इन खिलाड़ियों पर होगी नज़र

मुथैया मुरलीधरन

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जन्म: 17 अप्रैल, 1972 (कैंडी)

टीम: श्रीलंका, लंकाशायर, चेन्नई सुपर किंग्स

पहला टेस्ट: अगस्त 1992 में ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ (कोलंबो)

पहला वनडे: अगस्त 1993 में भारत के ख़िलाफ़ (गॉल)

पहला ट्वेन्टी 20: दिसंबर 2006 में न्यूज़ीलैंड के ख़िलाफ़ (वेलिंग्टन)

टेस्ट: 133, रन: 1261, सर्वश्रेष्ठ: 67, औसत: 11.67, शतक: 00, विकेट: 800

वनडे: 339, रन: 667, सर्वश्रेष्ठ: 33, औसत: 06.80, शतक: 00, विकेट: 517

टी-20: 12, रन: 01, सर्वश्रेष्ठ: 01, औसत: 00.50, शतक: 00, विकेट: 13

एक ऐसा गेंदबाज़, जो विवादों की पृष्ठभूमि में न सिर्फ़ पनपा, बल्कि स्पिन की दुनिया का बादशाह बन बैठा. शेन वॉर्न और मुथैया मुरलीधरन को अपने समय का बेहतरीन स्पिनर माना जाता है.

ये विश्व कप मुरलीधरन का आख़िरी विश्व कप है. मुरलीधरन चाहेंगे कि अपनी टीम को विश्व कप जिताकर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से विदाई लें. भारतीय उपमहाद्वीप में हो रहे इस विश्व कप में मुरली का प्रदर्शन टीम के लिए काफ़ी अहम साबित हो सकता है.

वे न सिर्फ़ किफ़ायती गेंदबाज़ हैं बल्कि गिल्लियाँ उखाड़ने में भी उस्ताद हैं. एक समय उनकी गेंदबाज़ी ऐक्शन को लेकर इतना विवाद उठा था कि लगा इस महान स्पिनर का करियर समय से पहले ही ख़त्म हो जाएगा.

लेकिन मुरलीधरन इन सबसे उठकर आज टेस्ट और वनडे में सबसे ज़्यादा विकेट लेने वाले गेंदबाज़ बन गए हैं.

कुमार संगकारा

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जन्म: 27 अक्तूबर, 1977 (मटाले)

टीम: श्रीलंका, वॉरविकशायर, किंग्स इलेवन पंजाब

पहला टेस्ट: जुलाई 2000 में दक्षिण अफ़्रीका के ख़िलाफ़ (गॉल)

पहला वनडे: जुलाई 2000 में पाकिस्तान के ख़िलाफ़ (गॉल)

पहला ट्वेन्टी 20: जून 2006 में इंग्लैंड के ख़िलाफ़ (साउथैम्पटन)

टेस्ट: 94, रन: 8244, सर्वश्रेष्ठ: 287, औसत: 57.25, शतक: 24, कैच: 163

वनडे: 279, रन: 8604, सर्वश्रेष्ठ: 138, औसत: 36.76, शतक: 10, कैच: 274

टी-20: 29, रन: 777, सर्वश्रेष्ठ: 78, औसत: 31.08, शतक: 00, कैच: 14

इस समय श्रीलंका की कप्तानी कुमार संगकारा के कंधों पर है और ज़िम्मेदारी है वर्ष 1996 की तरह अपनी टीम को विश्व चैम्पियन बनाने की.

पूर्व कप्तान अर्जुन रणतुंगा और असांका गुरुसिंघे की तर्ज़ पर बाएँ हाथ से बल्लेबाज़ी करने वाले संगकारा ने समय के साथ न सिर्फ़ टीम में अपनी जगह पक्की की है, बल्कि आज उनके कंधों पर बड़ी ज़िम्मेदारी है.

आकर्षक किंतु आक्रामक शैली की बल्लेबाज़ी करने वाले संगकारा आज अपनी टीम की बल्लेबाज़ी की रीढ़ हैं. उनकी बल्लेबाज़ी का नमूना उस समय देखने को मिला, जब वर्ष 2006 में उन्होंने और महेला जयवर्धने ने दक्षिण अफ़्रीका के ख़िलाफ़ 624 रन जोड़े थे.

उस समय उनके सामने डेल स्टेन और मखाया एंटिनी जैसे गेंदबाज़ थे. संगकारा ने 287 रन बनाए थे. अब देखना ये है कि विश्व कप में संगकारा अपनी ज़िम्मेदारी के बोझ तले दबते हैं या शानदार प्रदर्शन करते हैं.

रिकी पोंटिंग

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जन्म: 19 दिसंबर, 1974 (तस्मानिया)

टीम: ऑस्ट्रेलिया, तस्मानिया, कोलकाता नाइट राइडर्स

पहला टेस्ट: दिसंबर 1995 में श्रीलंका के ख़िलाफ़ (पर्थ)

पहला वनडे: फरवरी 1995 में दक्षिण अफ़्रीका के ख़िलाफ़ (वेलिंग्टन)

पहला ट्वेन्टी 20: फरवरी 2005 में न्यूज़ीलैंड के ख़िलाफ़ (ऑकलैंड)

टेस्ट: 152, रन: 12363, सर्वश्रेष्ठ: 257, औसत: 53.51, शतक: 39, विकेट: 05

वनडे: 352, रन: 13082, सर्वश्रेष्ठ: 164, औसत: 42.75, शतक: 29, विकेट: 03

टी-20: 17, रन: 401, सर्वश्रेष्ठ: 98, औसत: 28.64, शतक: 00, विकेट: 00

एक समय वनडे क्रिकेट का बेहतरीन बल्लेबाज़ माने जाने वाले रिकी पोंटिंग इस समय भले ही बुरे दौर से गुज़र रहे हैं, लेकिन एक बार फिर टीम प्रबंधन ने कप्तानी की ज़िम्मेदारी उन्हें देकर ये जता दिया है कि पोंटिंग में शानदार वापसी की क्षमता है.

