भारतीय खिलाड़ियों ने दिखाया दम

मेज़बान भारत के खिलाड़ियों के लिए दिल्ली राष्ट्रमंडल खेल सफल साबित हुए. वर्ष 2002 के मैनचेस्टर खेलों में मिले 30 स्वर्णों का आँकड़ा पार करते हुए भारत ने 38 स्वर्ण जीते. यही नहीं भारत ने इंग्लैंड को पछड़ाते हुए पदक तालिका में दूसरे स्थान पर कब्ज़ा किया और कुल 101 पदक जीते जिसमें 27 रजत और 36 कांस्य शामिल हैं.

खेल के आख़िरी दूसरे स्थान के लिए इंग्लैंड और भारत के बीच काँटे की टक्कर थी. बुधवार को भारत के कुल 36 स्वर्ण थे. आख़िरी दिन बैडमिंटन में मिले दो स्वर्णों की बदौलत भारत की कुल संख्या 38 स्वर्ण हो गई जबकि इंग्लैंड को मिले 37 स्वर्ण. भारत को 38वां स्वर्ण साइना नेहवाल ने दिलाया.

हालांकि हॉकी फ़ाइनल में भारत को निराशा हाथ लगी. ऑस्ट्रेलिया ने भारत को 8-0 से रौंद दिया और भारत एक भी गोल नहीं कर पाया. भारत को रजत से संतोष करना पड़ा. ये बात और है कि खेल शुरु होने से पहले भारतीय पुरुष टीम से इतनी भी उम्मीद नहीं की जा रही थी.

खेल शुरु होने से पहले आयोजन और प्रबंधन को लेकर भारत की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काफ़ी किरकिरी हुई. भारतीय मीडिया में भी तीखी आलोचना झेलनी पड़ी. आयोजकों ने भले ही निराश किया हो लेकिन भारतीय खिलाड़ियों ने अपने प्रदर्शन से सबका दिल जीत लिया.

महिला शक्ति

निशानेबाज़ी, तीरंदाज़ी, मुक्केबाज़ी, कुश्ती, भारोत्तोलन, बैडमिंटन सबमें भारत को पदक मिले. एथलेटिक्स जहाँ से भारत को कम ही उम्मीद रहती है वहाँ भी दो स्वर्ण आए और एथलेक्टिस में कुल 12 पदक मिले. कई खिलाड़ियों ने नए राष्ट्रमंडल रिकॉर्ड बनाए.

कुश्ती में गीता, बबीता या अनीता हो, भारोत्तोलन में रेणु बाला, तीरंदाज़ी में दीपिका या निशानेबाज़ी में अनिसा सईद... भारतीय महिला खिलाड़ियों ने भी सबके सामने अपना लोहा मनवाया.

जिम्नास्टिक्स में तो कोई भारत की चर्चा ही नहीं करता था. लेकिन वहाँ भी आशीष कुमार ने भारत को रजत और कांस्य पदक दिलाए.तैराक़ी में भी भारत की झोली खाली ही रहती आई है. लेकिन विकलांग खिलाड़ी प्रशांत ने वहाँ भी कांस्य दिला दिया.

भारत को इन खेलों में अपना पहला पदक मिला भारोत्तोलन में -सोनिया चानू और संध्या रानी को भारोत्तोलन में पहले दिन रजत और कांस्य मिले. इसके बाद तो पदक मिलने का सिलसिला ही शुरु हो गया.

भारत को पहले स्वर्ण का स्वाद चखाया निशानेबाज़ गगन नारंग और अभिनव बिंद्रा ने. नारंग ने खेलों में बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए कुल चार स्वर्ण जीते. विजय कुमार, ओंकार सिंह, हरप्रीत, तेजस्विनी..भारतीय निशानेबाज़ों का निशाना मानो चूका ही नहीं लेकिन खेल ख़त्म होते-होते उनका प्रदर्शन थोड़ा लचर होने लगा था.

नए कीर्तिमान

बैडमिंटन में भी खिलाड़ियों ने अपना कमला दिखाया. साइना ने सिंग्लस में स्वर्ण जीता तो महिलाओं के डबल्स में ज्वाला-अश्विनी की जोड़ी ने भी सोना जीता. मिक्सड टीम इवेंट में रजत मिला तो पी कश्यप ने पुरुष सिंग्लस में कांस्य लिया.

एथलेक्टिस में तो भारत ने इतिहास ही रच डाला.52 साल बाद कृष्णा पूनिया ने ट्रैक ऐंड फ़ील्ड इवेंट में भारत के लिए स्वर्ण पदक जीता.कृष्णा पूनिया ने महिला वर्ग के डिस्कस थ्रो मुक़ाबले में स्वर्ण पदक जीता. रजत और कांस्य भी भारत की हरवंत कौर और सीमा एंटिल को ही मिला.इससे पहले ट्रैक ऐंड फ़ील्ड इवेंट में भारत को कॉमनवेल्थ खेलों में स्वर्ण 1958 में मिल्खा सिंह ने दिलाया था.

4X400 महिला रिले में भी भारतीय परचम लहराया.मनजीत कौर, सिनी जोसफ़, अश्वनी अकुंजी और मनदीप कौर की चौकड़ी ने नाइजीरिया और इंगलैंड के धावकों को पछाड़ते हुए स्वर्ण पदक हासिल किया.

कुश्ती में भी भारतीय पहलवानों ने सबको नाकों चने चबवा दिए, ख़ासकर हरियाणवी पहलवानों का जलवा रहा- अनिल कुमार, योगेश्वर, रविंदर..फे़हरिस्त लंबी है.

तीरंदाज़ी में भी भारतीयों के बाण नहीं चूके. 16 बरस की दीपिका कुमारी ने एकल रिकर्व मुकाबले में स्वर्ण ही नहीं सबका दिल भी जीत लिया. वहीं राहुल बनर्जी ने पुरुष रिकर्व में स्वर्ण जीता.

टेबल टेनिस में पुरुष डबल्स में अंचता और शुभाजीत की जोड़ी ने स्वर्ण जीता. टेबल टेनिस में भारत के कुल पाँच जीते जिसमें महिला डबल्स का कांस्य भी था.

लेकिन मुक्केबाज़ी और टेनिस में लोगों को थोड़ा मायूस होना पड़ा. मुक्केबाज़ी में भारत को तीन स्वर्ण मिले लेकिन प्रशंसकों को इससे ज़्यादा की उम्मीद थी, ख़ासकर विजेंदर से. टेनिस में भी सोमदेव ने सिंग्लस में सोने का तमगा जीता लेकिन लिएंडर-पेस और लिएंडर-सानिया की जोड़ी ने निराश किया. सानिया ने सिंग्लस में रजत जीता.

ये बात सही है कि कई नामी खिलाड़ियों ने खेलों में हिस्सा ही नही लिया लेकिन बावजूद इस बात में कोई शक़ नहीं कि भारतीय खिलाड़ियों ने अपने देश का सर फ़क्र से ऊँचा कर दिया है... भारत के छोटे गाँव-कस्बों से आने वाले इन खिलाड़ियों ने ये काम कई मुश्किलों को पार पाते हुए किया है.

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