दिल्ली का प्रदर्शन दोहराने का दबाव

सीमा एंतिल और हरवंत कौर के साथ कृष्णा पूनिया
Image caption डिस्कस थ्रो में भारत ने राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण, रजत और काँस्य पदक जीता था

राष्ट्रमंडल खेलों के अंतिम दिन बैडमिंटन स्टार साइना नेहवाल ने बैडमिंटन के एकल ख़िताब में स्वर्ण पदक जीतकर भारत को पदक तालिका में दूसरे स्थान पर पहुँचा दिया था.

भारत का उन खेलों में वो सबसे बेहतरीन प्रदर्शन था और उसके एक ही महीने के भीतर अब एथलीट्स पर दोबारा वैसा ही प्रदर्शन दोहराने का दबाव होगा, एशियाड में.

राष्ट्रमंडल खेलों की शुरुआत से पहले तक तैयारियों से जुड़ी जिस तरह की ख़बरें अंतरराष्ट्रीय मीडिया में आईं उससे भारत की छवि को धक्का लगा था मगर जैसे-जैसे गगन नारंग, दीपिका कुमारी, कृष्णा पूनिया, सुशील कुमार और साइना नेहवाल के पदक जीतने की ख़बरें आईं वैसे-वैसे लोग स्टेडियम की ओर बढ़ चले.

उसी दौरान भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच जारी क्रिकेट शृंखला से ज़्यादा लोगों का ध्यान इन खेलों पर रहा.

दबाव

Image caption गगन नारंग से एक बार फिर अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद होगी

इन एथलीट्स ने अपने ही देश में हो रहे राष्ट्रमंडल खेलों के लिए काफ़ी कड़ी मेहनत की थी मगर अब उनके ऊपर दबाव है वैसा ही प्रदर्शन दोहराने का.

चार साल पहले दोहा में हुए एशियाई खेलों में भारत को 10 स्वर्ण सहित 53 पदक मिले थे और भारत पदक तालिका में आठवें स्थान पर था.

भारत ने राष्ट्रमंडल खेलों में निशानेबाज़ी और कुश्ती में ख़ास तौर पर अच्छा प्रदर्शन किया था मगर राष्ट्रमंडल खेलों के स्वर्ण पदक विजेता सुशील कुमार इन खेलों में हिस्सा ही नहीं ले रहे हैं.

इसके अलावा पिछले बार स्वर्ण पदक विजेता शतरंज खिलाड़ी कोनेरू हंपी भी इन खेलों में हिस्सा नहीं ले रही हैं.

भारत को पिछली बार टेनिस में भी दो स्वर्ण पदक मिले थे जबकि लिएंडर पेस ने महेश भूपति के साथ मिलकर पुरुष युगल में और सानिया मिर्ज़ा के साथ मिलकर मिश्रित युगल में स्वर्ण जीता था. इस बार लिएंडर इन खेलों में हिस्सा नहीं ले रहे हैं.

निशानेबाज़ी में गगन नारंग और अभिनव बिंद्रा से भारत को काफ़ी उम्मीदें हैं मगर चीनी और कोरियाई निशानेबाज़ों से उन्हें कड़ी टक्कर मिलेगी.

भारतीय तीरंदाज़ों ने दिल्ली में अच्छा प्रदर्शन किया जिसके बाद एशियाड में राहुल बनर्जी, दीपिका कुमारी और डोला बनर्जी जैसे तीरंदाज़ों से एक बार फिर अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद होगी.

क्रिकेट से नदारद

Image caption पहलवान सुशील कुमार इन खेलों में हिस्सा नहीं ले पाएँगे

भारत ने राष्ट्रमंडल खेलों में एथलेटिक्स में इस बार अच्छा प्रदर्शन किया था और एक बार फिर कृष्णा पूनिया डिस्कस थ्रो में स्वर्ण के लिए मेहनत कर रही हैं.

भारत ने दिल्ली राष्ट्रमंडल खेलों की ही तरह दोहा में भी चार गुणा 400 मीटर महिलाओं की दौड़ में स्वर्ण जीता था और ये टीम पिछला प्रदर्शन दोहराना चाहेगी.

बैडमिंटन में भारतीय टीम को चीन और मलेशिया जैसी टीमों से कड़ी टक्कर मिलेगी और स्वर्ण पदक की राह किसी भी मुक़ाबले में आसान नहीं है.

इस बार एशियाड में क्रिकेट को भी शामिल किया गया है मगर भारत ने टीम नहीं भेजने का जो फ़ैसला किया उससे इस स्पर्द्धा की चमक फीकी पड़ गई.

भारत और न्यूज़ीलैंड की सिरीज़ तो चल ही रही है क्रिकेट की अन्य क्षेत्रीय महाशक्तियों की भी दूसरे दर्जे की ही टीमें एशियाड में शामिल होंगी. पाकिस्तान और दक्षिण अफ़्रीका की सिरीज़ जारी है तो वहीं श्रीलंका का मुक़ाबला ऑस्ट्रेलिया से हो रहा है.

भारत इन खेलों में 609 एथलीट्स सहित 843 सदस्यों का एक बड़ा दल भेज रहा है और उसकी कोशिश 1982 के 57 पदकों वाले सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन को पीछे छोड़ने की होगी.

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