अपनी टीम को विश्व कप जितवाने वाले रिकी पोंटिंग के नेतृत्व में ऑस्ट्रेलिया को ऐशेज़ में हार का सामना करना पड़ा और टेस्ट रैंकिंग में टीम पाँचवें स्थान तक पहुँच गई.

विश्व कप में अपने नेतृत्व में एक भी मैच न गँवाने वाले रिकी पोंटिंग क्या विश्व कप में बेहतरीन प्रदर्शन से आलोचकों को करारा जवाब देंगे- यही सवाल सबके मन में है. पोंटिंग के पिछले प्रदर्शनों को देखते हुए कम से कम ये असंभव तो नहीं लगता.

माइकल क्लार्क

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जन्म: 02 अप्रैल, 1981 (न्यू साउथ वेल्स)

टीम: ऑस्ट्रेलिया, हैम्पशायर, न्यू साउथ वेल्स

पहला टेस्ट: अक्तूबर 2004 में भारत के ख़िलाफ़ (बंगलौर)

पहला वनडे: जनवरी 2003 में इंग्लैंड के ख़िलाफ़ (एडिलेड)

पहला ट्वेन्टी 20: फरवरी 2005 में न्यूज़ीलैंड के ख़िलाफ़ (ऑकलैंड)

टेस्ट: 69, रन: 4742, सर्वश्रेष्ठ: 168, औसत: 46.49, शतक: 14, विकेट: 21

वनडे: 184, रन: 5768, सर्वश्रेष्ठ: 130, औसत: 43.69, शतक: 05, विकेट: 52

टी-20: 34, रन: 488, सर्वश्रेष्ठ: 67, औसत: 21.21, शतक: 00, विकेट: 06

ऑस्ट्रेलियाई टीम के उप कप्तान और भविष्य के पूर्णकालिक कप्तान के रूप में उभर रहे माइकल क्लार्क से विश्व कप में उनकी टीम को काफ़ी उम्मीदें हैं. एक समय अपने बल्ले का ज़ोर दिखाने वाले क्लार्क आजकल ज़िम्मेदारी से बल्लेबाज़ी कर रहे हैं.

टेस्ट क्रिकेट में उनका संयम बहुत काम आया है और समय के साथ वे एक बेहतरीन बल्लेबाज़ के रूप में सामने आए हैं. एक दिवसीय क्रिकेट में उनका प्रदर्शन काफ़ी अच्छा रहा है. उन्होंने वनडे में बल्ले के साथ-साथ गेंद से भी कमाल दिखाया है.

माना जा रहा है कि रिकी पोंटिंग के बाद टीम की कमान उन्हें मिल सकती है. वैसे रिकी पोंटिंग की ग़ैर मौजूदगी में उन्होंने हाल ही में संपन्न ऐशेज़ समेत कई बार कप्तानी की है. लेकिन विश्व कप में टीम का मान बचाने के लिए माइकल क्लार्क का अच्छा प्रदर्शन बहुत मायने रखेगा.

ब्रेट ली

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जन्म: 08 नवंबर, 1976 (न्यू साउथ वेल्स)

टीम: ऑस्ट्रेलिया, न्यू साउथ वेल्स, किंग्स इलेवन पंजाब

पहला टेस्ट: दिसंबर 1999 में भारत के ख़िलाफ़ (मेलबर्न)

पहला वनडे: जनवरी 2000 में पाकिस्तान के ख़िलाफ़ (ब्रिसबेन)

पहला ट्वेन्टी 20: फरवरी 2005 में न्यूज़ीलैंड के ख़िलाफ़ (ऑकलैंड)

टेस्ट: 76, रन: 1451, सर्वश्रेष्ठ: 64, औसत: 20.15, शतक: 00, विकेट: 310

वनडे: 188, रन: 897, सर्वश्रेष्ठ: 57, औसत: 16.01, शतक: 00, विकेट: 328

टी-20: 19, रन: 91, सर्वश्रेष्ठ: 43, औसत: 18.20, शतक: 00, विकेट: 18

एक समय दुनिया के सबसे तेज़ गेंदबाज़ बने ब्रेट ली का करियर भी ढलान पर है.

इसलिए नहीं कि उनका प्रदर्शन ख़राब चल रहा है, बल्कि इसलिए कि लगातार घायल होने के कारण ब्रेट ली अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से बीच-बीच में ऐसे ग़ायब होते हैं कि पता नहीं चलता कि वे अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में हैं भी या नहीं.

उनका लय-ताल भी इसके कारण प्रभावित हुआ है. कभी ग्लेन मैकग्रॉ तो कभी जेसन गिलेस्पी के ख़तरनाक जोड़ीदार के रूप में ब्रेट ली दुनिया की शीर्ष बल्लेबाज़ी क्रम को धूल चटाई है. लेकिन अफ़सोस इस खिलाड़ी का करियर चोट के कारण बहुत प्रभावित रहा है.

नई गेंद से आउटस्विंग और पुरानी गेंद से रिवर्स स्विंग कराने में उनकी उस्तादी का लोहा पूरी दुनिया ने माना है. वर्ष 2010 में टेस्ट क्रिकेट से संन्यास ले चुके ब्रेट ली को उम्मीद है कि वनडे में वे जलवा दिखा पाएँगे और उनके लिए विश्व कप से बढ़िया मौक़ा क्या हो सकता है.

