टिकटों की कमी से नाराज़गी

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जब से क्रिकेट प्रशंसकों को पता चला है कि मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में विश्व कप फ़ाइनल के लिए सिर्फ़ 4000 टिकट ही उपलब्ध हैं, उनमें ग़ुस्से की लहर दौड़ गई है.

वानखेड़े स्टेडियम में पिछले कई दिनों से नवीनीकरण का काम चल रहा है जिसकी वजह से उसकी क्षमता 38000 से घटकर सिर्फ़ 33000 रह गई है.

टूर्नामेंट के निदेशक रत्नाकर शेट्टी ने बताया कि वह पहले से ही इस बात के लिए बाध्य हैं कि 20000 टिकट मुंबई क्रिकेट संघ से जुड़े हुए क्लबों को उपलब्ध कराए जाएं और 8500 टिकट आईसीसी को दिए जाएं जिसकी वजह से बिक्री वाले टिकटों की संख्या घट कर इतनी कम रह गई है.

नाराज़ प्रशंसक सवाल कर रहे हैं कि कोलकाता के ईडेन गार्डेन को फ़ाइनल के लिए क्यों नहीं चुना गया, जहाँ 65000 दर्शकों के बैठने की सुविधा है.

नाराज़गी

एक प्रशंसक ने क्रिक इन्फ़ो की वेब साइट पर लिखा, "घृणित......सिर्फ़ 4000 टिकट... यह प्रबंधन की बहुत बड़ी विफलता है."

दूसरे ने जोड़ा- क्या आप मज़ाक कर रहे हैं? हम देश के सबसे छोटे मैदानों में से एक में फ़ाइनल क्यों आयोजित कर रहे हैं? अगर 2 अप्रैल तक ईडेन गार्डेन तैयार हो जाए तो फ़ाइनल को वहाँ शिफ़्ट कर देना चाहिए.

एक और प्रशंसक का कहना था कि भारत में फ़ाइनल कराने का तुक ही क्या है जब करोड़ों लोगों में सिर्फ़ 4000 लोग ही फ़ाइनल देख पाएंगे.

शेट्टी ने स्वीकार किया कि उनके हाथ अनुबंध की शर्तों से बंधे हुए हैं लेकिन 20000 टिकट क्लबों को जाने का मतलब यह है कि आम जनता उन टिकटों से महरूम नहीं रहेगी.

आईसीसी ने कहा है कि फ़ाइनल और दोनों सेमी फ़ाइनल के टिकट सोमवार से ऑनलाइन उपलब्ध करा दिए जाएंगे.

इस बीच शेट्टी ने कहा है कि वानखेड़े का मैदान 13 और 18 मार्च को होने वाले मैचों के लिए तैयार हो जाएगा.

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