रिकी पॉंटिंग ने ऑस्ट्रेलियाई कप्तान के पद से इस्तीफ़ा दिया

रिकी पॉंटिंग

पांटिंग ने इस्तीफ़ा देकर हाल ही में टीम को मिली हार के लिए नैतिक ज़िम्मेदारी स्वीकार कर ली है.

विश्व क्रिकेट के महानतम नामों में से एक रिकी पॉंटिंग ने ऑस्ट्रेलिया क्रिकेट के टेस्ट और एकदिवसीय टीम की कप्तानी के पद से इस्तीफ़ा दे दिया है.

मंगलवार को सिडनी में एक पत्रकार सम्मेलन में पॉंटिंग ने कहा कि वो कप्तानी के पद से इस्तीफ़ा दे रहे हैं लेकिन एक बल्लेबाज़ के तौर पर चयन किए जाने के लिए वो उपलब्ध रहेंगें.

इस्तीफ़ा देने की वजह बयान करते हुए पॉंटिंग ने कहा कि मैनें फ़िलहाल टेस्ट और एकदिवसीय टीम के कप्तान के पद से इस्तीफ़ा देने का फ़ैसला किया है. इसका मुख्य कारण ये है कि ये सही समय है. मैं नए कप्तान को आने वाले मैचों के लिए तैयार होने का पूरा मौक़ा देना चाहता था.चैम्पियंस ट्रॉफ़ी और 2013-14 के एशेज़ के समय मेरे रहने की संभावना बहुत कम है इसलिए मैने सोचा कि इस्तीफ़ा देने की यही सही मौक़ा है.

मैनें फ़िलहाल टेस्ट और एकदिवसीय टीम के कप्तान के पद से इस्तीफ़ा देने का फ़ैसला किया है. इसका मुख्य कारण ये है कि ये सही समय है. मैं नए कप्तान को आने वाले मैचों के लिए तैयार होने का पूरा मौक़ा देना चाहता था.चैम्पियंस ट्रॉफ़ी और 2013-14 के एशेज़ के समय मेरे रहने की संभावना बहुत कम है इसलिए मैने सोचा कि इस्तीफ़ा देने की यही सही मौक़ा है.

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'दबाव'

पॉंटिंग ने कहा कि मैने चयनकर्ताओं को संदेश दे दिया है कि वो टेस्ट और एकदिवसीय दोनों के लिए चयन किए जाने के लिए उपलब्ध रहेंगें. उन्होंने उम्मीद जताई कि उनका चयन हो जरूर होगा.

विश्व कप के क्वार्टर फ़ाइनल में भारत के हाथों हार पिछले दो दशकों में विश्व कप में ऑस्ट्रेलिया का अब तक का सबसे ख़राब प्रदर्शन है. इससे पहले एशेज़ में भी ऑस्ट्रेलिया एक-तीन से श्रंखला हार गया था.

इन हार से पॉंटिंग के नेतृत्व पर दबाव पड़ रहा था और ऑस्ट्रलिया क्रिकेट बोर्ड ने टीम की सभी पहलुओं की समीक्षा करने की घोषणा की थी.

लेकिन पॉंटिंग ने ऐसी किसी भी अटकल को ख़ारिज कर दिया कि इस्तीफ़ा देने के लिए उनपर किसी तरह का दबाव था.

उन्होंने कहा, मैं यहां बिल्कुल साफ़ कहना चाहता हूं कि मेरे उपर किसी का कोई दबाव नहीं था.ये फ़ैसला सिर्फ़ और सिर्फ़ मेरा है जिसे मैने अपने क़रीबी लोगों ख़ासकर अपने परिवार के सलाह से लिया है.

मैं यहां बिल्कुल साफ़ कहना चाहता हूं कि मेरे उपर किसी का कोई दबाव नहीं था.ये फ़ैसला सिर्फ़ और सिर्फ़ मेरा है जिसे मैने अपने क़रीबी लोगों ख़ासकर अपने परिवार के सलाह से लिया है.

रिकी पॉंटिंग

पॉंटिंग के इस फ़ैसले से उनका नौ साल का करियर समाप्त होता है जिसमें वो ऑस्ट्रेलिया के सबसे सफल कप्तानों में से एक बन गए है.

पॉंटिंग ने कुल 77 टेस्ट में कप्तानी की जिसमें 48 बार ऑस्ट्रेलिया विजयी रहा जिसमें दिसंबर 2005 और जनवरी 2008 के बीच लगातार 16 टेस्ट मैचों में उनकी जीत शामिल है.

पॉंटिंग ने तीन बार विश्व कप जीता है जिसमें दो बार उनकी कप्तानी में ऑस्ट्रेलिया एक भी मैच नहीं हारा था. उन्होंने एक बार चैम्पियन्स ट्रॉफ़ी भी जीती है.

एक बल्लेबाज़ के रुप में भी पॉंटिंग का प्रदर्शन बेहतरीन रहा है. 359 एकदिवसीय मैचों में उन्होंने 13288 रन बनाए हैं जबकि टेस्ट मैचों में उन्होंने 39 शतकों के साथ कुल 12363 रन बनाए हैं.

आंकड़ों के हिसाब से देखा जाए तो एक बल्लेबाज़ के तौर पर पॉंटिंग सिर्फ़ भारतीय बल्लेबाज़ सचिन तेंडुलकर से पीछे हैं.

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