शाहिद अफ़रीदी

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जन्म: 01 मार्च, 1980 (खैबर एजेंसी)

टीम: पाकिस्तान, कराची, डेक्कन चार्जर्स

पहला टेस्ट: अक्तूबर 1998 में ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ (कराची)

पहला वनडे: अक्तूबर 1996 में कीनिया के ख़िलाफ़ (नैरोबी)

पहला ट्वेन्टी 20: अगस्त 2006 में इंग्लैंड के ख़िलाफ़ (ब्रिस्टल)

टेस्ट: 27, रन: 1716, सर्वश्रेष्ठ: 156, औसत: 36.51, शतक: 05, विकेट: 48

वनडे: 306, रन: 6431, सर्वश्रेष्ठ: 124, औसत: 23.81, शतक: 06, विकेट: 288

टी-20: 42, रन: 671, सर्वश्रेष्ठ: 54, औसत: 18.13, शतक: 00, विकेट: 53

एक ऐसा खिलाड़ी, जिसके लिए पाकिस्तान की क्रिकेट टीम में स्थायी जगह बनाना कोई मुश्किल काम नहीं था. लेकिन कभी पाकिस्तानी क्रिकेट में हमेशा उतार-चढ़ाव तो कभी विवादों के कारण अफ़रीदी का करियर भी उतार-चढ़ाव वाला रहा है.

किसी भी आक्रमण की धज्जियाँ उड़ा देने वाले अफ़रीदी की पाकिस्तानी टीम में स्थायी जगह नहीं बन पाई. लेग स्पिन करने वाले ऑल राउंडर अफ़रीदी एक दिवसीय मैचों में विपक्षी टीम के लिए काफ़ी ख़तरनाक साबित हो सकते हैं.

वनडे में सबसे तेज़ शतकों में से दो उनके नाम है और ये साबित करता है कि अफ़रीदी किसी भी टीम के लिए कितने ख़तरनाक साबित हो सकते हैं.

विवादों और मैच फ़िक्सिंग के आरोपों से प्रभावित पाकिस्तानी टीम इस विश्व कप में किस मनोबल के साथ उतरेगी, ये देखने वाली बात होगी और ये भी देखने वाली बात होगी कि अफ़रीदी कितना कमाल दिखा पाते हैं.

शोएब अख़्तर

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जन्म: 13 अगस्त, 1975 (कराची)

टीम: पाकिस्तान, रावलपिंडी, कोलकाता नाइट राइडर्स

पहला टेस्ट: नवंबर 1997 में वेस्टइंडीज़ के ख़िलाफ़ (रावलपिंडी)

पहला वनडे: मार्च 1998 में ज़िम्बाब्वे के ख़िलाफ़ (हरारे)

पहला ट्वेन्टी 20: अगस्त 2006 में इंग्लैंड के ख़िलाफ़ (ब्रिस्टल)

टेस्ट: 46, रन: 544, सर्वश्रेष्ठ: 47, औसत: 10.07, शतक: 00, विकेट: 178

वनडे: 157, रन: 391, सर्वश्रेष्ठ: 43, औसत: 09.09, शतक: 00, विकेट: 242

टी-20: 15, रन: 21, सर्वश्रेष्ठ: 08, औसत: 07.00, शतक: 00, विकेट: 19

नंबर पर न जाओ...अपनी अक्ल आज़माओ. ये बात फ़िट बैठती है रावलपिंडी एक्सप्रेस शोएब अख़्तर के लिए. सुपरफ़ास्ट गेंदबाज़ के रूप में ब्रेट ली के प्रतिद्वंद्वी के रूप में उभरे शोएब अख़्तर किसी भी पाकिस्तानी क्रिकेटर की तरह काम के कारण नहीं बल्कि विवादों के कारण चर्चित रहे हैं.

कभी टीम को सहयोग न देने का आरोप, तो कभी पाकिस्तानी क्रिकेट बोर्ड से दो-दो हाथ करने के कारण. कभी पाबंदी लगने के कारण, तो कभी माफ़ी मांगकर पाबंदी हटवाने के कारण.

इमरान ख़ान, वसीम अकरम और वक़ार यूनुस के उत्तराधिकारी के रूप में टीम में आए शोएब अख़्तर ने न सिर्फ़ अपने को साबित किया बल्कि विश्व क्रिकेट में धमाकेदार एंट्री ली.

सचिन तेंदुलकर और राहुल द्रविड़ जैसे बल्लेबाज़ को लगातार दो गेंदों पर बोल्ड आउट करना उनके करियर का ज़बरदस्त मोड़ था. लेकिन विवादों में घिरे शोएब लगातार अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट नहीं खेल पाए.

कभी गेंद से छेड़छाड़ का आरोप तो कभी मैच फ़िक्सिंग के आरोप, फिर साथी खिलाड़ी की मार-पिटाई और फिर अदालत के चक्कर. अब विश्व कप की टीम में उन्हें शामिल करके क्रिकेट बोर्ड ने उम्मीद तो जताई है.

हो सकता है ये विश्व कप एक बार फिर शोएब को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में स्थापित करने का मौक़ा दे जाए.

