कॉमनवेल्थ गेम पर चिंतित ब्रिटिश प्रेस

Image caption पहले पन्ने पर छपी है टूटे हुए पुल की तस्वीर

लंदन से छपने वाले ब्रिटेन के ज़्यादातर राष्ट्रीय अख़बारों में कॉमनवेल्थ खेलों की तैयारी में दिख रही ख़ामियों को निशाना बनाया गया है.

डेली टेलीग्राफ़, टाइम्स, गार्डियन और इंडिपेंडेंट जैसे प्रतिष्ठित समाचारपत्रों ने टूटे हुए पुल की तस्वीरें छापी हैं और उनके रिपोर्टरों ने विस्तार से बताया है कि दिल्ली किस तरह खेलों के आयोजन के लिए अभी तक तैयार नहीं है.

डेली टेलीग्राफ़ में शीर्षक है- 'डिज़ास्टर इन डेल्ही'. अख़बार ने इंग्लैंड के दस्ते का नेतृत्व कर रहे क्रेग हंटर से बात की है जिन्होंने अख़बार को बताया कि उनके खिलाड़ियों और अधिकारियों को जो 280 कमरे दिए गए है उनमें से 60 कमरों में छत से पानी टपक रहा था, एयरकंडीशनिंग, बाथरूम और बिजली के स्विच ख़राब थे. उन्होंने इन कमरों को 'अनफ़िट फॉर ह्यूमन हैबिटेशन' यानी इंसान के रहने के लिए अनुपयुक्त बताया. अख़बार में ओलंपिक एडिटर जैकलिन मैगेन की टिप्पणी भी है जिसमें कहा गया है कि 2020 में ओलंपिक कराने का भारत का दावा खटाई में पड़ गया है, उनका कहना है कि भ्रष्टाचार, घटिया कार्य प्रणाली, बाल मज़ूदरों का इस्तेमाल और सुरक्षा के ख़तरों की वजह से भारत की बड़े आयोजन करने की क्षमता पर सवालिया निशान लग गया है.

टाइम्स ने कई बड़े खिलाड़ियों के दिल्ली जाने से मना करने को अधिक अहमियत दी है. अख़बार ने अंदर के पन्ने पर जवाहर लाल नेहरू स्टेडियम की छत पर चढ़े हुए एक मज़दूर की तस्वीर छापी है. अख़बार का कहना है कि जिस तरह दुनिया के कई बेहतरीन एथलीट आयोजन से बाहर हो गए हैं उससे खेलों का आकर्षण घट गया है, अख़बार का कहना है कि 'द होल इवेंट इज़ हैंगिंग ऑन ए नाइफ़ एज'यानी पूरा आयोजन ही ख़तरे में पड़ गया है.

गार्डियन ने गिरे हुए पुल की बड़ी तस्वीर पहले पन्ने पर छापी है और कैप्शन लिखा है--'डज़ इट लुक रेडी टू यू?'यानी क्या आपको यह तैयार दिख रहा है? अख़बार ने अंदर के पन्ने पर मज़दूरों की तस्वीर छपी है जो रात में फ्लड लाइट की रोशनी में काम कर रहे हैं, अख़बार का कहना है कि यह मुख्य स्टेडियम तक पहुँचने का रास्ता है जिसकी मरम्मत चल रही है. गार्डियन ने बाक़ी अख़बारों के मुक़ाबले थोड़ा अलग रवैया अपनाया है, अख़बार ने दक्षिण अफ्रीका के वर्ल्ड कप, बीजिंग और एथेंस ओलंपिक जैसे कई बड़े आयोजनों का उदाहरण देते हुए बताया है कि इन आयोजनों की तैयारी को लेकर चिंता प्रकट की गई थी लेकिन बाद में सब कुछ ठीक से हो गया.

इंडिपेंडेंट ने तैयारियों की बुरी हालत, अव्यवस्था की वजह से हो रही भारत की किरकिरी और बड़े खिलाड़ियों के न जाने को लेकर तीन बड़े लेख प्रकाशित किए हैं. पहली ख़बर का शीर्षक है--'रेस टू कीप द गेम्स ऑन ट्रैक' यानी कॉमनवेल्थ गेम्स को पटरी पर रखने की रेस. अख़बार ने कई भारतीय लोगों से बात की है जिनका कहना है कि ये खेल भारत के लिए प्रतिष्ठा नहीं बल्कि शर्मिंदगी का कारण बन रहे हैं. अख़बार का कहना है कि चीन को टक्कर देने का मंसूबा रखने वाले भारत की साख को गहरा धक्का लगा है.

छोटी और चुटीली हेडलाइन के लिए मशहूर टेबोलायड अख़बार 'सन' ने लिखा है--कॉमनवेल्थ शेम. डेली मिरर ने शरारती अंदाज़ में लिखा है कि 'खेलों के आयोजन के टलने का ख़तरा है, वैसे उनका आयोजन होना और भी बड़े ख़तरे की बात है'.

लंदन के स्थानीय अख़बार मेट्रो के पहले पन्ने पर ब्रुक का कार्टून है-जिसमें एक व्यक्ति दो सफ़ाई कर्मचारियों से कह रहा है कि इंग्लैंड की ओर से खिलाड़ियों के बदले उन्हें ही दिल्ली भेज देना चाहिए.

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