'बैंक गारंटी को ज़ब्त करने के आदेश'

राष्ट्रमंडल खेलों में कथित भ्रष्टाचार में हो रही जांच ने ज़ोर पकड़ लिया है. लगता है सबसे पहले गाज खेल गांव में निर्माण कार्य करने वाली निजी कंपनी एमआर एमजीएफ़ पर गिरेगी.

शहरी विकास मंत्रालय के उच्चस्थ सूत्रों ने बीबीसी को बताया है कि मंत्रालय ने दिल्ली विकास प्राधिकरण यानी डीडीए को निर्देश दिया है कि एमआर एमजीएफ़ की 183 करोड़ रुपए की बैंक गारंटी को ज़ब्त कर लिया जाए.

हालांकि एमआर एमजीएफ़ ने एक वक्तव्य जारी करके इस बात से इंकार किया है और कहा है कि डीडीए के अनुरोध पर सिर्फ़ उनकी गारंटी की अवधि 31 दिसंबर तक बढ़ा दी गई है.

शहरी विकास मंत्रालय के उच्चस्थ सूत्रों ने बीबीसी को बताया कि ये क़दम खेल गांव के निर्माण में बरती गईं कथित अनियमितताओं के कारण उठाया गया है.

बीबीसी को मिली जानकारी में सामने आया है कि एमआर एमजीएफ़ की बैंक गारंटी ज़ब्त करने के निर्देश का मुख्य कारण है खेल गांव के निर्माण में हुई देरी.

क़ानूनी क़दम

एमआर एमजीएफ़ को अपना निर्माण कार्य मार्च के महीने में पूरा करना था जबकि उसने पांच महीने बाद यानी अगस्त के महीने के आख़िर में ही काम पूरा किया जिससे भारत में हो रहे खेलों की छवि ख़राब हुई...इसके अलावा एमआर एमजीएफ़ ने कुछ ऐसा निर्माण कार्य भी किया जो उनके साथ हुए करार में शामिल नहीं था.

वहीं एमआर एमजीएफ़ ने अपने बयान में कहा है कि उन्हें बैंक गारंटी भुनाए जाने को लेकर कोई नोटिस नहीं मिला है.

वक्तव्य में कहा गया है कि खेल गांव डीडीए और आयोजन समिति को सभी सुविधाओं के साथ जून में ही सौंप दिया गया था.

एमआर एमजीएफ ने वक्तव्य में ये भी कहा है कि डीडीए ने जो भी कमियां गिनाई थीं उन्हें समय पर पूरा कर दिया गया था. और जो अधूरा काम था वो तभी पूरा किया जा सकता था जब डीडीए और आयोजन समिति ने कंपनी को खेल गांव वापस सौंपा .

बीबीसी को ये जानकारी भी मिली है कि 183 करोड़ की बैंक गारंटी को ज़ब्त किए जाने के निर्देश के अलावा ज़रूरत पड़ने पर कंपनी के खिलाफ़ क़ानूनी कदम भी उठाए जा सकते हैं. यहां तक कि इस कंपनी को ब्लैकलिस्ट भी किया जा सकता है.

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