ये रणनीति है या 'रणछोड़' नीति

सचिन तेंदुलकर

पिछले एक साल में भारतीय क्रिकेट टीम ने टेस्ट क्रिकेट में अपना वर्चस्व साबित किया है, इससे शायद ही किसी को इनकार होगा.

आईसीसी की टेस्ट रैंकिंग में शीर्ष पर जाने की चाह में भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) ने टीम के कार्यक्रमों में फेरबदल तक किया.

यानी टेस्ट रैंकिंग में शीर्ष पर बने रहने की चाह में बोर्ड ने हरसंभव कोशिश की. लेकिन बोर्ड की इन कोशिशों को कोई मतलब नहीं होता अगर खिलाड़ी मैदान पर अच्छा प्रदर्शन न करते.

एक समय एक-दो अंक के अंतर से शीर्ष स्थान पर पहुँचने वाली भारतीय टीम अब अच्छे-ख़ासे अंतर से रैंकिंग में शीर्ष पर है.

तो टेस्ट में भारतीय टीम का वर्चस्व क़ायम हो चुका है. लेकिन टेस्ट मैचों के लिए हर तीर अपने तरकश से निकालने वाला बोर्ड वनडे मैचों की तैयारी और ख़ासकर अगले साल के शुरू में होने वाले विश्व कप के लिए क्या तैयारी कर रहा है.

सवाल अहम है, लेकिन बोर्ड किस दिशा में जा रहा है, क्या कर रहा है, कुछ ठोस रास्ता नहीं दिख रहा.

कैसी रणनीति

विश्व कप तो अगले साल होना है, लेकिन बोर्ड और चयनकर्ताओं की रणनीति का एक अहम पहलू आप भी देख लीजिए.

ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ टेस्ट सिरीज़ में भारत ने जीत के झंडे गाड़े और तीन में से एक वनडे में जीत हासिल भी की. लेकिन ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ वनडे टीम पर अगर नज़र डालें, तो कई नए चेहरे को शामिल किया गया.

आर अश्विन, शिखर धवन, सौरभ तिवारी, मुरली विजय और विनय कुमार को टीम में जगह मिली. अब न्यूज़ीलैंड के ख़िलाफ़ भारतीय टीम टेस्ट मैच खेल रही है.

सारे स्टार खिलाड़ी इस टेस्ट सिरीज़ में हिस्सा ले रहे हैं. लेकिन न्यूज़ीलैंड के ख़िलाफ़ वनडे सिरीज़ के लिए बोर्ड की रणनीति सवाल उठा रही है.

बोर्ड ने जो संकेत दिए हैं, उसके मुताबिक़ एक बार फिर स्टार खिलाड़ियों को आराम दिया जा सकता है. यानी सचिन, सहवाग, ज़हीर, भज्जी, गौतम गंभीर और यहाँ तक कि कप्तान धोनी को भी वनडे टीम से अलग रखा जा सकता है.

वजह बोर्ड इन खिलाड़ियों को पहले ही दक्षिण अफ़्रीका भेजना चाह रहा है ताकि वे टेस्ट सिरीज़ के लिए ज़्यादा तैयारी कर पाए.

भारत को न्यूज़ीलैंड के ख़िलाफ़ पाँच वनडे मैच खेलने हैं. दक्षिण अफ़्रीका दौरे में भी टेस्ट मैचों के बाद वनडे सिरीज़ में पाँच मैच होने हैं और इसमें बीसीसीआई सीनियर खिलाड़ियों को आराम नहीं दे सकती.

कार्यक्रम

क्योंकि इसके तुरंत बाद ही विश्व कप शुरू हो जाएगा. जिन सीनियर खिलाड़ियों को आराम या भी रणनीति के तौर पर नहीं खेलने दिया जा रहा है, उनमें कई खिलाड़ी ऐसे हैं, जिन पर विश्व कप अभियान में टीम का दारोमदार होगा.

Image caption वनडे टीम में अब भी ख़ूब फेरबदल हो रहे हैं

मसलन सचिन तेंदुलकर, वीरेंदर सहवाग, गौतम गंभीर, ज़हीर खान और हरभजन सिंह. सचिन ने फरवरी के बाद कोई वनडे नहीं खेला है. दक्षिण अफ़्रीका के ख़िलाफ़ इसी वनडे में सचिन ने 200 रनों की पारी खेली थी.

हमें नहीं पता कि बीसीसीआई की रणनीति क्या रंग लाएगी. लेकिन ये सवाल ज़रूर चुभने वाला है कि जो खिलाड़ी विश्व कप की संभावित टीम का हिस्सा भी नहीं हो सकते, उन पर इस समय दाँव लगाने का समय नहीं.

अगर सचिन, सहवाग, गंभीर और ज़हीर जैसे खिलाड़ी अहम भूमिका निभाएँगे, तो विश्व कप जैसी प्रतिष्ठित प्रतियोगिता से पहले इन खिलाड़ियों को वनडे अंतरराष्ट्रीय मैचों से क्यों दूर रखा जा रहा है.

क्या नेट्स पर अभ्यास और किसी अंतरराष्ट्रीय टीम के ख़िलाफ़ अभ्यास मैच में कोई अंतर नहीं. अगर न्यूज़ीलैंड के ख़िलाफ़ वनडे सिरीज़ में सीनियर खिलाड़ियों को जगह नहीं मिली, तो टेस्ट में शीर्ष पर होने के बावजूद विश्व कप में भारतीय टीम को मुश्किलों से दो-चार होना पड़ सकता है.

फिर वही रोना शुरू हो जाएगा, जैसा वर्ष 2007 में वेस्टइंडीज़ में हुए विश्व कप में हुआ था. उस विश्व कप में भारतीय टीम बांग्लागेश से भी हार गई थी. और उसे अगले दौर में जगह तक नहीं मिली.

संभल जाओ बोर्ड वालो....अभ्यास कितनी भी हो...व्यर्थ नहीं जाती.

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