मैं प्रतिभाशाली नहीं हूँ: साइना

साइना नेहवाल
Image caption साइना नेहवाल हांग-कांग सुपर सीरीज़ जीतकर दूसरे नंबर तक पहुंच गईं थीं.

भारत की सबसे सफल महिला बैडमिंटन खिलाड़ी साइना नेहवाल का कहना है कि उनमें प्रतिभा नहीं है, सिर्फ़ मेहनत करने का जज़्बा है.

हाल ही में अपनी चौथी बैडमिंटन सुपर सीरीज़ जीत चुकीं साइना ने बीबीसी से एक ख़ास बातचीत में कहा, "मुझमें बहुत ज़्यादा प्रतिभा न तो थी न ही है. मुझे हर चीज़ के लिए कड़ी मेहनत करनी पड़ती है, चाहे वो मेरे स्ट्रोक्स हों, या मेरी सेहत या फिर मेरा वज़न."

साइना ने बताया, "मैं क़रीब आठ से नौ घंटे व्यायाम करती हूं. मैं दौड़ने के साथ-साथ वज़न भी उठाती हूं."

20 साल की साइना ने हाल ही में हांग-कांग सुपर सीरीज़ जीती और इसके साथ ही उनकी विश्व रैंकिग नंबर दो हो गई थी.

उन्होंने कहा "मुझे बहुत ख़ुशी है कि मैं 20 साल की उम्र में ही विश्व नंबर दो बन गई क्योंकि बैडमिंटन में इतनी अच्छी रैंकिग पाना मुश्किल काम है. उससे भी ज़्यादा मुश्किल है अपनी रैंकिंग पर क़ायम रहना. मुझे मालूम है कि अच्छी रैंकिंग पर बने रहने के लिए मुझे और टूर्नामेंट जीतने होंगे और ये आसान नहीं होगा."

साइना हाल ही में अपने टख़ने की चोट से परेशान रही हैं. तो वो अपनी सेहत को लेकर आगे कैसे ख़्याल रखेंगी?

साइना कहती हैं, "मुझे लगता है कि मैं विश्व के सबसे फ़िट खिलाड़ियों में से एक हूं. लेकिन कभी-कभी जब आप बड़े टूर्नामेंट खेलते हैं तो चोट लग ही जाती है. लेकिन मैं अपने फ़िज़ियो और डॉक्टर की मदद से खेलती जा रही हूं. मैं जानती हूं कि मुझे अपने आपको शारिरिक और मानसिक तौर पर और ताक़तवर बनाना है."

साइना अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता और अपने कोच को देती हैं.

वह कहती हैं, "गोपी सर और भास्कर बाबू सर पिछले चार-पाँच साल से मेरे कोच रहे हैं. दोनों ही मेरे खेल में सुधार लाए हैं. ज़्यादातर सुपर सीरीज़ में मैं भास्कर बाबू की निगरानी में खेली हूं. गोपी सर ने मेरे स्ट्रोक्स और मेरे रफ़्तार पर बहुत मेहनत की है. उन्होंने मुझे बताया कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खिलाड़ी कैसे खेलते हैं और कैसी फ़िटनेस चाहिए. जब कोच और खिलाड़ी मिलकर मेहनत करते हैं तो परिणाम अच्छा होता ही है."

साइना का कहना है, "मेरे माता-पिता को मालूम है कि एक चैंपियन बनने में कितनी मेहनत लगती है और हमेशा मेरा साथ दिया. मेरी मां का हमेशा से सपना था कि मैं एक कामयाब बैडमिंटन खिलाड़ी बनूं. हार में भी वो मेरा हौसला बढ़ाती रहीं."

साइना ने नौ साल की उम्र में बैडमिंटन खेलना शुरु किया था और 16 साल की उम्र में व्यवसायिक तौर पर खेलने लगीं. साल 2009 और 2010 साइना के लिए बहुत अच्छे रहे हैं. इस बीच उन्होंने चार सुपर सीरीज़ और एक कॉमनवेल्थ गोल्ड मेडल भी जीता है.

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