मिसबाहुल हक़

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जन्म: 28 मई, 1974 (पंजाब)

टीम: पाकिस्तान, सरगोधा, रॉयल चैलेंजर्स बंगलौर

पहला टेस्ट: मार्च 2001 में न्यूज़ीलैंड के ख़िलाफ़ (ऑकलैंड)

पहला वनडे: अप्रैल 2002 में न्यूज़ीलैंड के ख़िलाफ़ (लाहौर)

पहला ट्वेन्टी 20: सितंबर 2007 में बांग्लादेश के ख़िलाफ़ (नैरोबी)

टेस्ट: 23, रन: 1459, सर्वश्रेष्ठ: 161, औसत: 42.91, शतक: 02, विकेट: 00

वनडे: 58, रन: 1554, सर्वश्रेष्ठ: 79, औसत: 37.90, शतक: 00, विकेट: 00

टी-20: 31, रन: 637, सर्वश्रेष्ठ: 87, औसत: 37.47, शतक: 00, विकेट: 00

नैरोबी में वर्ष 2002 में हुई त्रिकोणीय प्रतियोगिता में मिसबाहुल हक़ का नाम सुर्ख़ियों में आया. उन्होंने तीन पारियों में दो अर्धशतक लगाए थे. फिर धीरे-धीरे वे पाकिस्तानी क्रिकेट में स्थापित होते चले गए.

बीच में ऐसा भी दौर आया जब उन्हें टीम से हटा दिया गया क्योंकि उनका बल्ला नहीं चल पा रहा था. वैसे मिसबाहुल हक़ ऐसे पाकिस्तानी खिलाड़ी हैं, जिनका नाम सुर्ख़ियों में कम ही रहता है.

पिछले विश्व कप और फिर ट्वेन्टी-20 विश्व कप में मिसबाहुल हक़ ने अपने प्रदर्शन से छाप छोड़ी और फिर नियमित वनडे खिलाड़ी के रूप में जगह भी बनाई.

मध्यक्रम में पाकिस्तान के पास मिसबाहुल के रूप में एक बेहतरीन खिलाड़ी है, जो मैच का रुख़ बदल सकता है. वे समय पड़ने पर आक्रामक पारी भी खेल सकते हैं और संयम से भी.

ज़ाक कैलिस

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जन्म: 16 अक्तूबर, 1975 (केपटाउन)

टीम: दक्षिण अफ़्रीका, केप कोबरा, रॉयल चैलेंजर्स बंगलौर

पहला टेस्ट: दिसंबर 1995 में इंग्लैंड के ख़िलाफ़ (डरबन)

पहला वनडे: जनवरी 1996 में इंग्लैंड के ख़िलाफ़ (केपटाउन)

पहला ट्वेन्टी 20: अक्तूबर 2005 में न्यूज़ीलैंड के ख़िलाफ़ (जोहानेसबर्ग)

टेस्ट: 145, रन: 11947, सर्वश्रेष्ठ: 201, औसत: 57.43, शतक: 40, विकेट: 270

वनडे: 307, रन: 11002, सर्वश्रेष्ठ: 139, औसत: 45.84, शतक: 17, विकेट: 259

टी-20: 16, रन: 512, सर्वश्रेष्ठ: 73, औसत: 34.13, शतक: 00, विकेट: 05

एक ऐसा बल्लेबाज़, जिसने धीरे-धीरे ही सही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर न सिर्फ़ अपनी धाक जमाई है बल्कि अपनी कलात्मक बल्लेबाज़ी और उतनी ही अच्छी गेंदबाज़ी के कारण बेहतरीन ऑलराउंडर भी माने जाते हैं. उनका विकेट हासिल करना विपक्षी गेंदबाज़ों के लिए एक पुरस्कार है.

विश्व कप की टीम में उनका होना दक्षिण अफ़्रीका को और मज़बूत बनाता है. ख़िताब के दावेदारों में उनकी टीम के गिने जाने के पीछे एक वजह ज़ाक कैलिस भी हैं. वर्ष 1997 में ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ खेली गई उनकी बेहतरीन पारी आज भी लोगों को याद है.

उसके बाद तो उन्होंने अपनी टीम के लिए कई ऐसी पारियाँ खेली हैं. अब देखना ये है कि अपने देश का ये स्टार खिलाड़ी अपनी टीम को ख़िताब दिलवा पाता है या नहीं.

हाशिम अमला

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जन्म: 31 मार्च, 1983 (डरबन)

टीम: दक्षिण अफ़्रीका, डॉल्फ़िन्स, क्वाज़ुलू नटाल

पहला टेस्ट: नवंबर 2004 में भारत के ख़िलाफ़ (कोलकाता)

पहला वनडे: मार्च 2008 में बांग्लादेश के ख़िलाफ़ (चटगाँव)

पहला ट्वेन्टी 20: जनवरी 2009 में ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ (ब्रिसबेन)

टेस्ट: 51, रन: 3897, सर्वश्रेष्ठ: 253, औसत: 46.95, शतक: 12, विकेट: 00

वनडे: 40, रन: 1976, सर्वश्रेष्ठ: 140, औसत: 56.45, शतक: 06, विकेट: 00

टी-20: 03, रन: 53, सर्वश्रेष्ठ: 26, औसत: 17.66, शतक: 00, विकेट: 00

हाशिम अमला भारतीय मूल के पहले खिलाड़ी हैं, जिन्हें दक्षिण अफ़्रीका की राष्ट्रीय टीम में जगह मिली है. हाशिम अमला की राष्ट्रीय टीम में एंट्री धमाकेदार नहीं रही. वर्ष 2004 में उन्हें भारत के ख़िलाफ़ अपना पहला टेस्ट खेलने का मौक़ा मिला, लेकिन अमला उस समय नहीं चल पाए.

