सुधरा खेल गाँव, लेकिन सवाल क़ायम

खेल गाँव

दिल्ली राष्ट्रमंडल खेल गाँव की हो रही कड़ी आलोचना के बीच शुक्रवार को अंतरराष्ट्रीय पत्रकारों को खेल गाँव घुमाया गया.

दिल्ली के प्रगति मैदान से शटल बस में बैठाकर पत्रकारों को खेल गाँव ले जाया गया. लेकिन ये यात्रा एक गाइडेड टुअर की तरह लगी.

वैसे आयोजन समिति के अधिकारी हों या वहाँ रह रहे कुछ विदेशी टीमों के प्रतिनिधि- सबने यह बात स्वीकार की कि स्थितियाँ पहले से बेहतर हुई हैं.

आयोजन समिति के विशेष महानिदेशक सुधीर मित्तल ने बीबीसी के साथ बातचीत में कहा, "अभी तो हालात ठीक हैं. मैं तो ये कहूँगा कि स्थिति पहले से और अच्छी है."

जब मैंने उनसे बीबीसी को मिली तस्वीरों के बारे में पूछा, तो पहले तो उन्होंने ये कहकर मामला टालने की कोशिश की कि तस्वीरें पूरी सच्चाई बयां नहीं करती.

लेकिन मेरे बार-बार ये पूछने पर कि तस्वीरें तो खेल गाँव की ही हैं और बाथरूम की है, उन्होंने कहा कि ये तस्वीरें पुरानी हो सकती हैं और तस्वीरों पर भी तारीख़ होती नहीं.

खेल गाँव साफ़-सुथरा दिख रहा है, लेकिन पूरा खेल गाँव कैसा है, ये हम नहीं कह सकते क्योंकि आयोजन समिति ने हमें पूरा खेल गाँव नहीं दिखाया.

बेहतर स्थिति

लेकिन जो भी इलाक़ा हमें दिखाया गया, उसकी स्थिति बेहतर थी और लग रहा था कि पिछले दो दिनों में सरकारी एजेंसियों ने पूरा जी-जान लगा दिया है.

Image caption शौचालयों की हालत भी सुधरी है

वेल्स टीम के टॉवर के एक फ़्लैट का नज़ारा हमें दिखाया गया, तो फ़्लैट साफ़-सुथरा था. लेकिन इसी टॉवर के सामने स्थित भारतीय टीम के टॉवर में हमें नहीं जाने दिया गया.

उत्तरी आयरलैंड के जनरल टीम मैनेजर विलियम टॉस ने भी कहा कि स्थितियाँ सुधरी हैं. बीबीसी के साथ बातचीत में उन्होंने कहा, "हम ख़ुशकिस्मत हैं कि हम थोड़ी देर से खेल गाँव पहुँचे हैं. पिछले दो-तीन दिनों की मेहनत के बाद ही खेल गाँव इस स्थिति में पहुँचा है."

खेल गाँव के कैम्पस में ही दिल्ली पुलिस के आयुक्त वाईएस डडवाल भी हमें मिल गए. बातचीत के दौरान उन्होंने फिर भरोसा दिलाया कि सुरक्षा व्यवस्था पुख़्ता है.

जब मैंने जामा मस्जिद की घटना की जाँच और राष्ट्रमंडल खेलों पर उसके असर के बारे में पूछा, तो उन्होंने कहा, "जाँच जारी है और नतीजा आने पर आपको बताया जाएगा. वैसे इस घटना का राष्ट्रमंडल खेलों पर असर नहीं पड़ेगा."

खेल गाँव के इस दौरे के बाद ये तो लगता है कि स्थितियाँ बदली हैं, लेकिन सवाल भी बरकरार हैं. सवाल ये कि अगर सब कुछ तैयार है, तो पत्रकारों को पूरे खेल गाँव का दौरा करने की अनुमति क्यों नहीं मिली.

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