खेलों के बाद आइस रिंक का क्या होगा?

दक्षिण एशियाई सहयोग संगठन (सार्क) देशों के पहले शीतकालीन खेल उत्तराखंड में चल रहे हैं. पहले चरण में देहरादून में आइस रिंक पर इनडोर स्केटिंग प्रतियोगिताएं समाप्त हो गई हैं.दूसरे चरण में औली में 14 से 16 जनवरी तक बर्फ़ीले ढलानों पर आउटडोर स्कीइंग प्रतियोगिताएं होंगी

विंटर सैफ़ गेम्स का उदघाटन करने के लिए केंद्रीय खेल मंत्री एमएस गिल को देहरादून आना था. लेकिन उनकी जगह आए खेल राज्य मंत्री प्रतीक प्रकाश बापू पाटिल.

वो भी एक कोने में उपेक्षित ढंग से बैठे दिखे. राज्यपाल मार्ग्रेट अल्वा कार्यक्रम देखने तो आईं लेकिन सुरक्षा कर्मियों ने एक बारगी तो उन्हें पहचानने से इनकार कर दिया.

इस बात की चर्चा थीं कि राज्यपाल को उदघाटन में क्या बुलाया ही नहीं गया था. बहरहाल मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने पूरे गाजेबाजे के साथ दून आइस स्केंटिंग स्टेडियम में पहले दक्षिण एशियाई शीतकालीन खेलों (सैफ) के उदघाटन की घोषणा की.

समारोह में कैलाश खेर का गायन था. इसलिए खचाखच भीड़ उमड पडी़ और पत्रकारों को नीचे बैठना पड़ा और फिर धरने पर...

खेलें/‘देखें हम जी जान से-

आखिरी दिनों तक खेलों के लिए आमंत्रित सार्क देशों से खिलाड़ियों की कोई सूची नहीं आई थी और आयोजकों के चेहरे पर हवाइयां उड़ रही थीं.

इसलिए प्रवेश के लिए कोई कटऑफ़ डेडलाइन भी नहीं रखी गई थी. ये कहा गया कि आखिरी पलों में भी विदेशी एंट्री स्वीकार कर लेंगे और घबराने की कोई बात नहीं है.

आयोजकों का कहना था कि हमने उन्हें बुलाया है, आ गए तो ठीक है वरना उन्हें मजबूर तो किया नहीं जा सकता.

खैर लाज बची और कुछ विदेशी प्रतिनिधि पंहुचे. लेकिन भूटान और नेपाल से आए प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों ने कहा –हम तो सिर्फ़ देखने आए हैं. हमारे यहां ऐसी रिंक नहीं और हम इसके बारे में जानते नहीं.इसका दिलचस्प पहलू ये रहा कि हर प्रतियोगिता में भारत का ही परचम लहराता दिखा.

ये कहा जा रहा है कि भागीदारी कम इसलिए रही क्योंकि सार्क देशों में स्केटिंग और स्कीइंग लोकप्रिय खेल नहीं हैं. सच ही है, हो भी कैसे सकते हैं आखिरकार बर्फ़ के बिना स्कीइंग तो ही नहीं सकती.

मेज़बानी से खु़श हुए मेहमान

खेल चाहे जैसे भी हों लेकिन उत्तराखंड की मेज़बानी से विदेशी मेहमान बहुत खुश नज़र आए.और होते भी क्यों नहीं. उन्हें राजधानी के सबसे बेहतरीन और मंहगे होटल में ठहराया गया और पांच सितारा खातिरदारी की गई.

पाकिस्तानी टीम के सदस्य शेर अफज़ल ने कहा कि उत्तराखंड बहुत खूबसूरत जगह है, खाना अच्छा है और यहां के नजा़रे मन मोहनेवाले हैं. लेकिन खेल के बारे में उन्होंने कुछ नहीं कहा .क्यों, ये खुला राज़ है.

आइस रिंक का अब क्या होगा

देहरादून में 34 करोड़ रुपए की लागत से ख़ास तौर पर कृत्रिम बर्फ़ तैयार करके बनाया गए आइस रिंक का अब क्या होगा ये एक ऐसा सवाल है जिसका जवाब देते किसी से नहीं बन रहा है.

इस पर बर्फ़ जमाने के लिए हर दिन एक लाख से अधिक सिर्फ़ बिजली का खर्च आता है और इसे बनाए रखने के लिए महीने में कम से कम 15 दिन चालू हालत में रखना ज़रूरी है.

सरकार हाथ खड़े कर चुकी है और कहना ये है कि निजी कंपनियों और होटलों से संपर्क किया जाएगा लेकिन सवाल यही है कि ये कब और कैसे होगा.

इस बीच इसे बनाने वाले कनाडा से आए विशेषज्ञ विदा ले रहे हैं और उत्तराखंड में विशेषज्ञ है नहीं. कहीं ये भविष्य का सफ़ेद हाथी तो नहीं.