कुछ भूल तो नहीं गए 'कैप्टन कूल'

धोनी

भारतीय कप्तान महेंद्र सिंह धोनी कई मामले में आदर्श कप्तान हैं. उनकी कप्तानी का लोहा दुनियाभर के क्रिकेटर और क्रिकेट के जानकार मानते हैं.

भारी मन से ही सही रिकी पोंटिंग से लेकर ग्रैम स्मिथ उनकी कप्तानी की सराहना करते नहीं थकते. मैदान पर वे कैप्टन कूल हैं यानी विपरीत परिस्थितियों में भी उनका संतुलन क़ायम रहता है.

पहले ट्वेन्टी-20 विश्व कप में ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ मैच में जोगिंदर शर्मा से आख़िरी ओवर कराने का फ़ैसला धोनी जैसी धाकड़ सोच वाला क्रिकेटर ही ले सकता है.

उस ओवर में न सिर्फ़ जोगिंदर शर्मा ने शानदार गेंदबाज़ी की बल्कि दो विकेट लेकर भारतीय जीत में अहम भूमिका भी निभाई.

इंडियन प्रीमियर लीग में भी चेन्नई सुपर किंग्स को तीसरे सत्र में ख़िताब जितवाने में धोनी की अहम भूमिका रही.

तो इसमें कोई शंका नहीं कि धोनी दुनिया के सर्वश्रेष्ठ कप्तानों में शुमार है.

उनके नेतृत्व में भारत ने न सिर्फ़ आईसीसी की टेस्ट रैंकिंग में शीर्ष स्थान बनाए रखा है बल्कि वनडे रैंकिंग में भी दूसरे नंबर पर है. तो कप्तानी में धोनी को पूरे के पूरे अंक.

निराशा

लेकिन हाल के दिनों में कप्तान धोनी की बल्लेबाज़ी ने ज़रूर क्रिकेट प्रेमियों को निराश किया है.

विश्व कप इतना नज़दीक है और उस स्थिति में बल्लेबाज़ के रूप में धोनी का लगातार फ़्लॉप होना चिंता का विषय है. पिछले पाँच एक दिवसीय मैचों में धोनी ने कुल 75 रन बनाए हैं.

न्यूज़ीलैंड के ख़िलाफ़ एक दिवसीय सिरीज़ में धोनी खेले नहीं थे. लेकिन दक्षिण अफ़्रीका के ख़िलाफ़ टेस्ट हो या वनडे धोनी ने कोई कमाल नहीं दिखाया. पहले टेस्ट की दूसरी पारी में 90 रनों के अलावा उनका प्रदर्शन अच्छा नहीं रहा.

विश्व कप के मद्देनज़र धोनी को एक बात तो ज़रूर समझनी चाहिए कि वे न सिर्फ़ कप्तान हैं बल्कि मध्यक्रम में भारतीय बल्लेबाज़ी के एक मज़बूत स्तंभ भी हैं.

टीम में ज़्यादा युवा खिलाड़ियों की मौजूदगी उन पर और दबाव बनाती है कि वे विपरीत परिस्थितियों में न सिर्फ़ संयम वाली कप्तानी करें, बल्कि बल्लेबाज़ी में भी अपना दम दिखाएँ.

एक समय अपनी धमाकेदार बल्लेबाज़ी से सबको सकते में डाल देने वाले धोनी बल्लेबाज़ी को लेकर उनके फ़िक्रमंद नहीं दिखते. और यही बात भारतीय टीम के लिए चिंता की बात है.

प्रदर्शन

दक्षिण अफ़्रीका के ख़िलाफ़ वनडे सिरीज़ में एक बात जिसपर सबकी नज़र गई, वो थी बल्लेबाज़ों की नाकामी. भले ही भारत ने दो वनडे मैचों में रोमांचक जीत दर्ज की, लेकिन सबको पता है कि उनमें से एक में मुनाफ़ पटेल ने तो दूसरे में पठान और भज्जी ने मैच जितवाई.

Image caption धोनी की कप्तानी का लोहा हर कोई मानता है

कप्तान धोनी ने भी स्वीकार किया है कि टीम की बल्लेबाज़ी से वे निराश है. लेकिन धोनी जब भी ये बात करते हैं कि बल्लेबाज़ों ने निराश किया तो कहीं न कहीं बाक़ी के बल्लेबाज़ों के प्रदर्शन पर बात आकर ख़त्म सी हो जाती है.

लेकिन जहाँ तक धोनी के ख़ुद का सवाल है, उनका प्रदर्शन भी बहुत अच्छा नहीं रहा है. किसी पारी में पाँच तो किसी में 23. वनडे मैच में शतक लगाए उन्हें एक साल से ज़्यादा हो चुके हैं.

ये विश्व कप भारतीय उपमहाद्वीप पर हो रहा है. पिछले विश्व कप की बुरी यादों से उबरते हुए जब धोनी को कप्तानी सौंपी गई थी, तो उन्होंने भारतीय क्रिकेट प्रेमियों से वादा किया था.

उन्होंने उस समय कहा था कि उन्हें समय चाहिए एक टीम बनाने के लिए और वे क्रिकेट प्रेमियों को निराश नहीं करेंगे. टीम के चयन पर फिर कभी बात करेंगे लेकिन इस समय धोनी को टीम के प्रदर्शन के साथ-साथ अपनी बल्लेबाज़ी पर भी ध्यान देने की आवश्यकता है.

उम्मीद कीजिए कि भारतीय क्रिकेट प्रेमी जब पिछले विश्व कप की बुरी यादों को भुलाने के लिए कमर कस पर स्टेडियम में या फिर टीवी स्क्रीन के सामने डटे रहेंगे, उस समय धोनी न सिर्फ़ कप्तानी का कमाल दिखाएँ बल्कि बल्ले के ज़ोर पर भारत को अच्छे प्रदर्शन की ओर ले जाएँ.

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