नाराज़ हैं बंगाल के सितारे

पौलमी घटक, सोमनाथ चटर्जी और मौमा दास

हाल में संपन्न कॉमनवेल्थ खेलों में पदक जीतने वाले पश्चिम बंगाल के कुछ सितारे राज्य सरकार से बेहद नाराज़ हैं. इसकी वजह यह है कि सरकार ने इन खेलों में पदक जीतने वाले कुछ खिलाड़ियों को तो उपहार के तौर पर फ़्लैट देने का ऐलान किया है लेकिन उसे बाकी सितारों को धन्यवाद देने तक की फ़ुर्सत नहीं है.

कॉमनवेल्थ खेलों में रजत पदक जीतने वाली पौलमी घटक ने सरकार पर खिलाड़ियों के प्रति भेदभाव बरतने का आरोप लगाते हुए तैराक प्रशांत कर्मकार की तरह बंगाल छोड़ने की धमकी दी है. उन्होंने कहा है कि अगर सरकार का रवैया नहीं बदला तो वे आगे से किसी भी राष्ट्रीय खेल में बंगाल का प्रतिनिधित्व नहीं करेंगी.

इस पूरे मामले की शुरूआत इसी सप्ताह हुई.

कॉमनवेल्थ खेलों के ख़त्म होने के बाद सरकार ने भारोत्तोलोक सुखेन दे, पैरा-स्विमर प्रशांत कर्मकार और एथलीट रहमतकुल्लाह की उपलब्धियों को मान्यता देते हुए उनको सरकारी फ्लैट देने का ऐलान किया है. लेकिन बाकी पदक विजेताओं के प्रति उसने चुप्पी साध रखी है.

सम्मान समारोह में ज़ाहिर की नाराज़गी

इसलिए गुरुवार को यहां एक सम्मान समारोह में पौलमी घटक की नाराजगी फूट पड़ी. मौमा दास के साथ रजत पदक जीतने वाली पौलमी ने इस मौके पर सरकार को कटघरे में खड़ा करते हुए उस पर भेदभावपूर्ण रवैया अपनाने का आरोप लगाया.

इस कार्यक्रम का आयोजन पश्चिम बंगाल टेबल टेनिस एसोसिएशन ने किया था. इसमें राज्य के खेल मंत्री कांति गांगुली और एसोसिएशन के अध्यक्ष और लोकसभा के पूर्व अध्यक्ष सोमनाथ चटर्जी भी मौजूद थे.

पौलमी ने कहा कि सरकार क्रिकेट और फ़ुटबाल के अलावा दूसरे खेलों और खिलाड़ियों के प्रति लगातार उदासीनता बरत रही है. उन्होंने कहा, "यह बड़े दुख की बात है कि दूसरे राज्यों में सरकारें पदक जीतने वाले खिलाड़ियों को सम्मानित करने के प्रति काफी उदारता बरत रही है. लेकिन हमें अपने राज्य में ही सौतेले रवैये का सामना करना पड़ रहा है.हमें भी अगर फ़्लैट या मकान बनाने के लिए ज़मीन मिलती तो लगता कि कॉमनवेल्थ खेलों में हमारे प्रदर्शन को सरकार ने मान्यता दी है.’

पौलमी ने सवाल किया कि सरकार अगर सौरव गांगुली, बाइचुंग भूटिया और मांटू घोष जैसे खिलाड़ियों को फ़्लैट और ज़मीन दी है तो उनके प्रति उसका रवैया इतना उदासीन क्यों है ?

'पंद्रह साल का दर्द'

Image caption सोमनाथ चटर्जी ने खिलाड़ियों को सम्मानित किया.

पौलमी कहती हैं कि उनके दिल में बीते पंद्रह वर्षों से यह बात खटक रही थी. पौलमी ने कहा, "मुझे उम्मीद थी कि सरकार कम से कम मेरी पीठ थपथपाएगी. लेकिन किसी को इसकी फुर्सत नहीं मिली."

ध्यान रहे कि पश्चिम बंगाल में किसी खिलाड़ी के लिए सरकार के ख़िलाफ़ उदासीनता का आरोप लगाने का यह पहला मामला नहीं है. 50 मीटर फ्रीस्टाइल में कांस्य पदक जीतने वाले प्रशांत कर्मकार पहले ही सरकार पर उदासीनता का आरोप लगाते हुए बंगाल से हरियाणा जा चुके हैं. उन्होंने भी सरकार पर अपनी अनदेखी और ख़राब व्यवहार का आरोप गाया था.

खेल मंत्री ने भरोसा दिलाय

Image caption मौमा दास, सौम्यदीप राय और पौलमी घटक को सम्मानित किया गया.

उधर, तीरंदाज डोला बनर्जी ने भी सरकार पर खेलों के प्रति उदासीनता बरतने का आरोप लगाया है. उन्होंने कहा, "खेलों में काफ़ी कुछ हासिल करने के बाद सरकार ने थोड़ी-बहुत मदद की. लेकिन खेलों की तैयारियों के दौरान सरकार से हमें कोई सहायता नहीं मिली.’

समारोह में मौजूद खेल मंत्री कांति गांगुली ने कहा कि खिलाड़ियों को फ़्लैट देने का फ़ैसला बंगाल ओलंपिक एसोसिएशन का था और एसोसिएशन ने सरकार के पास खिलाड़ियो के नाम भेजे थे. संयोग से सरकार के पास तीन फ़्लैट ही खाली थे.

गांगुली ने कहा कि फ़्लैटों के आवंटन का जिम्मा आवास मंत्रालय के पास है,खेल मंत्रालय के पास नहीं. मंत्री ने पौलमी के मामले को अपने स्तर पर उठाने का भरोसा दिया

संबंधित समाचार