स्वर्ण के साथ ओलंपिक में जगह

पाकिस्तानी टीम

पाकिस्तानी हॉकी टीम ने एशियाई खेलों का स्वर्ण पदक जीतने के साथ ही 2012 के लंदन ओलंपिक खेलों के लिए क्वॉलीफ़ाई कर लिया है.

एशियाई खेलों में हिस्सा लेने वाले बाक़ी देशों को अब क्वालीफ़िकेशन के मुक़ाबले खेलकर ओलंपिक में जगह बनानी होगी. भारत तो 2008 के बीजिंग ओलंपिक में क्वालीफ़ाई तक नहीं कर पाया था.

पाकिस्तान ने फ़ाइनल में मलेशिया को 2-0 से हरा दिया. ये पाकिस्तानी हॉकी टीम का एशियाई खेलों में आठवाँ स्वर्ण था. पिछली बार उसने 1990 में बीजिंग एशियाड में स्वर्ण जीता था.

वरिष्ठ खिलाड़ी सुहैल अब्बास ने 26वें मिनट में मिले पेनल्टी कॉर्नर का फ़ायदा उठाते हुए पाकिस्तान के लिए पहला गोल किया जबकि रेहान बट ने शफ़क़त रसूल के दाहिनी ओर से मिले पास को 38वें मिनट में गोल का रास्ता दिखा दिया.

जीत मुल्क़ को

जीत मिलते ही पाकिस्तानी गोलकीपर सलमान अकबर ने हेलमेट और हॉकी स्टिक को आसमान में उछाल दिया और ज़्यादातर पाकिस्तानी खिलाड़ियों ने घुटनों पर बैठकर प्रार्थना की.

जीत के बाद बीबीसी हिंदी से बात करते हुए अकबर ने ये जीत देश को समर्पित की.

उन्होंने कहा, “पाकिस्तान में जो हालात चल रहे हैं जिस तरह से आतंकवाद के वाक़ये हो रहे हैं उसे देखते हुए मैं ये मेडल पूरे देश को समर्पित करता हूँ.”

अकबर के मुताबिक़, “हमारे मुल्क़ का आज तराना बजा तो काफ़ी ख़ुशी हुई है और दुआ है कि इसी तरह पाकिस्तान के हालात अच्छे हों. बहुत ख़ुशी इस बात की है कि हमारे ज़रिए मुल्क़ को ख़ुशी मिली है.”

सलमान ने बताया कि वह तो मारे उत्साह के सेमीफ़ाइनल मैच के बाद और फ़ाइनल की एक रात पहले ठीक से सो भी नहीं सके.

‘अभी रिटायरमेंट नहीं’

इस टूर्नामेंट से पहले सुहैल अब्बास को टीम में शामिल किया गया था जिससे बाक़ी खिलाड़ी उनके अनुभव का फ़ायदा उठा सकें और अब्बास ने इस टूर्नामेंट में सात गोल भी किए.

मगर 280 से ज़्यादा अंतरराष्ट्रीय मैच खेल चुके 35 वर्षीय अब्बास की अभी रिटायरमेंट की कोई योजना नहीं है.

उन्होंने कहा, “रिटायरमेंट की कोई उम्र नहीं होती, ये तो बस फ़िटनेस की बात होती है. स्पोर्ट्स मेरा जुनून है और फ़िलहाल रिटायर होने की मेरी कोई योजना नहीं है.”

पाकिस्तान इस टूर्नामेंट में सिर्फ़ भारत से ही एक मैच हारा मगर उसके बाद भी टीम ने फ़ोकस नहीं खोया और अंत में जीत हासिल की.

गोलकीपर अकबर ने कहा कि यही जीत की वजह बनी. उनका कहना था, “हम यहाँ सिर्फ़ भारत को हराने नहीं बल्कि सोना जीतने आए थे. हमने उस हार के बाद भी अपना ध्यान वहीं रखा और आज हम जीत गए.”

जीत में एक गोल के साथ योगदान करने वाले रेहान बट ने कहा कि अब टीम के पास ओलंपिक की तैयारी का काफ़ी समय है.

कप्तान ज़ीशान अशरफ़ का कहना था कि टीम ने इस जीत के लिए काफ़ी मेहनत की है.

अशरफ़ ने कहा, “हम विश्व कप में अंतिम स्थान पर थे, राष्ट्रमंडल खेलों में भी हमारा प्रदर्शन कुछ ख़ास नहीं था मगर फिर हमने अभ्यास किया और अंत में यहाँ तक पहुँचे.”

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