इंग्लैंड के ख़िलाफ़ सिरीज़ में तो उन्होंने चार पारियों में कुल 36 रन बनाए. लेकिन दूसरी बार मौक़ा मिलने पर उन्होंने अपनी प्रतिभा साबित की और न्यूज़ीलैंड के ख़िलाफ़ शानदार शतक भी लगाया.

लेकिन धीरे-धीरे वे टीम के नियमित सदस्य हो गए हैं. टेस्ट मैच हो या वनडे टीम की बल्लेबाज़ी का काफ़ी कुछ दारोमदार हाशिम अमला पर ही है.

डेल स्टेन

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जन्म: 27 जून, 1983 (फलाबोरवा)

टीम: दक्षिण अफ़्रीका, वॉरविकशायर, रॉयल चैलेंजर्स बंगलौर

पहला टेस्ट: दिसंबर 2004 में इंग्लैंड के ख़िलाफ़ (पोर्ट एलिज़ाबेथ)

पहला वनडे: अगस्त 2005 में एशिया इलेवन के ख़िलाफ़ (सेंचुरियन)

पहला ट्वेन्टी 20: नवंबर 2007 में न्यूज़ीलैंड के ख़िलाफ़ (जोहानेसबर्ग)

टेस्ट: 46, रन: 620, सर्वश्रेष्ठ: 76, औसत: 13.77, शतक: 00, विकेट: 238

वनडे: 46, रन: 104, सर्वश्रेष्ठ: 35, औसत: 08.66, शतक: 00, विकेट: 67

टी-20: 21, रन: 08, सर्वश्रेष्ठ: 05, औसत: 04.00, शतक: 00, विकेट: 29

डेल स्टेन अपनी गेंदबाज़ी को लेकर 'स्टेनगन' के नाम से चर्चित हो गए थे. अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अब उनकी पहचान है और विपक्षी बल्लेबाज़ उन्हें आसानी से नहीं खेल पाते. स्टेन की ख़ासियत से गेंद से उनका प्रयोग. बल्लेबाज़ को परेशान करने में वे कोई कोर कसर नहीं छोड़ते.

इंग्लैंड के ख़िलाफ़ अपने पहले टेस्ट में स्टेन ऐसे गेंदबाज़ नज़र आए, जो लक्ष्य से भटक गए थे. लेकिन दूसरी सिरीज़ में स्टेन ने अपनी ग़लतियों को सुधारते हुए गेंदबाज़ी की और दूसरी सिरीज़ में उन्होंने कुल 16 विकेट लिए.

फिर भी उनमें वो आक्रामकता की कमी थी, जो एक तेज़ गेंदबाज़ में होती है. 2007-08 में पहली बार डेल स्टेन ज़बरदस्त नज़र आए और न्यूज़ीलैंड के ख़िलाफ़ जोहानेसबर्ग में उन्होंने 10 विकेट झटके.

उसके बाद तो स्टेन की कहानी सबको पता है. अपनी टीम की गेंदबाज़ी के अगुआ डेल स्टेन से दक्षिण अफ़्रीका को काफ़ी उम्मीदें हैं.

केविन पीटरसन

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जन्म: 27 जून, 1980 (नटाल)

टीम: इंग्लैंड, नटाल, रॉयल चैलेंजर्स बंगलौर

पहला टेस्ट: जुलाई 2005 में ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ (लॉर्ड्स)

पहला वनडे: नवंबर 2004 में ज़िम्बाब्वे के ख़िलाफ़ (हरारे)

पहला ट्वेन्टी 20: जून 2005 में ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ (साउथैम्पटन)

टेस्ट: 71, रन: 5666, सर्वश्रेष्ठ: 227, औसत: 48.42, शतक: 17, विकेट: 05

वनडे: 106, रन: 3410, सर्वश्रेष्ठ: 116, औसत: 42.09, शतक: 07, विकेट: 06

टी-20: 30, रन: 937, सर्वश्रेष्ठ: 79, औसत: 36.03, शतक: 00, विकेट: 01

केविन पीटरसन यानी केपी ने जब रंग के आधार पर कोटा सिस्टम का विरोध करते हुए दक्षिण अफ़्रीका को छोड़ा था, उस समय उन्हें एक ऐसा ऑफ़ स्पिनर माना जाता था, जो थोड़ी बहुत बल्लेबाज़ी कर सकता है.

लेकिन आज देखिए पीटरसन में किसी भी आक्रमण की धज्जियाँ उड़ाने का माद्दा है. काउंटी क्रिकेट में उन्होंने सबसे पहले अपनी बल्लेबाज़ी का दम दिखाया, फिर तो वनडे और टेस्ट दोनों में कई यादगार पारियाँ खेलकर उन्होंने अपने आप को दुनिया के बेहतरीन बल्लेबाज़ों में शुमार करा लिया.

पीटरसन ने सिर्फ़ 21 वनडे में 1000 रन बनाकर विवियन रिचर्ड्स की बराबरी की है, तो डॉन ब्रैडमैन के बाद 25 टेस्ट में सबसे ज़्यादा टेस्ट रन बनाने वाले खिलाड़ी भी हैं.

