'सोचा नहीं था कि विश्व विजेता बन जाएंगे'

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Image caption कपिल देव, इमरान ख़ान और अर्जुन रणतुंगा.

1983 में क्रिकेट का विश्व कप जीत कर भारतीय टीम ने इतिहास रच दिया. कपिल देव उस विजेता टीम के कप्तान थे.

कपिल के नेतृत्व में भारतीय टीम की इस जीत ने भारतीय क्रिकेट की दिशा ही बदल दी. इस विश्व कप के एक मैच में ज़िम्बाब्वे के खिलाफ़ उनकी 175 रन ( 16x 4, 6x6 ) की नाबाद पारी को भला कौन भूल सकता है.

17 रन पर भारत ने पाँच विकेट गंवा दिए थे लेकिन कपिल ने आकर जादुई पारी खेली और भारत को जीत दिलाई. इसी जीत की बदौलत भारत सेमीफ़ाइनल में पहुँचा.

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Image caption कपिल देव की ज़िम्बाब्वे के ख़िलाफ़ 175 रन की पारी इस विश्व की ख़ास बातों में से एक थी.

फ़ाइनल में कपिल ने ही मदन लाल की गेंद पर ख़तरनाक साबित हो रहे विव रिचडर्स का बेहतरीन कैच लपका था जिसने एक तरह से फ़ाइनल का रुख़ बदल दिया था.

कपिल ने 1983 के विश्व कप में कुल 303 रन बनाए और 12 विकेट लिए. उस ऐतिहासिक जीत की यादें कपिल देव बाँट रहे हैं बीबीसी के साथ

"जब हम विश्व कप खेलने गए थे तो हमने सोचा नहीं था कि हम जीतेंगे. हां हमने ये ज़रूर सोचा था कि कुछ मैच जीतकर अगर हम सेमीफ़ाइनल तक भी पहुंच गए तो ये बहुत बड़ी उपलब्धि होगी.

उसके पहले हम वेस्ट इंडीज़ को वेस्ट इंडीज में हरा कर आए थे. तो हमें ये तो लग रहा था कि हममें जीतने का माद्दा है, लेकिन जीतने का तजुरबा नहीं था. लगातार जीत की आदत नहीं थी.

फिर फ़ाइनल में हम वेस्ट इंडीज़ के ख़िलाफ़ सिर्फ़ 183 रन बनाकर लंच से पहले ही आउट हो गए. हमारे पास बहुत वक़्त था.

सब कोई आराम से चाय कॉफ़ी पी रहे थे और हम सोच रहे थे कि ये हमने क्या किया. एकदिवसीय मैचों में 183 रन का स्कोर तो बहुत कम होता है. लेकिन हमने सोचा कि हम हौसला नहीं हारेंगे. उनके लिए 184 रन का लक्ष्य भी मुश्किल कर देंगे.

हमने सोचा कि अगले साढ़े तीन घंटे हमारी ज़िंदगी बदल सकते हैं. हमने गेंदबाज़ी करते वक़्त ज़्यादा योजना नहीं बनाई क्योंकि उस वक़्त रणनीति की नहीं बल्कि जोश और उत्साह की ज़रूरत थी.

जब हम लॉर्ड्स में हुआ ये फ़ाइनल जीत गए तो उसके बाद जो हुआ उसे बयां करने के लिए मेरे पास अल्फ़ाज़ नहीं है. लगातार जश्न चल रहा था. पता नहीं कहां से शैंपेन आ रही थी.

हम सब अपनी धुन में इतने मगन थे कि क्या हो रहा है कुछ पता ही नहीं चल रहा था.

ड्रेसिंग रूम में कौन आ रहा था कौन जा रहा था किसी को नहीं पता था. बिलकुल भिंडी बाज़ार जैसा माहौल था.

फिर हम सब वेस्ट इंडीज़ की टीम से मिलने उनके ड्रेसिंग रूम भी गए.

आज सोचो तो विश्वास ही नहीं होता कि ये सब कैसे हुआ था. हमने सोचा नहीं था की लगभग 30 सालों बाद भी लोग उस जीत को याद रखेंगे."

(बीबीसी संवाददाता साइमा इक़बाल से हुई बातचीत के आधार पर)

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