क्रिकेट में सर्बिया के नन्हे क़दम

बेलग्रेड में अभ्यास
Image caption सर्बियाई टीम के पास अपना अलग मैदान नहीं, बेलग्रेड क़िले के नीचे पार्क में होता है अभ्यास

दुनिया में देशों की संख्या कितनी है? – कोई दो सौ के आस-पास.

और क्रिकेट कितने देश खेलते हैं? – भारत, पाकिस्तान, ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड, न्यूज़ीलैंड, वेस्ट इंडीज़, श्रीलंका, बांग्लादेश, ज़िम्बाब्वे, दक्षिण अफ़्रीका.

यानी केवल दस देश ऐसे हैं जो नियमित रूप से क्रिकेट खेलते हैं. केन्या, हॉलैंड जैसे छह सात और देशों का नाम बीच-बीच में सुनाई देता रहता है.

लेकिन क्रिकेट खेलने की इच्छा रखते हों, ऐसे देशों की संख्या बहुत अधिक है, नब्बे से ज़्यादा.

ऐसा ही एक नया नवेला देश है – सर्बिया - जो क्रिकेट को अपनाना चाहता है.

सर्बिया में क्रिकेटः वीडियो

शुरूआत

दक्षिण पूर्वी यूरोप में स्थित, पुराने यूगोस्लाविया से निकलकर पाँच साल पहले स्वतंत्र देश के रूप में अस्तित्व में आए देश सर्बिया में पिछले कुछ समय से क्रिकेट को स्थापित करने की कोशिश चल रही है.

लेकिन कुछ ठोस हुआ तीन साल पहले जब बेलग्रेड में दो क्रिकेट क्लबों का गठन हुआ. बाद में एक और क्लब बना और फिर तीनों को मिलाकर बना सर्बिया क्रिकेट फ़ेडरेशन.

मगर सर्बिया में क्रिकेट पहुँचा कैसे? शुरूआत कैसे हुई?

सर्बियाई टीम के संस्थापक सदस्य व्लादीमिर निन्कोविच कहते हैं,"हम पहले रग्बी खेला करते थे, और हम समझने लगे कि अब रग्बी में हमारा भविष्य नहीं है, क्योंकि हमारी उम्र हो रही है, तो हमने कोई नया खेल खेलने का सोचा, तब हमारे रग्बी कोच ने, जो क्रिकेट खेल चुके थे, हमसे कहा कि हमें क्रिकेट में हाथ आज़माना चाहिए."

कठिनाई

Image caption सर्बियाई टीम के खिलाड़ी हैरिस डाइच, अंबरीश सारंग और व्लादीमिर निन्कोविच

लेकिन एक अनजान खेल को पहचान दिलवाना आसान काम नहीं था. पहली चुनौती तो यही बूझना और बताना था कि क्रिकेट है क्या.

सर्बिया क्रिकेट फ़ेडरेशन की वेबसाइट अपने फ़ेडरेशन का परिचय देने के साथ-साथ क्रिकेट का भी परिचय देती है.

सर्बियाई टीम के एक और संस्थापक हैरिस डाइच कहते हैं,"ये बहुत मुश्किल था, ख़ास तौर से सर्बियाई भाषा के कारण, अब आप विकेट, बेल्स, ड्राईव, इन सब शब्दों को कैसे अनुवाद करेंगे, उनके लिए सर्बियाई शब्द हैं ही नहीं, तो शुरू में तो बस ये अजीब सा मज़ाकिया काम था हमारा – उन शब्दों को सर्बियाई शब्दों में बदलने का."

मदद

सर्बियाई टीम को वैसे भारत से आए ऐसे कुछ लोगों से मदद मिली जिनके लिए क्रिकेट ककहरे से सीखने वाला खेल नहीं बल्कि जीवन का एक हिस्सा था.

व्यक्तिगत कारणों से बेलग्रेड में रह रहे मुंबई के अंबरीश सारंग ने सर्बियाई टीम के लिए खेल के सामानों आदि की व्यवस्था करवाने में काफ़ी मदद की.

