जब राष्ट्रगान बीच में ही रुका

दक्षिण अफ़्रीकी प्रशंसक इमेज कॉपीरइट AFP

दक्षिण अफ्रीका और वेस्ट इंडीज़ के बीच दिल्ली में हुए मैच से पहले जब दोनों देशों के राष्ट्रगान चल रहे थे तो दक्षिण अफ़्रीका का राष्ट्रगान बीच में चलते-चलते रुक गया.

दक्षिण अफ़्रीकी खिलाड़ियों ने इससे विचलित हुए बग़ैर बिना संगीत के ही अपना राष्ट्र गान गाना जारी रखा.

बाद में आईसीसी ने राष्ट्रीय गान की ख़राब रिकॉर्डिंग के लिए दक्षिण अफ़्रीका से माफ़ी मांगी.

उन्होंने उन्हें विश्वास दिलाया कि अगले मैच में यह ग़लती दोहराई नहीं जाएगी.

क़लम छोड़नी पड़ी

क़रीब एक साल बाद किसी अंतरराष्ट्रीय मैच का आयोजन कर रहे फ़िरोज़शाह कोटला में सुरक्षा व्यवस्था बहुत कड़ी थी. यहाँ तक कि क़लम भी अंदर ले जाने की मनाही थी.

मैंने सुरक्षा कर्मियों को लाख समझाया कि क़लम के बग़ैर मैं अपनी रिपोर्ट कैसे लिख पाउँगा लेकिन उनकी समझ में कुछ नहीं आया. मजबूरन मुझे अपनी क़लम उनके पास छोड़नी पड़ी.

लेकिन मीडिया बॉक्स में एक पत्रकार दोस्त को मुझपर तरस आ गया और उसने अपनी कलम मुझे उधार दे दी.

क़रीब 12000 दर्शक फ़िरोज़शाह कोटला मैदान में मौजूद थे.

शीला और मुन्नी

दक्षिण अफ़्रीका से ज़्यादा लोग यह मैच देखने आए थे लेकिन भारतीय दर्शकों की ज़्यादातर वाहवाही वेस्ट इंडीज़ के खिलाड़ियों को मिल रही थी.

ब्रावो जब अच्छे शॉट लगा रहे थे तो दर्शक ब्रावो-ब्रावो चिल्ला रहे थे.पोलार्ड जब बैटिंग करने आए तो पूरा स्टेडियम ही खड़ा हो गया.

पहली बार किसी विश्व कप मैच में ये दिखाई दिया कि दो ओवरों के बीच में पब्लिक एड्रेस सिस्टम पर मुन्नी बदनाम हुई और शीला की जवानी जैसे गाने बजाए जा रहे थे. जब भी कोई चौका या छक्का लगता था तो बाक़ायदा नगाड़ों की आवाज़ सुनाई देती थी.

जब भी कोई निर्णय तीसरे अंपायर के पास भेजा जाता था तो उसका फ़ैसला आने तक सस्पेंस वाला संगीत भी बजाया जाता था.

संबंधित समाचार