एंड्रयू स्ट्रॉस

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जन्म: 02 मार्च, 1977 (जोहानेसबर्ग)

टीम: इंग्लैंड, मिडिलसेक्स, नॉर्दर्नडिस्ट्रिक्ट

पहला टेस्ट: मई 2004 में इंग्लैंड के ख़िलाफ़ (लॉर्ड्स)

पहला वनडे: नवंबर 2003 में श्रीलंका के ख़िलाफ़ (दम्बुला)

पहला ट्वेन्टी 20: जून 2005 में ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ (साउथैम्पटन)

टेस्ट: 82, रन: 6084, सर्वश्रेष्ठ: 177, औसत: 43.14, शतक: 19, विकेट: 00

वनडे: 115, रन: 3774, सर्वश्रेष्ठ: 154, औसत: 35.60, शतक: 05, विकेट: 00

टी-20: 04, रन: 73, सर्वश्रेष्ठ: 33, औसत: 18.25, शतक: 00, विकेट: 00

टेस्ट क्रिकेट में अपनी ख़ास तकनीक के कारण चर्चित एंड्रयू स्ट्रॉस ने अपने चिर प्रतिद्वंद्वी ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ दो बेहतरीन पारी खेलकर अपना नाम इतिहास में दर्ज करा लिया है.

कप्तान के रूप में हालिया ऐशेज़ सिरीज़ में इंग्लैंड की सफलता एंड्रयू स्ट्रॉस के लिए भी ख़ास तोहफा लेकर आई है. स्ट्रॉस के रूप में इंग्लैंड को ऐसा कप्तान भी मिल गया है, जिस पर एक दिवसीय और फिर टेस्ट टीम की ज़िम्मेदारी भी दी जा सकती है.

पॉल कॉलिंगवुड और फिर केविन पीटरसन के बाद इंग्लैंड का टीम प्रबंधन कप्तान के चयन को लेकर काफ़ी पशोपेश में था. लेकिन स्ट्रॉस में आस्था दिखाई गई.

पहली ही परीक्षा में स्ट्रॉस नाकाम ज़रूर रहे लेकिन एंडी फ़्लावर के साथ मिलकर उन्होंने अब ऐसी टीम विकसित की है, जो टेस्ट में नंबर वन बनने की हैसियत रखता है. विश्व कप में स्ट्रॉस को ये साबित करना है कि टेस्ट के अलावा वनडे में भी इंग्लैंड की टीम अपना दमख़म दिखा सकती है.

डेनियल वेटोरी

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जन्म: 27 जनवरी, 1979 (ऑकलैंड)

टीम: न्यूज़ीलैंड, क्वींसलैंड, डेल्ही डेयरडेविल्स

पहला टेस्ट: फरवरी 1997 में इंग्लैंड के ख़िलाफ़ (वेलिंग्टन)

पहला वनडे: मार्च 1997 में श्रीलंका के ख़िलाफ़ (क्राइस्टचर्च)

पहला ट्वेन्टी 20: सितंबर 2007 में कीनिया के ख़िलाफ़ (डरबन)

टेस्ट: 105, रन: 4167, सर्वश्रेष्ठ: 140, औसत: 30.19, शतक: 06, विकेट: 345

वनडे: 263, रन: 2039, सर्वश्रेष्ठ: 83, औसत: 17.13, शतक: 00, विकेट: 277

टी-20: 28, रन: 187, सर्वश्रेष्ठ: 38, औसत: 13.35, शतक: 00, विकेट: 35

डेनियल वेटोरी न्यूज़ीलैंड की ओर से सबसे कम उम्र में टेस्ट क्रिकेट खेलने वाले खिलाड़ी हैं. उन्होंने 18 साल की उम्र में ही टेस्ट क्रिकेट खेलना शुरू किया था. विकेट के साथ-साथ उन्होंने रन भी बनाए हैं.

वेटोरी उन आठ खिलाड़ियों में शामिल हैं, जिन्होंने 300 विकेट लिए हैं और 3000 रन भी बनाए हैं. अभी उन्होंने अपने जीवन के 30 साल ही पूरे किए हैं, इसलिए माना जा रहा है कि वे महान रिचर्ड हैडली के 431 विकेट के रिकॉर्ड को ज़रूर पीछे छोड़ देंगे.

लेकिन वेटोरी के ख़िलाफ़ जो बात जा रही है, वो है बार-बार कमर दर्द से परेशान होना. इस कारण कई बार वेटोरी टेस्ट टीम से दूर रहे हैं. अच्छी गेंदबाज़ी के साथ-साथ वे अच्छी बल्लेबाज़ी भी करते हैं.

लेकिन पिछले साल भारत के साथ वनडे में मिली 5-0 से हार के बाद उनकी कप्तानी पर कई सवाल उठे थे. न्यूज़ीलैंड के टीम प्रबंधन ने उन पर भरोसा तो जताया है लेकिन उन पर दबाव भी काफ़ी होगा.

ब्रैंडन मैकुलम

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जन्म: 27 सितंबर, 1981 (ड्यूनेडिन)

टीम: न्यूज़ीलैंड, कैंटरबरी, कोलकाता नाइट राइडर्स

पहला टेस्ट: मार्च 2004 में दक्षिण अफ़्रीका के ख़िलाफ़ (हैमिल्टन)

पहला वनडे: जनवरी 2002 में ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ (सिडनी)

पहला ट्वेन्टी 20: फरवरी 2005 में ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ (ऑकलैंड)

टेस्ट: 57, रन: 3389, सर्वश्रेष्ठ: 225, औसत: 37.24, शतक: 06, कैच: 167

वनडे: 178, रन: 3711, सर्वश्रेष्ठ: 166, औसत: 28.54, शतक: 02, कैच: 197

टी-20: 40, रन: 1100, सर्वश्रेष्ठ: 116, औसत: 33.33, शतक: 01, कैच: 25

विकेटकीपर बल्लेबाज़ के रूप में ब्रैंडन मैकुलम ऐसे खिलाड़ी हैं, जिन्हें किसी भी आक्रमण को तार-तार कर देने की महारत हासिल है. वनडे मैचों में वे सलामी बल्लेबाज़ी भी कर चुके हैं, वैसे उन्हें किसी भी नंबर पर बल्लेबाज़ी कराई जाए, वे उसमें फ़िट बैठते हैं.