भारत में क्रिकेट के स्तर से सर्बिया के क्रिकेट के स्तर की बात पूछे जाने पर अंबरीश कहते हैं,"यहाँ सर्बियन क्रिकेट केवल तीन साल पुराना है और इंडिया में तो ये बहुत सालों से खेला जाता है, लेकिन सर्बियन लोग क्रिकेट खेलना चाहते हैं, वो टेनिस, वॉलीबॉल, हैंडबॉल, बास्केटबॉल काफ़ी अच्छा खेल सकते हैं."

प्रगति और उम्मीदें

Image caption सर्बियाई टीम ने वर्ष 2009 में पहली बार अंतरराष्ट्रीय क्लबस्तरीय मैच खेला

सर्बियाई टीम के लिए 2009 का साल ख़ास था जब पहली बार उन्होंने ब्रिटेन के एक क्रिकेट क्लब के साथ औपचारिक मैच खेला.

इस साल बात आगे बढ़ी और सर्बिया ने जुलाई में पहली बार मैसीडोनिया में हुई यूरोपीय- ट्वेंटी-ट्वेंटी प्रतियोगिता में हिस्सा लिया.

आठ टीमें थीं, सर्बिया सातवें नंबर पर रही, मेज़बान मैसीडोनिया आठवें नंबर पर.

सर्बियाई लड़कियाँ भी पिछले दिनों पहली बार एक अंतरराष्ट्रीय ट्वेंटी-ट्वेंटी प्रतियोगिता में खेलीं.

अपनी अभी तक की प्रगति से उत्साहित व्लादीमिर निन्कोविच कहते हैं,"जब हमने शुरू किया था, तो हमारे पास केवल बेसबॉल बैट था, एक टेनिस बॉल था, हम कूड़ेदान को विकेट बनाकर खेलते थे, लेकिन फिर हमने सामान जुटाए, प्रतियोगिता करवाई, महिलाओं और बच्चों में क्रिकेट का प्रसार कर रहे हैं."

अंबरीश सारंग कहते हैं,"रियलैस्टिकली बोला जाए तो हम ये तो नहीं कहते कि हम वर्ल्ड कप में या T-20 में 4th या 5th रैंक पर आ जाएँगे, पर हम ये ज़रूर कह सकते हैं कि ईस्टर्न यूरोप में हमारी टीम काफ़ी अच्छी हो जाएगी."

चुनौती

ऐसे सर्बिया के लिए अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पैर जमाने का सपना आसान नहीं क्योंकि ऐसा सपना देखनेवाले देशों की संख्या अच्छी-ख़ासी है.

आज क्रिकेट खेलनेवाले 10 मुख्य देशों के अलावा कोई 90 देशों की टीमें क़तार में हैं जो पूरी दुनिया में छह डिवीज़नों में खेलती हैं और फिर उनमें से सबसे योग्य टीमें आगे बढ़ती जाती हैं.

इन्हीं डिवीज़न मैचों के बलबूते अफ़ग़ानिस्तान की टीम अगले साल भारत और श्रीलंका में होनेवाले विश्व कप में खेलने के काफ़ी नज़दीक पहुँच गई थी.

हालाँकि क्वालिफ़ाइंग दौर में वे नाकाम रहे, लेकिन इस साल वेस्टइंडीज़ में हुए ट्वेंटी-ट्वेंटी विश्व कप में अफ़ग़ानिस्तान को खेलने का मौक़ा मिला.

सर्बिया जैसी एक नई टीम का संघर्ष कितना बड़ा है इसका अंदाज़ा इस बात से मिल सकता है कि फ़िलहाल अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद ने जिन 90 देशों को एसोसिएट और ऐफ़िलिएट देशों के तौर पर मान्यता दी हुई है – सर्बिया उनमें नहीं आता.

तो सर्बिया की पहली लड़ाई इन 90 देशों के समूह में शामिल हो पाने की है.

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