऐतिहासिक धरोहर का जीर्णोद्धार हो रहा है.

आगामी राष्ट्रमंडल खेलों के मद्देनज़र एक तरफ दिल्ली का आधुनिकीकरण और नवीनीकरण जारी है तो वहीं दूसरी तरफ खेलों के बहाने ही सही दिल्ली की ऐतिहासिक धरोहर को भी एक साफ़-सुथरी झलक देने की कोशिश की जा रही है ताकि विदेशी पर्यटकों को सभी धरोहर मनमोहक लगे.

इस बाबत पिछले कुछ सालों से दिल्ली की ऐतिहासिक धरोहर की रंगाई, पुताई और मरम्मत का काम तेज़ी से चल रहा है.

दिल्ली में इन दिनों सैंकड़ों फ़्लाई ओवरों का निर्माण, मेट्रो सुविधाओं का विस्तार, पार्कों का नवीनीकरण और सड़कों को चौड़ा और बेहतर बनाने की प्रक्रिया जारी है. देर से और थोड़ी धीमी गति से ही सही लेकिन प्राचीन इमारतों, मक़बरों, पुलों और किलों की शक्ल भी सुधारी जा रही है.

तीन अक्तूबर से 14 अक्तूबर के बीच जब दिल्ली में राष्ट्रमंडल खेलों का आयोजन चल रहा होगा, उसी दौरान शहर में हज़ारों विदेशी पर्यटकों के भी उपस्थित रहने की उम्मीद है.

भारतीय पुरातत्व विभाग, पर्यटन मंत्रालय और दिल्ली सरकार ने इसी के तहत इन सभी प्राचीन और मध्यकालीन इमारतों की दशा सुधारने की मुहिम छेड़ रखी है.

इस नवीनीकरण के विषय पर भारतीय पुरातत्व विभाग की दिल्ली इकाई प्रमुख केके मोहम्मद बताते हैं, "पहले कभी हम लोगों को इतना बड़ा मौक़ा नहीं मिला था. हम लोग विरासत के बारे में तो बात करते रहे लेकिन जितनी प्राथमिकता इसे मिलनी चाहिए थी वो मिली नहीं. राष्ट्रमंडल खेलों की वजह से एक मौक़ा मिला है और हम लोग इसका भरपूर इस्तेमाल करना चाहते हैं. हम ऐतिहासिक इमारतों को वैसा ही पेश करेंगे जैसी वो पहले थीं."

इन दिनों आलम यही है कि अगर कोई दिल्ली की ज़्यादातर प्राचीन या मध्यकालीन इमारतों में जाए तो उन्हें इनके प्रांगण में बल्लियों और बालू के ढेर, काम कर रहे मज़दूरों और हाथों में नक़्शे लिए पुरातत्व विभाग के कर्मचारी ही दिखेंगे. हालांकि दिल्ली की ऐतिहासिक धरोहर का रंग-रोगन पहले भी कई दफ़ा हो चुका है पर इस बार के प्रयासों को देख कर गंभीरता का अहसास होता है.

नवीनीकरण करने की जरूरत

Image caption हुमायूँ के मक़बरा मे काम करते मज़दूर.

भारतीय पुरातत्व विभाग और संबंधित मंत्रालय ने ऐतिहासिक स्मारकों की मरम्मत और पुनर्निर्माण करने की ज़िम्मेदारी इनटैक नामक संस्था को दी है.

इनटैक के दिल्ली प्रभारी प्रोफ़ेसर एजीके मेनन बताते हैं, "दो-तीन तरह से काम चल रहा है. पहले तो एएसआई स्मारकों को तैयार करने का है, जिसके तहत लोधी गार्डेन समेत पाँच और स्मारकों में काम जारी है. दूसरा, राज्य स्मारकों को दुरुस्त करने के लिए हमारा करार दिल्ली प्रदेश सरकार से हुआ है. कुल मिलाकर इनटैक 19 स्मारकों पर काम कर रही है."

पर्यटन मंत्रालय और भारतीय पुरातत्व विभाग ने क़रीब दो साल पहले ही दिल्ली की चारदीवारी में आने वाले प्राचीन और मध्यकालीन स्मारकों की सूची तैयार कर ली थी जिनको नवीनीकरण करने की ज़रूरत थी.

इन स्मारकों में लाल क़िला, हुमायूँ का मक़बरा, तुर्कमान गेट, गोल गुंबद और फटा गुंबद जैसी मध्यकालीन इमारतें भी शामिल थीं. नवीनीकरण करा रहे अधिकारियों को इस बात का भी अहसास है कि सरकार और संबंधित विभाग इस तरह की पहल में थोड़ी देर से जगे हैं.

इनटैक के प्रोफ़ेसर मेनन कहते हैं, "अब इस बात में तो कोई शक नहीं कि इस काम में देरी बरती गयी है. जिस काम को कब का हो जाना चाहिए था वो अब किया जा रहा है. पर चलिए देर आए लेकिन दुरुस्त आए, लेकिन आए तो सही."

राष्ट्रमंडल खेलों की मेज़बानी तो भारत को वर्ष 2003 में ही मिली थी लेकिन प्राचीन और मध्यकालीन इमारतों के नवीनीकरण और मरम्मत की ज़रूरत तो काफ़ी पहले से ही महसूस किया जा रहा था.

कहना ग़लत नहीं होगा कि राष्ट्रमंडल खेलों के लिए होने वाले नवीनीकरण के झटके में दिल्ली के बहुमूल्य इतिहास को भी नया जीवन मिल रहा है.

कम से कम दिल्ली की प्राचीन और मध्यकालीन इमारतों का हाल राष्ट्रमंडल खेलों के लिए की जा रही तैयारियों के मुक़ाबले ज़्यादा बेहतर और भरोसेमंद दिखाई पड़ रहा है.

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