इंडियन प्रीमियर लीग के पहले संस्करण की जिस तरह उन्होंने शुरुआत की थी, वो अब भी लोगों को भूला नहीं है. उनकी 158 रनों की बेहतरीन पारी उनके दमख़म की कहानी कहती है.

वनडे मैचों में भी कई बार अपना बेहतरीन प्रदर्शन कर चुके मैकुलम से इस विश्व कप में न्यूज़ीलैंड की टीम को काफ़ी उम्मीदें हैं और उनकी उम्मीदें यूँ ही नहीं हैं.

केरॉन पोलार्ड

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जन्म: 12 मई, 1987 (त्रिनिडाड)

टीम: वेस्टइंडीज़, त्रिनिडाड एंड टोबैगो, मुंबई इंडियंस

पहला वनडे: अप्रैल 2007 में दक्षिण अफ़्रीका के ख़िलाफ़ (सेंट जॉर्ज)

पहला ट्वेन्टी 20: जून 2008 में ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ (ब्रिजटाउन)

वनडे: 30, रन: 538, सर्वश्रेष्ठ: 62, औसत: 19.92, शतक: 00, विकेट: 30

टी-20: 20, रन: 190, सर्वश्रेष्ठ: 38, औसत: 12.66, शतक: 00, विकेट: 11

वर्ष 2006 में अंडर-19 विश्व कप में हिस्सा ले चुके केरॉन पोलार्ड का नाम उस समय सुर्ख़ियों में आया, जब उन्होंने स्टैन्फ़ोर्ड 20-20 प्रतियोगिता में धमाकेदार पारी खेली.

अगस्त 2006 में उनकी 83 रनों की धमाकेदार पारी ने उन्हें वो प्लेटफ़ॉर्म दिया, जिसकी हर खिलाड़ी को अपेक्षा रहती है. वर्ष 2007 के विश्व कप में पोलार्ड ने अपना पहला एक दिवसीय अंतरराष्ट्रीय मैच खेला.

लेकिन चैम्पियंस लीग में अपना धमाल दिखाकर उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वाहवाही लूटी. नतीजा ये हुआ कि आईपीएल में मुंबई इंडियंस की टीम ने उन्हें साढ़े सात लाख डॉलर देकर ख़रीदा.

आईपीएल 4 के लिए हुई नीलामी वे पोलार्ड मुंबई इंडियंस के उन चार खिलाड़ियों में शामिल थे, जिन्हें टीम ने अपने साथ जोड़े रखा. इस विश्व कप में पोलार्ड की प्रतिभा की असली परीक्षा है.

क्रिस गेल

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जन्म: 21 सितंबर, 1979 (जमैका)

टीम: वेस्टइंडीज़, जमैका, कोलकाता नाइट राइडर्स

पहला टेस्ट: मार्च 2000 में ज़िम्बाब्वे के ख़िलाफ़ (पोर्ट ऑफ़ स्पेन)

पहला वनडे: सितंबर 1999 में भारत के ख़िलाफ़ (टोरंटो)

पहला ट्वेन्टी 20: फरवरी 2006 में न्यूज़ीलैंड के ख़िलाफ़ (ऑकलैंड)

टेस्ट: 91, रन: 6373, सर्वश्रेष्ठ: 333, औसत: 41.65, शतक: 13, विकेट: 72

वनडे: 220, रन: 7885, सर्वश्रेष्ठ: 153, औसत: 39.42, शतक: 19, विकेट: 156

टी-20: 20, रन: 617, सर्वश्रेष्ठ: 117, औसत: 32.47, शतक: 01, विकेट: 12

क्रिस गेल उन खिलाड़ियों में से हैं, जिनका ये आख़िरी विश्व कप हो सकता है. 31 वर्षीय क्रिस गेल वेस्टइंडीज़ के विस्फोटक बल्लेबाज़ हैं. सलामी बल्लेबाज़ के रूप में उन्होंने वेस्टइंडीज़ को कई बार ज़बरदस्त शुरुआत दी है.

पिच पर टिककर विपक्षी गेंदबाज़ों की बखिया उधेड़ने में माहिर गेल का अपना तरीक़ा है. लेकिन गेल का करियर बहुत उतार-चढ़ाव वाला रहा है. वेस्टइंडीज़ में हुआ पिछला विश्व कप तो उनके लिए काफ़ी निराशाजनक रहा था.

कप्तानी मिलना फिर छीना जाना- वेस्टइंडीज़ क्रिकेट में दुर्दशा के दौर को भी रेखांकित करता है. एक समय विश्व क्रिकेट पर राज़ करने वाली वेस्टइंडीज़ टीम अगर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिदृश्य पर लौटना चाहती है, तो विश्व कप जीतना उसके लिए बड़ी उपलब्धि हो सकता है. और अपनी टीम को उस मुकाम तक पहुँचाने में क्रिस गेल अहम भूमिका निभा सकते हैं.

