'टूट रहा है अंपायरों का आत्मविश्वास'

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कई विवादों के कारण चर्चा में रहे पूर्व टेस्ट अंपायर डेरेल हेयर ने कहा है कि रेफ़ेरल सिस्टम के कारण अंपायरों का आत्मविश्वास कम हो रहा है और इसे तुरंत ख़त्म कर दिया जाना चाहिए.

इस विश्व कप में रेफ़ेरल सिस्टम के कारण फ़ील्ड अंपायरों के कई फ़ैसले बदले जा चुके हैं. रेफ़ेरल सिस्टम के मुताबिक़ वनडे मैच में हर टीम को दो-दो बार अंपायरों के फ़ैसले को चुनौती देने का अधिकार दिया गया है.

भारत, श्रीलंका और बांग्लादेश में हो रहे इस विश्व कप में पहली बार रेफ़ेरल सिस्टम को आज़माया जा रहा है.

अपने फ़ैसलों के कारण कई बार चर्चा में रहे पूर्व टेस्ट अंपायर डेरेल हेयर का कहना है कि इस सिस्टम के कारण युवा खिलाड़ी भी अंपायरों के फ़ैसलों को चुनौती दे रहे हैं.

कोशिश

न्यू साउथ वेल्स क्रिकेट अंपायर्स एंड स्कोरर एसोसिएशन के जर्नल में डेरेल हेयर ने लिखा है, "मैं नहीं समझ सकता कि लगातार फ़ैसलों के बदले जाने के कारण आईसीसी अंपायरों का आत्मविश्वास कितना टूट रहा होगा."

उन्होंने लिखा है कि ऐशेज़ सिरीज़ के दौरान बिली बॉडेन और अलीम दार जैसे अच्छे अंपायरों पर भी सवाल उठे. डेरेल हेयर का कहना है कि आईसीसी को अंपायरों के साथ मिलकर ये सुनिश्चित करने की कोशिश करनी चाहिए कि ज़्यादातर मौक़ों पर उनके फ़ैसले सही हों.

उन्होंने कहा कि आईसीसी को पहले ये ठीक करने की कोशिश करनी चाहिए कि ऐसे फ़ैसले होते ही क्यों हैं. वर्ष 1992 से 2008 तक टेस्ट अंपायर रहे डेरेल हेयर पर आईसीसी ने वर्ष 2006 में कुछ समय के लिए पाबंदी लगाई थी.

उसी साल इंग्लैंड और पाकिस्तान के बीच हुए टेस्ट मैच में उन्होंने पाकिस्तानी खिलाड़ियों पर बॉल टैम्परिंग का आरोप लगाते हुए इंग्लैंड को पाँच पेनल्टी रन दे दिए थे. इसके बाद विरोधस्वरूप पाकिस्तान की टीम चायकाल के बाद मैदान पर नहीं आई, जिसके कारण ये मैच इंग्लैंड के पक्ष में चला गया.

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