ये दाग़ अच्छे नहीं...

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विश्व कप हरेक क्रिकेट प्रेमियों के दिलों पर दस्तक दे रहा है. क्रिकेट दीवानों को देखते हुए भारतीय उपमहाद्वीप में हो रहे एक दिवसीय क्रिकेट के सबसे बड़े मुक़ाबले में सब कुछ अच्छा दिख रहा है.

धूम-धड़ाके के साथ प्रचार-प्रसार हो रहा है और सबको इंतज़ार है इस बड़ी प्रतियोगिता का. लेकिन इन सबके बीच भारतीय उपमहाद्वीप के एक प्रमुख देश में क्रिकेट पर संकट मँडरा रहा है. पिछले दिनों एक कार्यक्रम के दौरान जब विश्व कप जीतने वाले सभी पूर्व कप्तान अपने-अपने देश के दावे का डंका पीट रहे थे, इमरान ख़ान ख़ामोश नज़र आए.

जब उनकी बारी आई तो लगा जैसे अपने देश को क्रिकेट की बुलंदियों पर पहुँचाने वाला एक शख़्स अपनी टीम को लेकर बहुत हताश-परेशान है. ये अजीब बात है लेकिन है सच कि भारतीय उपमहाद्वीप में हो रहे विश्व कप में पाकिस्तान की टीम को दावेदार भी नहीं माना जा रहा है.

उस पर से ठीक दो हफ़्ते पहले पाकिस्तान के तीन क्रिकेटरों पर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद की गाज गिरना ये साबित करता है कि देश के क्रिकेट का हाल क्या है.

आईसीसी ने मोहम्मद आमिर, मोहम्मद आसिफ़ और सलमान बट को स्पॉट फ़िक्सिंग का दोषी पाया है. विश्व कप के ठीक पहले पाकिस्तान टीम के लिए मनोबल के लिए ये ख़बर बिल्कुल अच्छी नहीं.

निराशा

पिछले दिनों जब इमरान ख़ान अपनी टीम से निराश-हताश नज़र आ रहे थे, तो उन्होंने कप्तानी का भी मुद्दा उठाया था. विश्व कप जैसी प्रतियोगिता के लिए पाकिस्तान की टीम ने दो सप्ताह पहले कप्तान के नाम की घोषणा की.

क्यों. वजह स्पष्ट है. टीम में एकजुटता का अभाव और खिलाड़ियों के आपसी मतभेद. एक गुट जहाँ मिसबाहुल हक़ को कप्तान बनाना चाहता था तो एक गुट अफ़रीदी को. एक दिवसीय क्रिकेट में अपने अनुभव और रिकॉर्ड के कारण शाहिद अफ़रीदी को भले ही कप्तानी मिल गई हो, लेकिन टीम में सिर फुटव्वल रुकेगी, इस पर भी संदेह है.

लेकिन पाकिस्तानी क्रिकेट में लगातार कुछ न कुछ होते रहने के लिए सिर्फ़ खिलाड़ियों को दोष देना ठीक नहीं. क्रिकेट प्रशासकों और राजनेताओं ने एक अच्छे भले क्रिकेट की शक्तिशाली टीम का बेड़ा गर्क कर दिया है.

जिस किसी ने भी पाकिस्तानी क्रिकेट बोर्ड (पीसीबी) के प्रमुख की बागडोर संभाली, उसने टीम का इस तरह कायाकल्प करने की कोशिश की कि कई अच्छे खिलाड़ी कहाँ चले गए, पता ही नहीं चला.

पुराने धुरंधर खिलाड़ियों को जब कोच बनाया गया तो मैदान के अंदर और बाहर क्रिकेट को छोड़कर वे बाक़ी हर चीज़ के लिए चर्चित रहे.

देश की राजनीतिक स्थिति ने क्रिकेट टीम के दुर्भाग्य को और बढ़ाया. पैसे के लिए आईसीसी के आगे हाथ फैलाते बोर्ड को इसकी फ़िक्र ही नहीं रही कि क्रिकेट की बुनियाद को मज़बूत करना भी उनका दायित्व है.

लगातार होने वाली चरमपंथी घटनाओं के कारण अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैच पाकिस्तान को मिलने बंद हो गए, देश का क्रिकेट प्रेमी तरस गया कि कभी भारत-पाकिस्तान मैच के रोमांच का वो अपनी ज़मीन पर भी लुत्फ़ उठाए.

पाकिस्तान के तीन क्रिकेटरों को स्पॉट फ़िक्सिंग का दोषी ठहराए जाने के बाद ये सवाल भी उठने लगे हैं कि पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड ऐसी घटनाओं पर रोक लगाने में नाकाम क्यों है?

विवाद

पाकिस्तानी क्रिकेट और विवाद का पुराना रिश्ता रहा है. लेकिन बोर्ड ने क्या इनको रोकने के लिए क़दम उठाए हैं? अधिकारियों के पास इसका जवाब नहीं.

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Image caption शोएब और अफ़रीदी जैसे खिलाड़ी मैच का पासा पलट सकते हैं

खिलाड़ियों पर आरोप-प्रत्यारोप, निलंबन-वापसी, मुक़दमा करना, फिर वापस लेना और तो और खिलाड़ियों की आपस में मारपीट- पाकिस्तान क्रिकेट ने वे सभी दिन देख लिए हैं, जो कोई सपने में भी नहीं चाहेगा.

पाकिस्तानी क्रिकेट की ख़ूबसूरती और कई खिलाड़ियों का मुरीद होने के नाते मैंने उम्मीद नहीं छोड़ी है. इमरान ख़ान का हताश-निराश चेहरा भले ही एक दुर्भाग्यशाली टीम की दास्तां बयां करता हो, लेकिन मौक़ा अब भी है.

पाकिस्तानी क्रिकेट टीम कई बार विपरीत परिस्थितियों से लड़ते हुए बड़े मुक़ाबलों में अच्छा प्रदर्शन करती है. लगातार दो ट्वेन्टी-20 विश्व कप के फ़ाइनल में पहुँचकर पाकिस्तान ने सभी आकलनों को झुठलाया है.

पाकिस्तानी टीम इस बार भी वापसी कर सकती है. लेकिन उन्हें सब कुछ भूलकर विश्व कप को लक्ष्य बनाकर मैदान में उतरना होगा.

कप्तान शाहिद अफ़रीदी, शोएब अख़्तर, मिसबाहुल हक़, उमर ग़ुल, अब्दुल रज़्ज़ाक़ और यूनिस ख़ान जैसे खिलाड़ी चाहें तो मैच का पासा पलट सकते हैं.

लेकिन गुटों में बँटी पाकिस्तानी टीम के लिए उसके तीन क्रिकेटरों पर आईसीसी की पाबंदी की ख़बर बहुत बुरे समय में आई है और ये दाग़ उसके लिए बिल्कुल अच्छे नहीं.

क्या पाकिस्तानी टीम इन सबसे उबर कर एक बार फिर अच्छे प्रदर्शन से सबको चकित करेगी? क्या ऐसा होगा? हम भी इंतज़ार करते हैं और आप भी कीजिए.

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