निराशाजनक रही शोएब की विदाई

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भारत और पाकिस्तान के बीच सेमी फ़ाइनल मैच और फिर उस मैच में भारत की जीत के बीच एक ऐसे खिलाड़ी की चर्चा काफ़ी पीछे छूट गई, जो वर्षों तक अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट जगत में चर्चा के केंद्र में रहा.

कभी अपनी सुपरफ़ास्ट गति से तो कभी अपने साथी खिलाड़ी को पीटने के कारण भी उसने सुर्ख़ियाँ बटोरी. लेकिन 30 मार्च को भारत और पाकिस्तान के मैच के शोर-गुल के बीच शायद ही किसी ने इस क्रिकेटर को विदाई देने की भी सोची.

इस विश्व कप के दौरान ही शोएब अख़्तर ने ऐलान कर दिया था कि वे इस प्रतियोगिता के बाद अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास ले लेंगे.

लेकिन भारत की जीत और पाकिस्तान की हार के बीच शायद किसी ने इस बेहतरीन गेंदबाज़ को सलीके से याद नहीं किया. बेहतर होता अगर पंजाब क्रिकेट एसोसिएशन मैच की समाप्ति के बाद शोएब को भी सम्मानित करता.

बेबसी

मैच शुरू होने के बाद अपनी पत्नी को ट्विट करके शोएब ने लिखा था- काश मैं भी आज का मैच खेल पाता. हमारे खिलाड़ियों को अपना सिर ऊँचा करके मैदान से बाहर आना चाहिए.

यह है एक खिलाड़ी की व्यथा, जिसने वर्षों तक पाकिस्तानी तेज़ गेंदबाज़ी आक्रमण का नेतृत्व किया है.

शोएब चाहते थे कि वे भारत के ख़िलाफ़ इस अहम मैच में खेले, लेकिन उन्हें मौक़ा नहीं मिला और कप्तान अफ़रीदी ने वजह गिनाई, उनका पूरी तरह फ़िट होना.

उनकी जगह टीम में शामिल किए गए वहाब रियाज़ ने भारतीय पारी में पाँच विकेट झटके, तो जानकारों ने कहना शुरू किया कि रियाज़ को टीम में लेने का फ़ैसला सही था.

अब इस पर चर्चा करना व्यर्थ है कि कौन टीम में रहता तो क्या होता. लेकिन इतना तो सच है कि रावलपिंडी एक्सप्रेस को इससे बेहतर विदाई दी जा सकती थी.

ख़ासकर उस स्थिति में जबकि उनके संन्यास की घोषणा के बाद पाकिस्तान ने कई मैच खेले और उन्हें मौक़ा नहीं दिया गया.

विवाद

शोएब अख़्तर की चर्चा करते समय उन्हें एक बेहतर गेंदबाज़ के अलावा एक ऐसे खिलाड़ी के रूप में भी याद किया जाएगा, जिनका विवादों से कभी पीछा नहीं छूटा.

अफ़सोस की बात ये है कि अपने करियर के दौरान ज़्यादातर विवादों के लिए वे ख़ुद ही ज़िम्मेदार रहे.

चाहे वो डोपिंग का मामला हो, साथी खिलाड़ियों से झड़प का मामला हो, पाकिस्तानी क्रिकेट बोर्ड के अधिकारियों को उल्टा-सीधा करने का मामला हो- शोएब अख़्तर हर मामले में अपना संतुलन खोते रहे.

उन पर गेंद से छेड़छाड़ के आरोप लगे, उनके ख़िलाफ़ अनुशासनात्मक कार्रवाई हुई और डोपिंग के आरोप लगे. अपने साथी खिलाड़ी मोहम्मद आसिफ़ को अपने बल्ले से मारने के मामले में भी उनकी काफ़ी आलोचना हुई.

एक दुर्भाग्य की बात ये भी रही कि वे लंबे समय तक अपनी फ़िटनेस से भी जूझते रहे.

फ़िटनेस से जूझने वाले शोएब अख़्तर जैसे तेज़ गेंदबाज की आयु अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में वैसे ही कम होती है और समस्याओं को पैदा करने वाले शोएब पर ये मार दोहरी थी.

लेकिन इन सबके बावजूद 35 वर्षीय शोएब अख़्तर ने क्रिकेट प्रेमियों को क्रिकेट की अदभुत दुनिया दिखाई. 14 साल पहले इस खिलाड़ी ने इमरान ख़ान, वसीम अकरम और वक़ार यूनुस की विरासत संभालने का दम दिखाया था.

वर्ष 1997 में शोएब ने अपना पहला टेस्ट वेस्टइंडीज़ के ख़िलाफ़ खेला था. जल्द ही क्रिकेट प्रेमियों को समझ में आ गया कि एक सुपर-डुपर फ़ॉस्ट बॉलर क्रिकेट की दुनिया में क़दम रख चुका है.

शानदार प्रदर्शन

शोएब अख़्तर की वो शानदार गेंदबाज़ी कौन भूल सकता है, जब उन्होंने 1999 की एशियन टेस्ट चैम्पियनशिप के दौरान कोलकाता टेस्ट में दो लगातार गेंदों पर सचिन तेंदुलकर और राहुल द्रविड़ आउट किया था.

इस मैच के दौरान शोएब ने पहली बार सचिन को गेंद फेंकी और पहली ही गेंद पर उन्होंने सचिन को आउट कर दिया.

शोएब अख़्तर ने अपने अंतरराष्ट्रीय करियर में 46 टेस्ट मैच और 163 एक दिवसीय मैच खेले. उन्होंने टेस्ट में 178 विकेट और वनडे में 247 विकेट लिए.

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में उनका ये प्रदर्शन शायद उनको ही अच्छा न लगे. क्योंकि 14 साल का अंतरराष्ट्रीय करियर हमेशा विवादों से घिरा रहा.

इस विश्व कप में भी उनके व्यवहार पर सवाल उठे. न्यूज़ीलैंड के ख़िलाफ़ मैच में उनकी गेंद पर रॉस टेलर के दो कैच कामरान अकमल ने छोड़ दिए. इसके बाद उनकी और कामरान अकमल की मैदान पर ही कहासुनी हो गई थी.

शोएब का पाकिस्तानी टीम से जाना और ऐसे समय जाना, दुखद तो है. लेकिन सच ये भी है कि शोएब में पहले जैसी धार नहीं रह गई थी. जो भी हो रावलपिंडी एक्सप्रेस को क्रिकेट प्रेमी शायद ही भूल पाए.

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