शेन वॉटसन

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जन्म: 17 जून, 1981 (क्वींसलैंड)

टीम: ऑस्ट्रेलिया, न्यू साउथ वेल्स, राजस्थान रॉयल्स

पहला टेस्ट: जनवरी 2005 में पाकिस्तान के ख़िलाफ़ (सिडनी)

पहला वनडे: मार्च 2002 में दक्षिण अफ़्रीका के ख़िलाफ़ (सेंचुरियन)

पहला ट्वेन्टी 20: फरवरी 2006 में दक्षिण अफ़्रीका के ख़िलाफ़ (जोहानेसबर्ग)

टेस्ट: 27, रन: 1953, सर्वश्रेष्ठ: 126, औसत: 41.55, शतक: 02, विकेट: 43

वनडे: 118, रन: 3208, सर्वश्रेष्ठ: 161, औसत: 41.66, शतक: 05, विकेट: 121

टी-20: 22, रन: 455, सर्वश्रेष्ठ: 81, औसत: 23.94, शतक: 00, विकेट: 16

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आने के लिए शेन वॉटसन ने जितने पापड़ बेले हैं, शायद ही किसी क्रिकेटर ने बेले हो. शेन वॉटसन को कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ा, जो उनके शरीर से संबंधित थे.

वर्ष 2005 में पहला टेस्ट खेलने वाले शेन वॉटसन वर्ष 2009 में असली रंग में नज़र आए जब ऐशेज़ के बीच में उन्हें सलामी बल्लेबाज़ के रूप में चुना गया. इसके बाद वॉटसन ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा.

उन्होंने एक दिवसीय मैचों और ट्वेन्टी-20 में भी अपनी कला दिखाई और आज वे अपनी टीम का अभिन्न अंग हैं. सलामी बल्लेबाज़ के रूप में वॉटसन ने कई मैच जिताऊ पारियाँ खेली हैं. ऑस्ट्रेलिया को उम्मीद है कि वॉटसन के टीम में रहते टीम को धमाकेदार शुरुआत मिलेगी.

एल्टन चिगुम्बुरा

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जन्म: 14 मार्च, 1986 (मिडलैंड्स)

टीम: ज़िम्बाब्वे, अफ़्रीका इलेवन, नॉर्थैम्पटनशायर

पहला टेस्ट: मई 2004 में श्रीलंका के ख़िलाफ़ (हरारे)

पहला वनडे: अप्रैल 2004 में श्रीलंका के ख़िलाफ़ (बुलावायो)

पहला ट्वेन्टी 20: नवंबर 2006 में ज़िम्बाब्वे के ख़िलाफ़ (खुलना)

टेस्ट: 06, रन: 187, सर्वश्रेष्ठ: 77, औसत: 15.58, शतक: 00, विकेट: 09

वनडे: 122, रन: 2461, सर्वश्रेष्ठ: 79, औसत: 24.12, शतक: 00, विकेट: 81

टी-20: 14, रन: 174, सर्वश्रेष्ठ: 34, औसत: 14.50, शतक: 00, विकेट: 12

वर्ष 2004 में अंडर-19 विश्व कप के दौरान राष्ट्रीय टीम में आए चिगुम्बुरा को बाग़ी खिलाड़ियों के कारण जल्द ही सीनियर टीम में आने का मौक़ा मिल गया.

मई 2004 में श्रीलंका के ख़िलाफ़ अपने पहले टेस्ट में चिगुम्बुरा ने बल्ले और गेंद दोनों से अच्छा प्रदर्शन किया. चिगुम्बुरा चोट के कारण भी काफ़ी परेशान रहे हैं और उनका करियर भी प्रभावित रहा है.

ज़िम्बाब्वे की अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में स्थिति भी कई खिलाड़ियों के पतन का कारण रही है. कई खिलाड़ियों को इस कारण अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास भी लेना पड़ा है. एक समय विश्व कप में अच्छा प्रदर्शन करने वाली ज़िम्बाब्वे की टीम इस बार कुछ कर पाएगी- मुश्किल लगता है.

शाकिब अल हसन

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जन्म: 24 मार्च, 1987 (जेसौर)

टीम: बांग्लादेश, खुलना डिविज़न, वुरसेस्टरशायर

पहला टेस्ट: मई 2007 में भारत के ख़िलाफ़ (चटगाँव)

पहला वनडे: अगस्त 2006 में ज़िम्बाब्वे के ख़िलाफ़ (हरारे)

पहला ट्वेन्टी 20: नवंबर 2006 में ज़िम्बाब्वे के ख़िलाफ़ (खुलना)

टेस्ट: 21, रन: 1179, सर्वश्रेष्ठ: 100, औसत: 31.02, शतक: 01, विकेट: 75

वनडे: 102, रन: 2834, सर्वश्रेष्ठ: 134, औसत: 34.98, शतक: 05, विकेट: 129

टी-20: 14, रन: 207, सर्वश्रेष्ठ: 47, औसत: 14.78, शतक: 00, विकेट: 17

बाएँ हाथ के स्पिनर और प्रतिभाशाली बल्लेबाज़ शाकिब अल हसन के पास इस समय बांग्लादेश टीम की कमान है. अंडर-19 विश्व कप से राष्ट्रीय टीम में जगह बनाने वाले शाकिब ने अच्छे प्रदर्शन से सबका ध्यान अपनी ओर खींचा.

पहले गेंदबाज़ के रूप में टीम में चुने गए शाकिब ने बाद में अपनी बल्लेबाज़ी का भी जौहर दिखाया. इसका अंदाज़ा इससे भी लगाया जा सकता है कि उन्होंने एक दिवसीय मैच में पाँच शतक और टेस्ट मैच में एक शतक लगाया है.

कई अहम मौक़ों पर बांग्लादेश की टीम ने बड़ी-बड़ी महारथी टीमों को धूल चटाई है. पिछले विश्व कप में भारत को अगले दौर में न पहुँचने देने के पीछे भी बांग्लादेश की बड़ी भूमिका थी. अब देखना है कि शाकिब के नेतृत्व में बांग्लादेश की टीम क्या कमाल करती है.