बांग्लादेश इस बार 'अंडरडॉग' नहीं

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Image caption टीम इंडिया का पहला मैच बाँगलादेश से

अतीत को याद करना और उन क्षणों की हुबहू परिकल्पना करना अपने आप में एक मुश्किल काम हो सकता है.

विश्व कप में भारत-बांग्लादेश का शुरुआती मैच भारतीय प्रशंसकों के लिए कुछ भयावह यादें ताज़ा कर रहा है क्योंकि चार साल पहले इन्हीं परिस्थतियों में दोनों देशों के बीच हुए मैच के परिणाम ने एक निश्चियत आकार लेने से पहले ही भारतीय सपनों को तोड़ दिया था.

दूरदराज़ के देश त्रिनिड्राड की राजधानी पोर्ट ऑफ़ स्पेन में भारत की टीम ने एक बार 400 रन बनाकर एक मशहूर टेस्ट विजय दर्ज की थी. वहीं आज 2007 को उस विश्व कप के लिए याद किया जाता है जब भारतीय टीम बिल्कुल शुरू में ही टूर्नामेंट से बाहर हो गई थी.

अब जब विश्व कप की शुरुआत हो रही है भारतीय टीम पहले से कहीं अधिक मज़बूत,स्थिर और निश्चिंत दिखाई दे रही है. फिर भी उसके लिए उन ज़ख्मों को भूल पाना मुश्किल है जो उन्हें एक ऐसी टीम ने पहुँचाए थे जिनके बारे में कहा जा रहा था कि वह सिर्फ़ भाग लेने वालों की गिनती को पूरा करने के लिए वहाँ आई थी.

बांग्लादेशी पत्रकारों के बार-बार याद दिलाने के बावजूद कि उनकी टीम एक ख़तरनाक प्रतिद्वंदी हो सकती है,हमने उनकी तरफ़ तब तक ध्यान नहीं दिया था जब तक उन्होंने हमें उस ठिकाने से हटा नहीं दिया था जिसे हम अपना मान कर चल रहे थे.

वक़्त से पहले टूर्नामेंट से बाहर हो जाने ने व्यवसायिक रूप से क्रिकेट जगत को इतना बड़ा धक्का पहुँचाया था कि चार साल बाद उन्होंने विश्व कप का ऐसा फ़ॉर्मेट बनाया है कि चाहे परिणाम जो भी हो,चोटी की टीमें एक महीने से पहले टूर्नामेंट से बाहर हो ही नहीं सकती.

यह नहीं कि भारत को इस बार इस उदारता की ज़रूरत पड़ती क्योंकि इस समय वह दुनिया की नंबर दो टीम है और सभी मानते हैं कि वह ख़िताब की प्रबल दावेदार भी है.

किसी भी टीम के लिए घरेलू परिस्थितियों, दर्शकों का समर्थन, लाखों शुभकामनाएं और करोड़ों रुपयों का प्रायोजक समर्थन इतना बड़ा प्रोत्साहन है कि वह चाँद से भी कूद कर बच निकलने की उम्मीद कर सकती है.

और अगर इस टीम को रास्ते में उन्हें कुछ पथरीली गलियाँ भी मिलें तब भी यह टीम इतनी मज़बूत है कि वह अपने अंतिम लक्ष्य तक पहुँचने में सक्षम है.

दूसरी तरफ़ बांग्लादेश की टीम इस बार ज़्यादा तनाव और दबाव में होगी क्योंकि इस बार वह उस तरह की ‘अंडरडॉग’ नहीं है जो वह चार साल पहले थी.

और वैसे भी दोनों टीमों के लिए आश्वस्त होने की बात यह है कि चाहे परिणाम जो भी हो, यह सड़क का अंत नहीं है बल्कि एक लंबे सफ़र की शुरुआत भर है.

कुछ भी हो भारत को हल्के में नहीं लिया जा सकता.क्रिकेटीय तर्क भी कहता है कि अगर वह चैंपियन बनने की महत्वाकाँक्षा रखते हैं तो उस में कुछ ग़लत नहीं है.

फिर भी इस खेल की ख़ूबसूरती इसी में है कि इसके परिणाम अंतिम क्षणों तक हमेशा अगर और मगर के रहस्य में छुपे रहते हैं और यही कारण है कि हम इनका अनुसरण करते हैं.

एक ऐसे समय में जब ख़ुद क्रिकेट को कई चुनौतियाँ मिल रही हैं आइए हम सब नीरस,उबाऊ और एक तरफ़ा मैचों की बजाए कई सिहरन पैदा करने वाले चमकदार और रोमाँच से भरपूर मैच देखने की उम्मीद करें.

(लेखक हिंदुस्तान टाइम्स के खेल सलाहकार हैं)

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