मैन यू ख़रीदने पर हुआ था बर्मा में विचार

जनरल थान श्वे
Image caption थान श्वे का कहना था कि समुद्री तूफ़ान से हुए विनाश के बाद क्लब ख़रीदने पर विचार ठीक नहीं लगेगा

इंग्लैंड के फ़ुटबॉल क्लब मैनचेस्टर यूनाइटेड के प्रशंसक दुनिया भर में हैं मगर उसे ख़रीदने के बारे में एक ऐसा वर्ग सोच रहा था जिसके बारे में शायद ही कोई अंदाज़ा लगा सकता.

बर्मा के प्रमुख शहर रंगून में स्थित अमरीकी दूतावास से भेजे गए केबल के मुताबिक़ बर्मा के सैनिक शासक वो क्लब ख़रीदने के लिए लगभग एक अरब डॉलर की बोली लगाने की सोच रहे थे.

सैनिक शासक ये विचार उस समय कर रहे थे जबकि समुद्री तूफ़ान नरगिस से बर्मा में हुए विनाश के बाद धीमी कार्रवाई के लिए शासन की आलोचना हो रही थी.

विकीलीक्स के ज़रिए सार्वजनिक हुई जानकारियों में ये जानकारी भी सामने आई है.

बर्मा के सैनिक शासक थान श्वे मैनचेस्टर यूनाइटेड के फ़ैन हैं और उनके पोते ने उनसे ये बोली लगाने की अपील की थी.

अमरीकी केबल

अमरीकी केबल के अनुसार सैनिक शासक फ़ुटबॉल के ज़रिए देश के राजनीतिक और आर्थिक मसलों से लोगों का ध्यान हटाना चाहते थे.

ये प्रस्ताव जनवरी 2009 से पहले रखा गया था और उससे पहले मई 2008 में समुद्री तूफ़ान नरगिस से हुए विनाश के बाद बर्मा के सैनिक शासकों पर अंतरराष्ट्रीय सहायता रोकने का आरोप लगा था.

वैसे उस समय थान श्वे ने कहा था कि मैनचेस्टर यूनाइटेड के लिए अभी बोली लगाना 'काफ़ी बुरा दिखेगा'.

जून 2009 में वॉशिंगटन भेजे गए केबल में कहा गया है, "एक उच्च पदस्थ सूत्र के मुताबिक़ थान श्वे का पोता चाहता था कि थान श्वे मैनचेस्टर यूनाइटेड के लिए एक अरब डॉलर की बोली लगाएँ."

केबल के मुताबिक़, "वरिष्ठ सेनाधिकारी ने सोचा कि इस तरह का ख़र्च करना बुरा लगेगा इसलिए उन्होंने बर्मा में अपनी ही एक लीग खड़ी करने का फ़ैसला किया."

बर्मा को भरोसा

उस प्रस्ताव से ये भी पता चलता है कि तेल और गैस भंडारों के ज़रिए धन जुटाने वाले बर्मा के शासन को इतना धन इकट्ठा कर लेने का भरोसा था.

उस समय फ़ोर्ब्स पत्रिका ने क्लब का जो मूल्यांकन किया था उसके हिसाब से एक अरब डॉलर में उस क्लब में 56 प्रतिशत हिस्सेदारी ख़रीदी जा सकती थी.

ख़बरों के अनुसार उसके बाद थान श्वे ने आठ प्रमुख व्यावसायिक और राजनीतिक हस्तियों पर टीम का गठन करने के लिए, बाहर से खिलाड़ी लाने के लिए और नए स्टेडियम बनाने के लिए दबाव डाला.

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