सूना पड़ा है दादा का मोहल्ला

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शनिवार को भारत और बांग्लादेश के मैच के साथ विश्वकप क्रिकेट की शुरूआत हो गई है.

लेकिन इस मौके पर कोलकाता का एक ऐसा कोना बिल्कुल खामोश है जहां कई सप्ताह पहले से जश्न की तैयारियां शुरू हो जाती थीं.

ये कोना है पश्चिम कोलकाता स्थित बेहला का.

ये मोहल्ला है भारतीय क्रिकेट टीम के सफलतम कप्तानों में शुमार किए जाने वाले सौरव गांगुली यानी दादा का.

पहले स्थानीय क्लबों की ओर से हर विश्वकप के पहले ही यहां जगह-जगह पंडाल बना कर बड़े परदे पर मैच दिखाने की व्यवस्था की जाती थी. लेकिन इस बार वहां मुर्दनी छाई है.

बेहला से गुज़रते हुए लगता ही नहीं है कि विश्वकप हो रहा है.

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अरसे बाद यह पहला विश्वकप है जिसमें दादा नहीं हैं.

वो अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से पहले ही सन्यास ले चुके हैं.

इंडियन प्रीमियर लीग के टौथे संस्करण में भी किसी टीम ने उनको भाव नहीं दिया. इसलिए दादा के समर्थकों में भारी नाराजगी है.

बेहला के प्लेयर्स कार्नर क्लब के एक पदाधिकारी देवाशीष गांगुली कहते हैं, “पिछले विश्वकप के दौरान भी हमने विशाल पर्दे लगा कर यहां मैच देखने-दिखाने की व्यवस्था की थी. वर्ष 2003 के विश्वकप फाइनल में आस्ट्रेलिया के खिलाफ होने वाले मैच के दौरान इलाके के तमाम लोगों के लिए पंडाल में चाय-नाश्ते की भी व्यवस्था रखी गई थी.”

लेकिन इस बार सूनापन क्यों है?

वो कहते हैं, “ अरे अब सौरव टीम में नहीं हैं. यह सब कर के क्या होगा? कोई यहां मैच देखने नहीं आएगा.”

सौरव ने जिस बड़िशा स्पोर्टिंग क्लब के सदस्य के तौर पर हाथ में बल्ला लेकर खेलना सीखा था वहां की हालत तो और खराब है.

वहां ताला लटक रहा है.

क्लब के पड़ोस में रहने वाले सुदीप राय कहते हैं, “जब तक सौरव टीम में थे लोगों में गजब का उत्साह था. पूरा मोहल्ला सौरव के पक्ष में एकजुट रहता था. अब सौरव टीम में नहीं है तो हमारा उत्साह भी खत्म हो गया है.”

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Image caption दादा का मोहल्ला

बड़िशा क्लब के अरूप चटर्जी कहते हैं कि इस बार उन्होंने विश्वकप के लिए कोई खास इंतज़ाम नहीं किया है.

पिछले विश्वकप तक यहां सौरव समेत तमाम क्रिकेट सितारों के बड़े-बड़े पोस्टरों को बिजली की रंग-बिरंगी झालरों से सजा कर बड़े परदे पर मैच दिखाने की व्यवस्था थी. लेकिन इस बार दूर-दूर तक कहीं कोई उत्साह नहीं नजर आता.

खुद सौरव भी आम दिनों की तरह अपना काम कर रहे हैं.

दिन में टीवी शो की शूटिंग के अलावा कुछ अकबारों में नियमित तौर पर कालम लिखने के अलावा विभिन्न लोगों के साथ बैठक.

वो कहते हैं, ‘मौका मिलने पर टीवी पर कुछ मैच देखूंगा.”

एक क्रिकेटप्रेमी देवी प्रसाद कहते हैं कि यहां ईडेन में भारत का कोई मैच नहीं होने की वजह से भी लोगों का उत्साह बिल्कुल ठंडा पड़ गया है.

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