टूट गया मैरीकॉम का सपना

मैरीकॉम
Image caption मैरीकॉम इस हार के बावजूद लंदन ओलंपिक में स्वर्ण पदक की तैयारी कर रही हैं.

पाँच बार की विश्व चैंपियन मुक्केबाज़ एमसी मैरीकॉम का एशियाड में महिलाओं की मुक्केबाज़ी का पहला स्वर्ण पदक जीतने का सपना टूट गया.

उनका ये सपना तोड़ा दूसरी विश्व चैंपियन मुक्केबाज़ चीन की रेन कैनकैन ने.

मैरीकॉम ने 48 किलोग्राम वर्ग में विश्व चैंपियनशिप बारबाडोस में जीती थी. मगर एशियाई खेलों में उन्हें 48 से 51 किलोग्राम के वर्ग में हिस्सा लेना था. वह मानती हैं कि ये उनकी हार की एक बड़ी वजह थी.

उनकी प्रतिद्वन्द्वी रेन ने बारबाडोस की विश्व चैंपियनशिप 51 किलोग्राम वर्ग में जीती थी. शायद यही वजह है कि उनके लिए इस वर्ग में जीतना आसान रहा.

मैरीकॉम का कहना था, ''मैं इस भार वर्ग में पहली बार उतरी थी और इसका मुझे कोई अनुभव भी नहीं था. इस भार वर्ग में होने का मतलब था लंबे और ज़्यादा वज़न वाले मुक्केबाज़ों से भिड़ना. इससे मुझे कुछ परेशानी हुई.''

वैसे उन्होंने अपने मुक़ाबले के दौरान जजों के फ़ैसले पर भी सवाल उठाए. मैरीकॉम के मुताबिक़ उनकी प्रतिद्वन्द्वी उन्हें नीचे झुकाकर उन्हें वहाँ दबाने की कोशिश कर रहीं थीं और नियमों से विपरीत होने की वजह से रेफ़री को इसे फ़ाउल देना चाहिए था.

मुक़ाबला

रेन ने मुक़ाबला काफ़ी आक्रामक अंदाज़ में शुरू किया था और पहले ही राउंड में 3-1 की बढ़त ले ली थी मगर मैरीकॉम ने दूसरे राउंड में वापसी करते हुए स्कोर के अंतर को कम करके 4-3 कर दिया.

इसके बाद तीसरे राउंड में रेन फिर हावी हुईं और अंत में स्कोर उनके पक्ष में 11-7 रहा.

हार के बाद बीबीसी हिंदी से बात करते हुए मैरीकॉम ने कहा, ''मैंने अपनी पूरी कोशिश की मगर मेरी प्रतिद्वन्द्वी मुझे दबा रही थी. इस दौरान मेरी ऊर्जा ख़र्च होती गई और मैं अपने दाँए और बाँए हाथ के मिले-जुले मुक्कों का इस्तेमाल नहीं कर सकी.''

मैरीकॉम निराश हैं कि वो देश के लिए स्वर्ण नहीं जीत सकीं. उन्होंने कहा, ''मैं अपने प्रदर्शन से संतुष्ट हूँ और ख़ुश हूँ कि पहली बार एशियाई खेलों में काँस्य पदक जीता मगर मैं देश के लिए स्वर्ण जीतना चाहती थी.''

भार वर्ग की मुश्किलें

लोग आम तौर पर वज़न कम करने की कोशिश करते रहते हैं मगर मैरीकॉम वज़न बढ़ाने के लिए संघर्ष कर रहीं थीं.

उन्हें इस भार वर्ग में लड़ने के लिए वज़न बढ़ाना था. साथ ही अभ्यास पूरा करने के लिए उन्होंने साथी मुक्केबाज़ सुरंजय सिंह के साथ तैयारी की थी.

मगर उसी दिन सुरंजय सिंह के सेमीफ़ाइनल में एक चीनी मुक्केबाज़ से ही हार जाने के बाद मैरीकॉम पर मानसिक रूप से उसका असर हुआ.

मैरीकॉम मानती हैं कि सुरंजय को जजों ने ठीक अंक नहीं दिए जिसकी वजह से सुरंजय हार गए. ऐसे में वो सुरंजय का बदला लेना चाहती थीं मगर दुर्भाग्यवश ऐसा नहीं कर सकीं.

जुड़वाँ बच्चों की माँ मैरीकॉम इस हार के बावजूद लंदन ओलंपिक में स्वर्ण पदक की तैयारी कर रही हैं.

उनका कहना था कि वो इस हार से सबक लेकर अपनी प्रतिद्वन्द्वी को और ध्यान से परखेंगी और बेहतर तैयारी करेंगी.

भारत के राष्ट्रीय मुक्केबाज़ी कोच गुरबख़्श सिंह संधू भी मानते हैं कि मैरीकॉम में वापसी की पूरी क़ाबलियत है और ओलंपिक में वो स्वर्ण जीतने की प्रबल दावेदार होंगी.

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