रंगों और रोशनी की चकाचौंध के बीच खेल शुरु

राष्ट्रमंडल खेल

रंगारंग कार्यक्रमों और कलाकारों के मंत्रमुग्ध कर देने वाली पेशकश के बीच 19वें राष्ट्रमंडल खेलों की औपचारिक शुरुआत हो गई है.

दिल्ली के जवाहर लाल नेहरु स्टेडियम में ब्रिटेन के प्रिंस चार्ल्स और भारत की राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने आधिकारिक रूप से खेलों की शुरुआत की घोषणा की.

उदघाटन समारोह में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व निशानेबाज़ अभिनव बिंद्रा ने किया. जबकि पहलवान सुशील कुमार ने राष्ट्रमंडल खेलों की मशाल प्रिंस चार्ल्स को सौंपी.

उदघाटन समारोह की झलकियाँ

पाकिस्तानी टीम का भी भव्य स्वागत हुआ और स्टेडियम में मौजूद दर्शकों ने उनके सम्मान में तालियाँ बजाईं.

उदघाटन समारोह में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने सफल खेलों की कामना की, तो आयोजन समिति के प्रमुख सुरेश कलमाडी ने सबका धन्यवाद किया.

राष्ट्रमंडल खेल फ़ेडरेशन के प्रमुख माइक फ़ेनेल ने भी आयोजन समिति और भारत सरकार का आभार व्यक्त किया.

शानदार स्वागत

भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रमों के बीच हिस्सा ले रहे सभी देशों के एथलीटों का स्वागत किया गया. सबसे पहले स्वागत हुआ ऑस्ट्रेलिया की टीम का. पाकिस्तानी टीम का भी शानदार स्वागत हुआ.

Image caption नेहरू स्टेडियम में पाकिस्तानी टीम का ज़ोरदार स्वागत हुआ.

लेकिन जैसे ही मेज़बान टीम मैदान पर पहुँची, स्टेडियम तालियों से गूँज उठा. तालियाँ बजाने वालों में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह भी शामिल थे. उस समय माहौल और शानदार हो गया, जब मेज़बान टीम के स्वागत में राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल, प्रिंस चार्ल्स और प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह खड़े हो गए.

उदघाटन समारोह में सबसे पहले भारत का राष्ट्रगान बजा. इसके बाद नगाड़ों के बीच सांस्कृतिक कार्यक्रमों की शुरुआत हुई. जवाहर लाल नेहरू स्टेडियम रोशनी से नहाया हुआ था.

भारतीय संस्कृति की झलक वाले नृत्य पेश किए गए और एकदम मंत्रमुग्ध करने वाला नज़ारा था. समारोह का एक आकर्षण विशालकाय गुब्बारा भी था.

Image caption उदघाटन समारोह में भारतीय संस्कृति के झलक पेश की गई

जवाहर लाल नेहरू स्टेडियम में मौजूद बीबीसी हिंदी के खेल संपादक मुकेश शर्मा के मुताबिक़ समारोह में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, कांग्रेस की अध्यक्ष सोनिया गांधी, दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित, दिल्ली के उप राज्यपाल तेजेंदर खन्ना मौजूद थे.

इनके अलावा खेल मंत्री एमएस गिल, आयोजन समिति के अध्यक्ष सुरेश कलमाडी भी जवाहर लाल नेहरु स्टेडियम में पहुँच चुके हैं. राष्ट्रमंडल खेल फ़ेडरेशन के प्रमुख माइक फ़ेनेल और मुख्य कार्यकारी अधिकारी माइक हूपर भी समारोह में मौजूद थे.

'जादुई माहौल'

बीबीसी संवाददाता वंदना के मुताबिक़ दिल्ली राष्ट्रमंडल खेलों के उदघाटन समारोह के माहौल को जादुई बताया है.

Image caption उदघाटन समारोह में योग प्रदर्शन.

क्या भारतीय और क्या विदेशी हर कोई पूरी तरह रंगीन शाम के रंग में डूबा हुआ था. भारत की संस्कृति का हर पहलू वहाँ देखने को मिल रहा था.

यहाँ के माहौल को इस समय देखकर कहना मुश्किल है कुछ दिन पहले तक हर स्तर पर इन खेलों की चौतरफ़ा बुराई हो रही थी.

वर्ष 1982 के एशियाई खेलों के बाद दिल्ली में इतनी बड़ी खेल प्रतियोगिता का आयोजन हो रहा है.

जमैका के उसैन बोल्ट और असफ़ा पॉवेल जैसे बड़े स्टार्स की ग़ैर मौजूदगी के बावजूद दिल्ली राष्ट्रमंडल खेलों में 71 देशों के क़रीब सात हज़ार एथलीट हिस्सा ले रहे हैं.

इनमें भारत के रिकॉर्ड 619 एथलीट हिस्सा ले रहे हैं और घरेलू माहौल का फ़ायदा उठाकर पदकों की संख्या में बढ़ोत्तरी की भी आस लगाए होंगे.

भारतीय दावेदारी

दिल्ली राष्ट्रमंडल खेलों में भारत ने अब तक के सबसे बड़े दल को चुना है. भारत की ओर से 619 एथलीट इस प्रतियोगिता में हिस्सा लेंगे.

Image caption खेलों में भारत के 619 एथलीट हिस्सा ले रहे हैं.

भारत को निशानेबाज़ी, भारोत्तोलन और मुक्केबाज़ी में पदक की उम्मीद है. इन तीन खेलों के अलावा बैडमिंटन, तीरंदाज़ी और स्क्वैश में भी भारतीय खिलाड़ी अपना दम लगाएँगे.

भारतीय प्रतिनिधिमंडल के प्रमुख भुवनेश्वर कलीता ने कुछ दिनों पहले कहा था कि भारत पदक तालिका में दूसरे स्थान पर आने की कोशिश करेगा.

चार साल पहले मेलबोर्न राष्ट्रमंडल में भारत चौथे स्थान पर रहा था. पहले तीन स्थान ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड और कनाडा को मिले थे.

कई विवाद

दिल्ली राष्ट्रमंडल खेल विवादों के कारण ज़्यादा सुर्ख़ियों में रहा है. आयोजन समिति के अधिकारियों पर भ्रष्टाचार के आरोपों के अलावा समय पर तैयारियाँ पूरी न होने की भी काफ़ी आलोचना हुई.

कई स्टेडियम समय पर तैयार नहीं हुए. तो एथलीटों के ठहरने के लिए बने खेल गाँव की साफ़-सफ़ाई को लेकर काफ़ी आलोचना हुई.

बीबीसी को भी खेल गाँव की एक्सक्लूसिव तस्वीरें मिली, जिनमें खेल गाँव की बदहाली देखी जा सकती थी. बाद में आयोजन समिति और संबंधित अधिकारियों ने भी समस्याओं की बात मानी और समय पर खेल गाँव को चुस्त-दुरुस्त करने का वादा किया.

कई एथलीटों ने सुरक्षा कारणों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का हवाला देकर राष्ट्रमंडल खेलों से अपने नाम तक वापस ले लिए.

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